इस तकनीक से कंपनी को कई संभावित फायदे मिलने की उम्मीद थी:
NomadGo का सॉफ्टवेयर मोबाइल डिवाइस पर ही इमेज प्रोसेस करता था और ऑगमेंटेड रियलिटी ओवरले के माध्यम से कर्मचारियों को तुरंत दिखाता था कि कौन‑सा उत्पाद पहचाना गया है और कितनी मात्रा दर्ज हुई है।
जब सिस्टम को हजारों स्टोर्स में बड़े पैमाने पर लागू किया गया, तब इसकी सटीकता (accuracy) सबसे बड़ी समस्या बन गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह टूल अक्सर आइटम गलत गिनता था, उत्पादों को गलत लेबल कर देता था या कुछ इन्वेंटरी को पहचान ही नहीं पाता था।
एक आम समस्या थी एक जैसे दिखने वाले उत्पादों में अंतर करना। उदाहरण के लिए अलग‑अलग प्रकार के दूध—जैसे डेयरी मिल्क, ओट मिल्क या अन्य विकल्प—को सिस्टम कई बार गड़बड़ा देता था।
Starbucks के लिए यह खास तौर पर बड़ी समस्या थी, क्योंकि दूध जैसे आइटम सीधे तय करते हैं कि कौन‑सी कॉफी या ड्रिंक तैयार की जा सकती है।
नतीजा यह हुआ कि कर्मचारियों को AI के आंकड़ों पर भरोसा करने के बजाय फिर से मैनुअल तरीके से दोबारा गिनती करनी पड़ती थी। इससे समय बचने के बजाय काम बढ़ गया।
गलत इन्वेंटरी डेटा से आगे और भी समस्याएँ पैदा हो सकती थीं:
मई 2026 में Starbucks ने स्टोर्स को बताया कि Automated Counting कार्यक्रम बंद किया जा रहा है और दूध तथा पेय सामग्री को फिर उसी तरह मैनुअल तरीके से गिना जाएगा जैसे अन्य इन्वेंटरी श्रेणियों को गिना जाता है।
यह फैसला कंपनी की व्यापक परिचालन रणनीति से भी जुड़ा था।
CEO Brian Niccol के नेतृत्व में Starbucks ने एक रणनीति शुरू की जिसे कंपनी के अंदर अक्सर “Back to Starbucks” कहा जाता है। इसका उद्देश्य था स्टोर्स में बार‑बार होने वाली उत्पाद कमी की समस्या को ठीक करना और संचालन को अधिक स्थिर बनाना।
इस रणनीति के तहत कंपनी ने जोर दिया:
कंपनी के लिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण चीज़ थी कि स्टोर्स में आवश्यक सामग्री उपलब्ध रहे ताकि ग्राहक जिन ड्रिंक्स का ऑर्डर करें वे वास्तव में बन सकें। इसलिए मैनुअल काउंटिंग को अधिक भरोसेमंद विकल्प माना गया।
Starbucks का यह अनुभव एक व्यापक समस्या को भी दिखाता है: जो AI तकनीक डेमो या नियंत्रित वातावरण में अच्छी लगती है, वह वास्तविक दुनिया के जटिल माहौल में अक्सर संघर्ष करती है।
रिटेल स्टोर्स में कंप्यूटर विज़न सिस्टम के लिए कई चुनौतियाँ होती हैं:
जब ऐसी छोटी‑छोटी गलतियाँ हजारों स्टोर्स में एक साथ होती हैं, तो वे संचालन के लिए बड़ी समस्या बन सकती हैं।
आखिरकार Starbucks ने निष्कर्ष निकाला कि इस AI सिस्टम की सटीकता उससे मिलने वाले लाभ से कम है—और इसलिए कंपनी ने पूरे सिस्टम को सिर्फ नौ महीनों में ही बंद कर दिया।
फिर भी यह प्रयोग दिखाता है कि बड़े रिटेल ब्रांड भौतिक स्टोर संचालन में AI को कितनी तेजी से आजमा रहे हैं—और यह भी कि अगर तकनीक रोजमर्रा के काम की वास्तविक परिस्थितियों में भरोसेमंद साबित न हो, तो ऐसे प्रयोग उतनी ही जल्दी वापस भी लिए जा सकते हैं।
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