जब कुछ अंतरराष्ट्रीय फाउंड्री में मॅच्योर‑नोड क्षमता कम पड़ने लगी, तब कई कंपनियों ने चीन की फैक्ट्रियों को विकल्प के रूप में देखना शुरू किया।
SMIC ने अपनी कमाई चर्चा के दौरान कहा कि विदेशी ग्राहकों के ऑर्डर बढ़ रहे हैं क्योंकि AI बूम के कारण अन्य जगहों की उत्पादन क्षमता पहले ही भर चुकी है।
इस बदलाव के पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:
परिणामस्वरूप सप्लाई चेन में एक नया संतुलन बन रहा है—एडवांस्ड चिप्स अग्रणी फाउंड्री में केंद्रित हो रहे हैं, जबकि पुराने प्रोसेस वाले चिप्स का उत्पादन धीरे‑धीरे चीन की ओर शिफ्ट हो रहा है।
2026 की पहली तिमाही में SMIC के प्रदर्शन ने इस रुझान की झलक दी। कंपनी ने रिपोर्ट किया:
फैक्ट्रियों की उपयोग दर भी बहुत ऊँची रही। मार्च तिमाही में SMIC का कुल उपयोग दर लगभग 93.1% था, जबकि कंपनी लगातार नई क्षमता जोड़ रही है।
इतनी ऊँची उपयोग दर यह संकेत देती है कि खासकर मॅच्योर‑नोड उत्पादन लाइनों के लिए मांग मजबूत बनी हुई है।
कंपनी को उम्मीद है कि यह रुझान अगले क्वार्टर में भी जारी रहेगा।
SMIC ने Q2 2026 के लिए अनुमान दिया है:
ये दोनों आंकड़े बाज़ार की पहले की अपेक्षाओं से बेहतर माने जा रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि मांग और कीमतें दोनों मजबूत रह सकती हैं।
चीन की सेमीकंडक्टर रणनीति में लंबे समय से मॅच्योर‑नोड निर्माण पर विशेष ध्यान रहा है। CSIS के विश्लेषण के अनुसार 2014 से 2025 के बीच चीन की इस श्रेणी में उत्पादन क्षमता वैश्विक मांग की तुलना में चार गुना तेज़ी से बढ़ी, और अब यह वैश्विक क्षमता का लगभग आधा हिस्सा है।
इन चिप्स को अक्सर “लेगेसी” या “फाउंडेशनल” सेमीकंडक्टर कहा जाता है। ये कई रोजमर्रा के उत्पादों के लिए जरूरी होते हैं, जैसे:
क्योंकि इन चिप्स को बनाने के लिए सबसे अत्याधुनिक लिथोग्राफी मशीनों की जरूरत नहीं होती, इसलिए निर्यात प्रतिबंधों के बावजूद चीनी कंपनियाँ इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर पाई हैं।
इन सभी संकेतों को जोड़कर देखें तो सेमीकंडक्टर उद्योग में एक संरचनात्मक बदलाव उभरता दिख रहा है।
निकट भविष्य में चीनी फाउंड्री अत्याधुनिक AI चिप निर्माण में वैश्विक नेताओं को चुनौती देंगी, ऐसा स्पष्ट संकेत अभी नहीं है। लेकिन मॅच्योर‑नोड चिप्स में उनका बढ़ता पैमाना उन्हें वैश्विक सप्लाई चेन का एक महत्वपूर्ण बैकअप और सप्लायर बना रहा है।
सरल शब्दों में, AI क्रांति सिर्फ कंप्यूटिंग को नहीं बदल रही—यह यह भी तय कर रही है कि दुनिया के रोजमर्रा के चिप्स कहाँ बनेंगे।
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