AI सिस्टम—जैसे बड़े भाषा मॉडल, क्लाउड AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर—को बड़ी मात्रा में उन्नत प्रोसेसर और हाई‑बैंडविड्थ मेमोरी की जरूरत होती है। इन दोनों क्षेत्रों में एशिया की कुछ कंपनियों का लगभग दबदबा है। इसलिए जैसे‑जैसे AI निवेश बढ़ रहा है, इन कंपनियों के शेयर भी तेज़ी से चढ़ रहे हैं।
इसका असर सीधे EM इंडेक्स पर पड़ा है। उदाहरण के लिए MSCI Emerging Markets Index ने अप्रैल 2026 में मजबूत वापसी की, जब TSMC के सकारात्मक संकेतों के बाद टेक शेयरों में तेजी आई।
हालांकि इंडेक्स ऊपर जा रहे हैं, लेकिन पूरी EM अर्थव्यवस्था उतनी मजबूत नहीं दिखती। कई रिपोर्टों में बताया गया है कि सिर्फ तीन बड़ी एशियाई चिप कंपनियाँ—TSMC, Samsung और SK Hynix—ही उभरते बाज़ारों की इस रैली को काफी हद तक आगे बढ़ा रही हैं।
इसका मतलब है कि इंडेक्स का प्रदर्शन वास्तविक आर्थिक स्थिति को पूरी तरह नहीं दिखाता।
यानी टेक सेक्टर की तेज़ी बाकी क्षेत्रों की कमजोरी को छिपा सकती है।
2026 में उभरते बाज़ारों के लिए एक बड़ा जोखिम मध्य‑पूर्व का तनाव भी है। ईरान से जुड़े संघर्ष और Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्ग में व्यवधान के कारण वैश्विक तेल कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं।
ऊंचे तेल के दाम उभरते बाज़ारों को अलग‑अलग तरह से प्रभावित करते हैं।
तेल निर्यातक देशों को फायदा मिल सकता है:
लेकिन तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह समस्या बन जाता है:
उदाहरण के तौर पर, कुछ बाजार रिपोर्टों में बताया गया कि तेल और मध्य‑पूर्व तनाव की चिंता के कारण भारत का शेयर बाजार दबाव में रहा, जबकि सेमीकंडक्टर‑प्रधान एशियाई बाजार ऊपर जाते रहे।
ऊंचे तेल की कीमतों का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। ऊर्जा महंगी होने से परिवहन, बिजली और खाद्य कीमतों पर असर पड़ता है, जिससे कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में उपभोक्ता महंगाई केंद्रीय बैंकों के लक्ष्य से ऊपर जा सकती है।
अगर महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक:
यह स्थिति घरेलू मांग, रियल एस्टेट और कर्ज‑संवेदनशील सेक्टरों के लिए नकारात्मक हो सकती है।
इसके साथ‑साथ वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी उभरते बाज़ारों के लिए चुनौती है। जब विकसित देशों में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक अक्सर जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित परिसंपत्तियों में लगाने लगते हैं। इससे EM देशों के लिए उधार लेना महंगा हो जाता है और पूंजी का बहिर्गमन हो सकता है।
शेयर बाजार की तेजी के बावजूद वास्तविक आर्थिक तस्वीर थोड़ी कमजोर दिखती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर का अनुमान घटाकर लगभग 3.9% कर दिया है। इसका कारण ऊंची ऊर्जा कीमतें और भू‑राजनीतिक अनिश्चितता बताई गई है।
इससे एक दिलचस्प अंतर पैदा होता है:
यही वजह है कि कई विश्लेषक इस रैली को “नैरो रैली” यानी सीमित दायरे वाली तेजी कहते हैं।
आने वाले महीनों में कुछ प्रमुख कारक तय करेंगे कि यह रैली जारी रह पाएगी या नहीं।
1. संकेंद्रण जोखिम (Concentration Risk)
अगर AI चिप्स की मांग धीमी पड़ती है या इन कंपनियों की कमाई उम्मीद से कम रहती है, तो EM इंडेक्स पर तुरंत असर पड़ सकता है।
2. ऊर्जा और भू‑राजनीतिक जोखिम
मध्य‑पूर्व में संघर्ष बढ़ने या Hormuz जलडमरूमध्य में व्यवधान से तेल और महंगा हो सकता है।
3. मौद्रिक नीति का जोखिम
महंगाई ऊंची रहने पर केंद्रीय बैंक लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रख सकते हैं।
4. मुद्रा और फंडिंग जोखिम
वैश्विक बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे EM देशों के लिए कर्ज और महंगा हो जाता है।
2026 में उभरते बाज़ारों की शेयर रैली मुख्यतः व्यापक आर्थिक सुधार की वजह से नहीं, बल्कि AI निवेश चक्र की वजह से हो रही है। एशिया की बड़ी सेमीकंडक्टर कंपनियाँ—TSMC, Samsung और SK Hynix—इस तेजी की मुख्य चालक बन गई हैं।
फिलहाल AI चिप्स की मजबूत मांग तेल की ऊंची कीमतों और भू‑राजनीतिक तनाव जैसे जोखिमों को संतुलित कर रही है। लेकिन यह रैली कितनी टिकाऊ होगी, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि सेमीकंडक्टर कंपनियों की कमाई कितनी मजबूत रहती है और क्या महंगाई, तेल की कीमतें और वैश्विक ब्याज दरें नियंत्रण में रहती हैं।
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