अप्रैल 2026 में इसका प्रभाव साफ दिखाई दिया। उस महीने MSCI Emerging Markets Index लगभग 14.7% बढ़ा, जबकि ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाज़ारों ने क्रमशः करीब 26% और 38% की असाधारण बढ़त दर्ज की।
एक और कारण यह है कि इन देशों के शेयर बाज़ारों में कुछ बड़ी कंपनियों का बहुत ज्यादा प्रभाव है।
इसका मतलब यह है कि जब ये कुछ चिप कंपनियाँ तेज़ी से बढ़ती हैं, तो पूरा इंडेक्स ऊपर चला जाता है।
इस तरह वैश्विक AI निवेश चक्र ने ताइवान और दक्षिण कोरिया को AI हार्डवेयर सप्लाई चेन के सबसे बड़े लाभार्थियों में बदल दिया है।
सेमीकंडक्टर कंपनियों की तेज़ी ने खुद उभरते बाज़ारों के इंडेक्स की संरचना भी बदल दी है। ताइवान और दक्षिण कोरिया का वज़न MSCI Emerging Markets Index में लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि उनकी चिप कंपनियों का मार्केट वैल्यू तेजी से बढ़ा है।
इससे तीन महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ते हैं:
मैक्रोइकोनॉमिक स्तर पर भी परिस्थितियाँ उभरते बाज़ारों के पक्ष में रही हैं। सबसे बड़ा कारक है कमजोर होता अमेरिकी डॉलर।
जब डॉलर कमजोर होता है, तब आमतौर पर उभरते बाज़ारों को फायदा होता है क्योंकि:
2026 की शुरुआत में यूएस डॉलर इंडेक्स कई साल के निचले स्तरों की ओर गिरा, जिससे वैश्विक निवेशकों ने उभरते बाज़ारों में निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया।
इस रैली को केवल कमाई और तकनीकी मांग ही नहीं, बल्कि निवेशकों के पैसे का प्रवाह भी बढ़ा रहा है।
2026 के शुरुआती हफ्तों में ही निवेशकों ने अमेरिका में सूचीबद्ध उभरते बाज़ार ETFs में लगभग 32 अरब डॉलर निवेश किए, जो पूरे पिछले वर्ष के कुल निवेश से भी ज्यादा था।
कई निवेश बैंक और शोध संस्थान यह भी बताते हैं कि उभरते बाज़ारों में:
यह ध्यान रखना जरूरी है कि अमेरिकी शेयर बाज़ार कमजोर नहीं हुआ है—लेकिन तुलनात्मक रूप से उभरते बाज़ार ज्यादा तेजी से बढ़े हैं।
इसके पीछे कुछ कारण हैं:
इससे निवेशकों का ध्यान धीरे‑धीरे एशिया की ओर शिफ्ट हुआ।
हालाँकि तेजी मजबूत दिखती है, लेकिन इसमें कई जोखिम भी हैं।
ताइवान और दक्षिण कोरिया के इंडेक्स का बड़ा हिस्सा TSMC, Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियों पर निर्भर है। अगर इन कंपनियों के शेयर गिरते हैं, तो पूरे इंडेक्स पर असर पड़ सकता है।
दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था में चिप्स का बड़ा योगदान है। 2026 की पहली तिमाही में देश के कुल निर्यात का लगभग 37% हिस्सा सेमीकंडक्टर से आया।
अगर वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मांग कमजोर होती है तो इससे आर्थिक जोखिम बढ़ सकता है।
एशिया की कई अर्थव्यवस्थाएँ निर्यात पर आधारित हैं, इसलिए अमेरिकी टैरिफ या व्यापार नीति में बदलाव बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।
ताइवान दुनिया के सबसे उन्नत सेमीकंडक्टर का 90% से अधिक उत्पादन करता है। यही वजह है कि वह अमेरिका‑चीन भू‑राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के केंद्र में है।
किसी भी बड़े तनाव से वैश्विक सप्लाई चेन और बाजार दोनों प्रभावित हो सकते हैं。
2026 में उभरते बाज़ारों की तेजी को दो बड़ी ताकतों के संगम के रूप में देखा जा सकता है:
लेकिन यह भी सच है कि यह तेजी अभी व्यापक नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे सेमीकंडक्टर‑केंद्रित बाज़ारों से आ रहा है, न कि सभी उभरते देशों से समान रूप से।
फिलहाल जब तक AI इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का चक्र जारी है, तब तक ये बाज़ार इसके सबसे बड़े लाभार्थियों में रह सकते हैं। लेकिन अगर AI निवेश धीमा पड़ता है या भू‑राजनीतिक तनाव बढ़ते हैं, तो वही एकाग्रता जो तेजी ला रही है, गिरावट को भी तेज कर सकती है।
Comments
0 comments