अगर कोई नया समझौता घोषित नहीं होता, तो युद्धविराम बस समाप्त हो जाता है। यानी निकट भविष्य में लड़ाई जारी रहने, हमलों और हताहतों की नई रिपोर्टें आने, दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप बढ़ने और कूटनीतिक दबाव तेज होने की संभावना बनी रहती है। युद्धविराम के 72 घंटे के दौरान ही जारी लड़ाई और उल्लंघन के दावों की खबरें आती रहीं ।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर मोर्चे पर स्थिति एक जैसी थी। कुछ रिपोर्टों में बड़े पैमाने के हमलों में कमी या बड़े हमलों के न होने की बात भी कही गई, जबकि दोनों पक्ष उल्लंघन का आरोप लगाते रहे । इसलिए सबसे सटीक निष्कर्ष यह है कि यह विराम कभी भी पूरी तरह स्थिर और दोनों पक्षों द्वारा स्वीकार किया गया युद्धविराम नहीं बन पाया।
यूक्रेन ने कहा कि सोमवार को रूसी ड्रोन, बम और तोपखाने की गोलाबारी ने खारकीव और खेरसॉन क्षेत्रों के नागरिक इलाकों को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हुई और सात घायल हुए । यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी कहा कि रूस युद्धविराम का पालन नहीं कर रहा था और ऐसा करने की गंभीर कोशिश भी नहीं कर रहा था ।
रूस ने इसके उलट कीव को जिम्मेदार ठहराया। रूसी सरकारी मीडिया के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, रूस के रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन पर 1,000 से अधिक युद्धविराम उल्लंघनों का आरोप लगाया । दूसरी रिपोर्टों में कहा गया कि अमेरिका की मध्यस्थता वाला यह विराम दूसरे ही दिन गंभीर दबाव में दिखने लगा था, क्योंकि दोनों पक्ष सप्ताहांत के हमलों के लिए एक-दूसरे को दोष दे रहे थे ।
उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग न तो उल्लंघनों की किसी साझा रूप से स्वीकार की गई संख्या तय करती है, न यह साबित करती है कि पहले किसने युद्धविराम तोड़ा। लेकिन यह साफ करती है कि समयसीमा खत्म होने से पहले ही दोनों सरकारें इस विराम को विवादित मान रही थीं ।
72 घंटे का युद्धविराम खत्म होने के बाद, उपलब्ध रिपोर्टिंग का संकेत यही है कि नया समझौता न हुआ तो लड़ाई और आरोप-प्रत्यारोप जारी रहेंगे। अलग नतीजे के लिए ठोस कूटनीतिक कदम जरूरी होगा—जैसे औपचारिक विस्तार, नया युद्धविराम, घोषित बातचीत या 1,000-के-बदले-1,000 कैदियों की अदला-बदली में दिखाई देने वाली प्रगति ।