ब्राजील पर यह झटका किसी सामान्य तेल-आयातक अर्थव्यवस्था की तरह नहीं पड़ रहा। ICIS द्वारा उद्धृत विश्लेषकों ने तेल कीमतों की तेजी को ब्राजील के बाहरी क्षेत्र के लिए अचानक मिले लाभ की तरह बताया, जिससे देश का व्यापार अधिशेष और बढ़ सकता है; इसी समय लैटिन अमेरिका के शुद्ध तेल आयातक देशों पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है ।
लेकिन केंद्रीय बैंक के लिए कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ब्राजील के केंद्रीय बैंक ने कहा कि संघर्ष महंगाई अपेक्षाओं को बढ़ा रहा था, और नीति-निर्माताओं ने महंगाई जोखिम के संतुलन पर अपनी राय बदलने पर विचार किया, हालांकि अंत में उन्होंने आकलन को ‘लेवल’ यानी संतुलित ही रखा । यह पूरी तरह सख्त रुख नहीं है, लेकिन दर कटौती की राह को पहले से कम आरामदेह जरूर बनाता है।
चेतावनी के संकेत ताजा फैसले से पहले ही दिख रहे थे। ब्राजील के वित्त मंत्रालय ने 2026 के लिए महंगाई अनुमान 3.7% कर दिया, क्योंकि ईरान से जुड़े संघर्ष के चलते औसत तेल कीमत को पहले के अनुमान से 10.8% ज्यादा माना गया । सेरोन ने भी कहा था कि अगर संघर्ष लंबा खिंचा और तेल कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बढ़ा, तो ब्राजील का दर-कटौती चक्र अपेक्षा से छोटा हो सकता है
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सीधी बात यह है: ब्राजील के पास दरें घटाने की कुछ गुंजाइश अब भी है, लेकिन गलती की गुंजाइश कम हो गई है। महंगा तेल बाहरी खाते को सहारा दे सकता है, मगर केंद्रीय बैंक को घरेलू महंगाई अपेक्षाओं और ईंधन कीमतों के संभावित असर को भी संभालना होगा ।
दक्षिण कोरिया के लिए तेल झटका ज्यादा सीधे तौर पर नकारात्मक है। बैंक ऑफ कोरिया के गवर्नर ने कहा कि मध्य पूर्व से जुड़े तेल झटके महंगाई बढ़ाते हैं, वृद्धि को कमजोर कर सकते हैं और वित्तीय स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बढ़ाते हैं; इसलिए नीति को सावधान और लचीला रहना होगा । इसी टिप्पणी में दक्षिण कोरिया की ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भरता को भी अहम जोखिम बताया गया
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निकट अवधि में महंगाई का रास्ता पहले ही दिख रहा है। बैंक ऑफ कोरिया ने कहा कि वैश्विक तेल कीमतों में तेजी मई में उपभोक्ता कीमतों को और ऊपर ले जा सकती है, क्योंकि पेट्रोलियम उत्पाद महंगे बने हुए हैं और कृषि, पशुधन तथा मत्स्य उत्पादों के आधार प्रभाव से भी दबाव जुड़ रहा है । BOK के डिप्टी गवर्नर यू सांग-डे ने यह भी कहा कि पेट्रोलियम कीमत सीमा प्रणाली और ईंधन कर कटौती ने दबाव का बड़ा हिस्सा कम किया है, लेकिन ऐसी राहत झटके को धीमा करती है, पूरी तरह खत्म नहीं करती
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यहीं BOK की दुविधा है। दरें घटाने से मांग को सहारा मिल सकता है, लेकिन जब तेल महंगाई को ऊपर धकेल रहा हो, तब कटौती को सही ठहराना मुश्किल हो जाता है। नीति को स्थिर रखना विकास की समस्या का सीधा समाधान नहीं है, लेकिन इससे अधिकारियों को यह देखने का समय मिलता है कि तेल कीमतों का दबाव अस्थायी है या व्यापक कीमतों में जमने लगा है ।
मुख्य फर्क ‘टर्म्स ऑफ ट्रेड’ में है — यानी कोई देश जो बेचता और खरीदता है, उनकी कीमतों का संतुलन। ब्राजील के लिए महंगा तेल दो विपरीत असर पैदा करता है: बाहरी क्षेत्र को फायदा हो सकता है, लेकिन महंगाई अपेक्षाओं पर दबाव भी बढ़ता है ।
दक्षिण कोरिया में प्रमुख रास्ते ज्यादा प्रतिकूल दिशा में जाते हैं। आयातित ऊर्जा लागत बढ़ाती है, महंगाई जोखिम को ऊपर ले जाती है और वृद्धि पर भी दबाव डाल सकती है । इसलिए दोनों केंद्रीय बैंक अधिक सतर्क दिख रहे हैं, लेकिन वजह और तीव्रता अलग है। ब्राजील में दर कटौती की राह सीमित और संभावित रूप से छोटी हो सकती है
। दक्षिण कोरिया में सावधानी का झुकाव और साफ है, क्योंकि तेल झटका एक साथ महंगाई और वृद्धि के बीच संतुलन को बिगाड़ता है
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ब्राजील में अहम संकेत यह होगा कि केंद्रीय बैंक महंगाई जोखिमों को संतुलित बताता रहता है या साफ तौर पर ऊपर के जोखिम की ओर झुकता है, क्योंकि वह पहले ही इस बदलाव पर विचार कर चुका है । बाजार और नीति-निर्माता महंगाई अपेक्षाओं तथा सरकार की तेल कीमतों संबंधी धारणाओं पर भी नजर रखेंगे, खासकर वित्त मंत्रालय द्वारा 2026 के लिए महंगाई अनुमान 3.7% करने के बाद
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दक्षिण कोरिया में परीक्षा यह होगी कि मई में अनुमानित महंगाई उछाल अस्थायी साबित होता है या नहीं। ईंधन कर कटौती और पेट्रोलियम कीमत सीमा प्रणाली वैश्विक तेल कीमतों का कितना असर रोक पाती हैं, यह भी महत्वपूर्ण रहेगा । साथ ही, बैंक ऑफ कोरिया की भाषा पर ध्यान रहेगा, क्योंकि नीति-निर्माता तेल झटके को पहले ही वृद्धि और वित्तीय स्थिरता दोनों जोखिमों से जोड़ चुके हैं
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ईरान से जुड़े तेल झटके ने ब्राजील और दक्षिण कोरिया दोनों में दर कटौती की जगह घटा दी है। ब्राजील के पास बाहरी खाते का तेल-सहारा है, लेकिन महंगाई अपेक्षाएं बढ़ीं तो ढील का चक्र छोटा पड़ सकता है । दक्षिण कोरिया की चुनौती ज्यादा कठिन है: आयातित ऊर्जा महंगाई का दबाव बढ़ा रही है और साथ ही वृद्धि पर भी जोखिम डाल रही है
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