2026 में WHO ने उत्तरी ग़ज़ा के इंडोनेशियन अस्पताल पर हुए हमले की भी निंदा की। संगठन ने कहा कि पिछले हफ्तों में कई स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले हुए, जिनसे मरीजों और स्टाफ की मौतें हुईं और कई अस्पतालों से लोगों को जबरन निकाला गया।
युद्धविराम के बावजूद ग़ज़ा की स्वास्थ्य संरचना को भारी नुकसान पहुँचा हुआ है।
WHO अधिकारियों के अनुसार:
अस्पतालों को ईंधन, बिजली, पानी और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की लगातार कमी का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं के कारण सर्जरी, आईसीयू सेवाएँ और प्रसूति या पुरानी बीमारियों का इलाज प्रभावित हो रहा है।
WHO की रिपोर्टों में बताया गया है कि ग़ज़ा में आवश्यक चिकित्सा सामग्री की कमी बेहद गंभीर है।
स्वास्थ्य संस्थानों ने रिपोर्ट किया कि:
स्थिति को संभालने के लिए WHO ने 2025 के दौरान अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में लगभग 60 मिलियन डॉलर मूल्य की आवश्यक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराई, लेकिन संगठन के अनुसार ज़रूरतें अभी भी उपलब्ध संसाधनों से कहीं अधिक हैं।
संयुक्त राष्ट्र की मानवीय रिपोर्टों के अनुसार युद्धविराम के बाद भी ग़ज़ा में सहायता पहुँचाने की प्रक्रिया जटिल बनी रही।
इन प्रतिबंधों से केवल निर्माण सामग्री ही नहीं बल्कि अस्पतालों और पानी‑स्वच्छता प्रणालियों को बहाल करने के लिए ज़रूरी उपकरण भी प्रभावित हुए।
कई अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने कहा कि इन प्रतिबंधों के कारण उनका काम सीमित हो गया है।
इन बाधाओं ने अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के प्रयासों को धीमा कर दिया।
ग़ज़ा युद्धविराम के कार्यान्वयन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है।
सुरक्षा परिषद में चर्चा मुख्य रूप से दो मुद्दों पर केंद्रित रही—युद्धविराम को टिकाऊ बनाना और ग़ज़ा में मानवीय सहायता की पहुँच को बड़े पैमाने पर बढ़ाना।
WHO का निष्कर्ष यह है कि युद्धविराम ने संघर्ष की तीव्रता को कम किया, लेकिन ग़ज़ा के स्वास्थ्य संकट को समाप्त नहीं किया। संगठन के अनुसार संकट को बनाए रखने वाले प्रमुख कारण हैं:
मानवीय एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब भी यही है—बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं को फिर से खड़ा करना और यह सुनिश्चित करना कि चिकित्सा सुविधाओं व कर्मियों की सुरक्षा बनी रहे और सहायता बिना रुकावट ग़ज़ा तक पहुँच सके।
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