एक उदाहरण खास तौर पर वायरल हुआ—सैंडविच की फोटो—जिसमें AI वाला वर्ज़न प्राकृतिक रोशनी और टेक्सचर खोता हुआ दिखा, जबकि मूल फोटो ज्यादा वास्तविक लग रहा था।
यह चर्चा जल्दी ही टेक कम्युनिटी में फैल गई। Nothing कंपनी के CEO Carl Pei ने भी Sony की पोस्ट का मजाक उड़ाते हुए इसे “engagement farming” जैसा बताया।
आलोचना बढ़ने के बाद Sony ने स्पष्ट किया कि लोगों ने फीचर को गलत समझ लिया है।
कंपनी के अनुसार, AI Camera Assistant फोटो खींचने के बाद उसे एडिट नहीं करता। इसके बजाय यह फोटो लेने से पहले दृश्य का विश्लेषण करके कई संभावित कैमरा सेटिंग्स सुझाता है।
Sony के मुताबिक, यह फीचर आम तौर पर चार अलग‑अलग क्रिएटिव विकल्प देता है—जैसे अलग एक्सपोज़र, रंग टोन या बोकै प्रभाव। उपयोगकर्ता इनमें से कोई भी विकल्प चुन सकता है या अपनी पसंद की मैनुअल सेटिंग इस्तेमाल कर सकता है।
इसका मतलब यह है कि विवादित तुलना तस्वीरें वास्तव में “AI एडिट” और “नॉन‑AI एडिट” की तुलना नहीं थीं, बल्कि अलग‑अलग शूटिंग सेटिंग्स के सुझाव दिखा रही थीं।
Sony इस फीचर को अपने “Xperia Intelligence” सिस्टम का हिस्सा बताता है। इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को जल्दी से सही कैमरा सेटिंग चुनने में मदद करना है।
जब आप कैमरा किसी विषय की ओर करते हैं, तो AI दृश्य का विश्लेषण करके सुझाव दे सकता है जैसे:
व्यवहार में यह फीचर AI फोटो एडिटर से ज्यादा एक स्मार्ट शूटिंग असिस्टेंट जैसा है—जो फोटो लेने से पहले मार्गदर्शन देता है।
हाँ। Sony के अनुसार, उपयोगकर्ता चाहे तो AI द्वारा सुझाए गए विकल्प चुन सकता है या उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करके खुद की कैमरा सेटिंग्स इस्तेमाल कर सकता है।
यह दृष्टिकोण Xperia फोन की उस परंपरा से मेल खाता है जिसमें फोटोग्राफी के शौकीनों को मैनुअल कंट्रोल दिए जाते हैं, ठीक Sony की Alpha कैमरा श्रृंखला की तरह।
यह विवाद सिर्फ एक मार्केटिंग पोस्ट का मामला नहीं था। इसने स्मार्टफोन फोटोग्राफी में चल रही एक बड़ी बहस को फिर सामने ला दिया।
आजकल अधिकांश स्मार्टफोन computational photography का उपयोग करते हैं—जिसमें सॉफ्टवेयर कई एक्सपोज़र जोड़ता है, रंगों को बढ़ाता है, शैडो को उजला करता है और टेक्सचर को स्मूद बनाता है। इससे फोटो अक्सर ज्यादा चमकदार दिखती है, लेकिन कभी‑कभी कृत्रिम भी लग सकती है।
Sony लंबे समय से अपने Xperia फोन को ज्यादा प्राकृतिक दिखने वाली तस्वीरों और गहरे मैनुअल कंट्रोल के लिए पेश करता रहा है। इसलिए जब AI उदाहरणों में तस्वीरें ज्यादा चमकीली या फ्लैट दिखीं, तो कई फोटोग्राफी उत्साही लोगों को लगा कि यह कंपनी की उसी पहचान के विपरीत है।
अंततः यह विवाद स्मार्टफोन कैमरों के दो अलग दृष्टिकोणों को सामने लाता है:
Sony का AI Camera Assistant मूल रूप से उपयोगकर्ता को रचनात्मक विकल्प देने के लिए बनाया गया था। लेकिन जिस तरह से इसे प्रस्तुत किया गया, उसने ऐसा आभास दिया मानो AI फोटो को बदलकर खराब कर रहा हो—और यही गलतफहमी इस पूरे ऑनलाइन विवाद की वजह बनी।
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