दूसरे शब्दों में, कंपनी अब अपना खुद का L2 चलाने के बजाय कई ब्लॉकचेन नेटवर्क तक आसान एक्सेस देने वाले टूल्स बनाने पर ध्यान देना चाहती है।
Zero Network को 2026 की शुरुआत में एक बड़ा ऑपरेशनल झटका भी लगा था।
मॉनिटरिंग डेटा में यह भी दिखा कि उस अवधि में नेटवर्क पर लंबे समय तक स्टेट अपडेट और प्रूफ सबमिशन नहीं हुए, जिससे आउटेज की गंभीरता स्पष्ट हुई।
हालांकि समस्या की पूरी तकनीकी वजह सार्वजनिक रूप से विस्तार से नहीं बताई गई, लेकिन इस घटना ने यह दिखाया कि रोलअप‑आधारित ब्लॉकचेन चलाना कितना जटिल हो सकता है।
Zero Network अब आधिकारिक तौर पर वाइंड‑डाउन चरण में है।
यदि आपके ETH, टोकन या NFTs इस नेटवर्क पर हैं, तो आपको उन्हें 31 जुलाई 2026 से पहले निकालना होगा। इसके बाद नेटवर्क ब्लॉक बनाना बंद कर देगा।
शटडाउन प्रक्रिया के हिस्से के रूप में Zero Network में नए क्रॉस‑चेन डिपॉज़िट पहले ही बंद कर दिए गए हैं। फिलहाल केवल एसेट्स निकालने की सुविधा उपलब्ध है।
यूज़र्स Zerion के वॉलेट में मौजूद ब्रिज टूल या नेटवर्क के आधिकारिक ब्रिज का उपयोग करके एसेट्स बाहर ट्रांसफर कर सकते हैं।
Zero Network का बंद होना सिर्फ एक प्रोजेक्ट की कहानी नहीं है — यह पूरे Ethereum Layer‑2 सेक्टर में चल रहे कंसोलिडेशन को भी दिखाता है।
पिछले दो वर्षों में डेवलपर्स और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए दर्जनों L2 नेटवर्क लॉन्च हुए। लेकिन वास्तविक गतिविधि कुछ ही बड़े नेटवर्क में केंद्रित होती गई।
अनुमानों के अनुसार Base, Arbitrum और Optimism जैसे नेटवर्क लगभग 90% Layer‑2 ट्रांजैक्शन्स प्रोसेस करते हैं।
इसके अलावा Ethereum के Dencun अपग्रेड और EIP‑4844 (proto‑danksharding) ने रोलअप्स के लिए डेटा लागत को काफी कम कर दिया, जिससे फीस प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई और छोटे नेटवर्क के लिए टिके रहना मुश्किल हो गया।
इस माहौल में छोटे या कम उपयोग वाले Layer‑2 प्रोजेक्ट्स के लिए पर्याप्त यूज़र और रेवेन्यू बनाए रखना कठिन हो गया है।
यदि आपके पास Zero Network पर कोई भी एसेट है, तो सबसे जरूरी कदम है:
31 जुलाई 2026 से पहले अपने फंड किसी अन्य नेटवर्क पर ट्रांसफर कर दें।
उस तारीख के बाद जब नेटवर्क ब्लॉक बनाना बंद कर देगा, तब उससे इंटरैक्ट करना कठिन या लगभग असंभव हो सकता है।
क्रिप्टो इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रयोग और बदलाव तेज़ी से होते हैं — और Zero Network का बंद होना यह दिखाता है कि Ethereum के Layer‑2 इकोसिस्टम में प्रतिस्पर्धा अब पहले से कहीं ज्यादा कठोर हो चुकी है।
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