DDD Invoices का प्लेटफॉर्म बिजनेस सॉफ्टवेयर और सरकारी टैक्स नेटवर्क के बीच एक मध्य परत की तरह काम करता है।
सामान्य प्रक्रिया कुछ इस तरह होती है:
इस तरह कंपनियों को Continuous Transaction Controls (CTC), Peppol नेटवर्क, फिस्कलाइजेशन और देश‑विशिष्ट रिपोर्टिंग नियमों के लिए अलग‑अलग तकनीकी समाधान बनाने की जरूरत नहीं रहती।
कंपनी के अनुसार, एक ही API कनेक्शन के जरिए 30 से अधिक देशों के ई‑इनवॉइसिंग नियमों को प्लेटफॉर्म में इंटीग्रेट किया जा सकता है।
DDD Invoices अपने प्लेटफॉर्म में कुछ AI‑आधारित क्षमताएं भी शामिल करती है, जिससे कंप्लायंस प्रक्रिया को ऑटोमेट किया जा सके।
मुख्य AI फीचर शामिल हैं:
इससे कंपनियां इनवॉइस डेटा को मशीन‑रीडेबल फॉर्म में बदल सकती हैं और सबमिशन से पहले स्थानीय नियमों के अनुसार जांच कर सकती हैं।
DDD Invoices को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह मौजूदा बिजनेस सॉफ्टवेयर स्टैक के साथ आसानी से जुड़ सके।
यह निम्न सिस्टमों के साथ इंटीग्रेट हो सकता है:
इसके अलावा यह Stripe, Bitrix, Shopify और Chargebee जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी इंटीग्रेशन प्रदान करता है, जिससे कंपनियां अपने मौजूदा वर्कफ्लो में ही कंप्लायंट इनवॉइसिंग जोड़ सकती हैं।
कई सॉफ्टवेयर कंपनियां पहले से ही DDD Invoices के इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर रही हैं। इनमें शामिल हैं:
ये कंपनियां अपने ग्राहकों को अलग‑अलग देशों में कानूनी रूप से वैध ई‑इनवॉइसिंग सेवाएं देने के लिए इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करती हैं।
इस निवेश राउंड में प्रमुख निवेशक शामिल थे:
इसके अलावा ERP और ई‑इनवॉइसिंग उद्योग के कई एंजेल निवेशकों और सलाहकारों ने भी भाग लिया, जिनमें Bengt Nilsson, Hans Berg, Oscar Wegland, Alexander Jansson और Carl Julius Nilsson शामिल हैं।
कंपनी इस पूंजी का उपयोग अपने तकनीकी प्लेटफॉर्म और बाजार विस्तार के लिए करेगी।
मुख्य प्राथमिकताएं हैं:
जैसे‑जैसे दुनिया भर की सरकारें डिजिटल इनवॉइस और रीयल‑टाइम टैक्स रिपोर्टिंग को अनिवार्य बना रही हैं, वैसे‑वैसे ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म की जरूरत बढ़ रही है। DDD Invoices का लक्ष्य है कि उसका API वैश्विक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के लिए वह आधार बने जिससे वे हर देश के नियमों के अनुसार आसानी से कंप्लायंट रह सकें।
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