जब आप Apple Watch पहनकर सोते हैं, तो घड़ी में लगा accelerometer सेंसर कलाई की बेहद हल्की हरकतों को रिकॉर्ड करता है। ये हरकतें अक्सर सांस लेने के पैटर्न में बदलाव से जुड़ी होती हैं।
इसी डेटा से Apple एक मीट्रिक तैयार करता है जिसे “Breathing Disturbances” कहा जाता है। यह बताता है कि रात में कितनी बार सांस लेने का पैटर्न सामान्य से अलग दिखाई देता है।
सिस्टम का काम करने का तरीका कुछ इस तरह है:
क्योंकि कभी‑कभी सांस में छोटी गड़बड़ियां सामान्य भी हो सकती हैं, इसलिए Apple Watch एक रात के बजाय लंबे समय के पैटर्न को देखती है।
Apple Watch का एल्गोरिदम 30‑दिन की अवधि में जमा हुए breathing disturbance डेटा का विश्लेषण करता है।
यदि इन 30 दिनों में आवश्यक रातों के 50% से अधिक समय तक breathing disturbances “Elevated” दिखाई देते हैं, तो Apple Watch यूज़र को Sleep Apnea Notification भेजती है।
इस तरीके का उद्देश्य यह है कि सिस्टम सिर्फ कभी‑कभार की गड़बड़ी के बजाय लगातार दिखाई देने वाले पैटर्न पर ध्यान दे—जो moderate या severe sleep apnea से जुड़ा हो सकता है।
Apple के इस फीचर को 2024 में अमेरिकी Food and Drug Administration (FDA) से मंजूरी मिली थी।
FDA ने इसे एक over‑the‑counter mobile medical application के रूप में वर्गीकृत किया है। इसका उद्देश्य सांस की गड़बड़ी के ऐसे पैटर्न पहचानना है जो मध्यम से गंभीर sleep apnea का संकेत दे सकते हैं और यूज़र को इसकी सूचना देना है।
हालांकि नियामकीय अनुमति का मतलब यह नहीं है कि Apple Watch खुद बीमारी का इलाज या निदान करती है। इसे एक screening और चेतावनी देने वाले टूल के रूप में डिजाइन किया गया है।
यदि Apple Watch को लगातार ऐसा पैटर्न दिखता है जो sleep apnea का संकेत दे सकता है, तो यूज़र को नोटिफिकेशन मिलता है। इसके बाद वे Health ऐप में विस्तृत जानकारी देख सकते हैं।
वहां आम तौर पर ये चीजें उपलब्ध होती हैं:
इसका उद्देश्य यह है कि जिन लोगों को नींद के दौरान सांस की समस्या का पता नहीं चलता, वे समय रहते डॉक्टर से जांच और सलाह ले सकें।
Sleep apnea अक्सर लंबे समय तक पहचान में नहीं आता क्योंकि इसके लक्षण मुख्य रूप से सोते समय दिखाई देते हैं। Apple Watch जैसे पहनने योग्य उपकरण लगातार निगरानी करके संभावित जोखिमों का संकेत जल्दी दे सकते हैं।
भारत में Sleep Apnea Notifications के शुरू होने के साथ Apple Watch अब सिर्फ फिटनेस ट्रैकिंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह निवारक स्वास्थ्य निगरानी (preventive health monitoring) की दिशा में भी एक कदम बन रही है—जहां टेक्नोलॉजी यूज़र को समय रहते स्वास्थ्य जांच के लिए प्रेरित कर सकती है।