अलग अनुमान बताते हैं कि 2026 की शुरुआत में हुए हमलों से रूस की लगभग 700,000 बैरल प्रतिदिन रिफाइनिंग क्षमता अस्थायी रूप से ऑफलाइन हो गई थी।
कई बड़ी रिफाइनरियों को हमलों के बाद संचालन रोकना पड़ा या उत्पादन कम करना पड़ा।
मॉस्को रिफाइनरी (Gazprom Neft)
मॉस्को के दक्षिण‑पूर्व में स्थित यह संयंत्र राजधानी और आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण ईंधन आपूर्तिकर्ता है। मई 2026 में ड्रोन हमलों के बाद यहां संचालन निलंबित किए जाने की खबरें आईं।
रियाज़ान रिफाइनरी (Rosneft)
मॉस्को के दक्षिण‑पूर्व में स्थित रूस की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक। ड्रोन हमलों से आग लगने के बाद कच्चे तेल की प्रोसेसिंग रोकनी पड़ी, जिससे मॉस्को क्षेत्र की ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई।
निज़नी नोवगोरोद — लुकोइल NORSI रिफाइनरी
मध्य रूस की प्रमुख रिफाइनरियों में शामिल यह संयंत्र भी व्यापक हमलों की इस श्रृंखला में निशाना बना।
यारोस्लाव्ल — Slavneft‑YANOS रिफाइनरी
औद्योगिक बेल्ट में स्थित यह बड़ा संयंत्र भी उन रिफाइनरियों में शामिल है जिन्हें हमलों के बाद उत्पादन घटाना या रोकना पड़ा।
किरिशी — Kinef रिफाइनरी
सेंट पीटर्सबर्ग के पास स्थित रूस की सबसे बड़ी रिफाइनिंग परिसरों में से एक। यह उत्तर‑पश्चिम क्षेत्र को ईंधन सप्लाई करने और बाल्टिक बंदरगाहों के माध्यम से निर्यात में अहम भूमिका निभाती है। इस पर भी हमलों का असर बताया गया है।
मध्य रूस के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी कुछ रिफाइनरियां प्रभावित हुईं। उदाहरण के लिए पर्मनेफ्तेऑर्गसिंटेज़ (Perm)—जो रूस की सातवीं सबसे बड़ी रिफाइनरी है—ड्रोन हमले के बाद महत्वपूर्ण डिस्टिलेशन यूनिट क्षतिग्रस्त होने से कच्चे तेल की प्रोसेसिंग रोकनी पड़ी।
रिफाइनरियां कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल और अन्य उत्पादों में बदलती हैं। इसलिए यदि रिफाइनिंग प्रक्रिया बाधित होती है तो इसका असर केवल तेल उत्पादन पर नहीं बल्कि ईंधन उपलब्धता और निर्यात आय पर भी पड़ता है।
विश्लेषकों के अनुसार इसके कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं:
मध्य रूस का क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां की रिफाइनरियां बड़े शहरों, परिवहन नेटवर्क और निर्यात मार्गों को ईंधन उपलब्ध कराती हैं।
यूक्रेन की ड्रोन रणनीति अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रही है। हाल के महीनों में ध्यान खास तौर पर ऊर्जा अवसंरचना पर दिया गया है, जो रूस की अर्थव्यवस्था और सैन्य आपूर्ति दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
रिपोर्टों के अनुसार जनवरी से मई 2026 के बीच यूक्रेनी ड्रोन कम से कम 16 रूसी रिफाइनरियों को निशाना बना चुके हैं—जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग दोगुना है।
इस अभियान के पीछे कुछ प्रमुख उद्देश्य बताए जाते हैं:
हालांकि इन हमलों से कई संयंत्र बंद हुए हैं, लेकिन प्रभावित क्षमता का मतलब स्थायी रूप से नष्ट हुई क्षमता नहीं होता। रिफाइनरियां अक्सर मरम्मत के बाद आंशिक रूप से फिर शुरू हो सकती हैं। इसलिए 83 मिलियन टन का आंकड़ा मुख्य रूप से अस्थायी रूप से प्रभावित क्षमता को दर्शाता है, न कि स्थायी नुकसान को।
फिर भी लगातार हो रहे हमले यह दिखाते हैं कि लंबी दूरी के ड्रोन रूस के औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच सकते हैं और उसके ईंधन‑प्रसंस्करण नेटवर्क के बड़े हिस्से को अस्थायी रूप से बाधित करने में सक्षम हैं।
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