फीफा ने तेजी से कार्रवाई करते हुए अगले ही दिन अपनी स्वतंत्र अनुशासन समिति से जांच शुरू कर दी। यह जांच इस बात पर केंद्रित थी कि क्या यह इशारा फीफा के अनुशासन संहिता का उल्लंघन था।
15 जून, 2026 को फीफा ने अपने निष्कर्ष जारी किए। समिति ने पाया कि इस बात का "कोई सबूत नहीं" है कि इवांस ने जानबूझकर कोई नस्लवादी इशारा किया था या किसी आचार संहिता का उल्लंघन किया था । फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार कर लिया कि यह कार्रवाई कोई सोची-समझी साज़िश नहीं थी।
फीफा द्वारा इवांस की ओर से जारी एक बयान में, उन्होंने इस इशारे को "एक अनैच्छिक, अवचेतन मांसपेशी लहर" बताया, जिसके बारे में उन्हें पूरी तरह से अनजान थे कि वह ऐसा कर भी रहे हैं । फीफा के लिए यह सफाई काफी थी, और संस्था ने औपचारिक रूप से उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया तथा पुष्टि की कि वह टूर्नामेंट में अपनी ऑफिशियटिंग की भूमिका जारी रखेंगे
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यह मैच, जिसमें जर्मनी ने कुराकाओ को 7-1 से हराया, इस विवाद की वजह से अगले 24 घंटों तक खेलों की सुर्खियों से पूरी तरह ओझल हो गया । आखिरकार मामला बिना किसी सजा के बंद कर दिया गया, और इवांस दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन के पर्दे के पीछे अपना काम जारी रख पाए।
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