उनके मुताबिक ऐसी व्यवस्था से संभावित रूप से यह हो सकता है:
ब्राउन का यह भी कहना है कि दुनिया के कई बड़े खेलों—जैसे फुटबॉल—में एक ही मालिक के कई प्रतिस्पर्धी क्लब रखने पर सीमाएं होती हैं, ताकि हितों के टकराव से बचा जा सके।
वे यह भी मानते हैं कि पहले आर्थिक कारणों से ऐसी संरचनाएँ जरूरी हो सकती थीं, लेकिन आज की आर्थिक स्थिति में टीमों के जीवित रहने के लिए मल्टी‑टीम मॉडल जरूरी नहीं है।
फॉर्मूला 1 में सबसे चर्चित उदाहरण रेड बुल की संरचना है। कंपनी Red Bull GmbH दो टीमों—Red Bull Racing और Racing Bulls (पहले AlphaTauri)—की मालिक है। यह ग्रिड पर एक ही कंपनी द्वारा नियंत्रित दो टीमों का सबसे स्पष्ट उदाहरण है।
यह मॉडल कई वर्षों से मौजूद है, लेकिन ब्राउन का मानना है कि इसे भविष्य में खेल का मानक नहीं बनने देना चाहिए।
हाल की खबरों ने इस बहस को और तेज कर दिया। रिपोर्ट्स में कहा गया कि मर्सिडीज, रेनो‑मालिकाना अल्पाइन टीम में अल्पसंख्यक हिस्सेदारी लेने पर विचार कर सकती है। यदि ऐसा होता है, तो दो प्रतिस्पर्धी संगठनों के बीच नया निवेश संबंध बन सकता है।
ब्राउन ने स्पष्ट किया है कि उनकी आलोचना किसी एक टीम पर व्यक्तिगत हमला नहीं है—बल्कि वे किसी भी ऐसी व्यवस्था के खिलाफ हैं जहां एक संगठन कई प्रतिस्पर्धी टीमों को प्रभावित कर सके।
ब्राउन ने कुछ रेस स्थितियों का उदाहरण देते हुए कहा कि करीबी टीम संबंध कभी‑कभी प्रतिद्वंद्वी टीमों को प्रभावित कर सकते हैं।
रेस रणनीति से आगे बढ़कर उन्होंने तकनीकी और संचालन स्तर पर भी चिंताएँ जताई हैं, जैसे:
उनका कहना है कि ऐसे संबंधों से तकनीकी जानकारी और रणनीतिक समझ दो अलग‑अलग टीमों के बीच बह सकती है, जबकि वे आधिकारिक रूप से स्वतंत्र प्रतिस्पर्धी मानी जाती हैं।
FIA ने इस विवाद को गंभीरता से लेते हुए पुष्टि की है कि वह मल्टी‑टीम ओनरशिप की अनुमति होनी चाहिए या नहीं—इसकी समीक्षा कर रही है। यह चर्चा तब और तेज हुई जब मर्सिडीज‑अल्पाइन निवेश की संभावना सामने आई।
बेन सुलेयम ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें लगता है कि एक ही मालिक द्वारा दो टीमों का मालिक होना शायद सही रास्ता नहीं है, लेकिन यह एक जटिल मुद्दा है और FIA को नियम बदलने से पहले पूरी जांच करनी होगी।
रिपोर्टों के अनुसार FIA ने इस विषय के नैतिक और खेल संबंधी प्रभावों की जांच के लिए विशेष टीम नियुक्त की है, ताकि यह देखा जा सके कि ऐसी संरचनाएँ प्रतिस्पर्धा की निष्पक्षता को प्रभावित करती हैं या नहीं।
साथ ही उन्होंने यह संकेत भी दिया कि अल्पसंख्यक निवेश कुछ परिस्थितियों में स्वीकार्य हो सकते हैं, यानी FIA पूरी तरह प्रतिबंध लगाने और सीमित अनुमति जैसे अलग‑अलग विकल्पों पर विचार कर रही है।
कई कारण हैं जिनसे यह मुद्दा अब संभावित नियम परिवर्तन के करीब दिखाई देता है:
इन सब कारणों से अब यह चर्चा केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं रही। FIA यह तय करने पर विचार कर रही है कि भविष्य में टीमों के बीच कितना मालिकाना, निवेश या तकनीकी सहयोग स्वीकार्य होगा—और संभव है कि आने वाले समय में फॉर्मूला 1 में इसके लिए नए नियम बनें।
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