उसी दिन एक और टैंकर के जलडमरूमध्य में प्रवेश करने की खबर भी सामने आई, जिससे संकेत मिला कि सीमित रूप से यातायात फिर चलना शुरू हो सकता है।
रिपोर्टों और शिपिंग डेटा से कुछ जहाज़ों की पहचान हुई:
तीसरे जहाज़ का ऑपरेटर या राष्ट्रीयता उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं बताई गई।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है और इतना गहरा व चौड़ा है कि सबसे बड़े तेल टैंकर भी इससे गुजर सकते हैं।
सामान्य परिस्थितियों में लगभग 2 करोड़ बैरल तेल प्रतिदिन—यानी दुनिया की कुल पेट्रोलियम खपत का करीब पाँचवां हिस्सा—इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ा जोखिम बन जाती है।
2026 की शुरुआत में अमेरिका और इज़राइल के साथ सैन्य टकराव बढ़ने के बाद फरवरी के अंत से इस जलमार्ग में शिपिंग लगभग ठप हो गई थी।
इस दौरान ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जहाज़ों को चेतावनी दी, कुछ जहाज़ों को रोका या चढ़ाई की, और समुद्री खतरों के कारण व्यापारिक शिपिंग में भारी गिरावट आ गई।
बाद में ईरान ने बताया कि उसने कुछ जहाज़ों को नियंत्रित तरीके से गुजरने की अनुमति दी, जिससे संकेत मिला कि ये पारगमन पूरी तरह मार्ग खुलने के बजाय अनुमति‑आधारित सीमित आवाजाही का हिस्सा थे।
उपलब्ध स्रोतों में इस घटना के दौरान किसी औपचारिक टोल, शुल्क या किसी नई “Persian Gulf Strait Authority” के संचालन का प्रमाण नहीं मिलता।
तीनों सुपरटैंकर का बाहर निकलना विश्लेषकों के अनुसार तनाव में संभावित नरमी का शुरुआती संकेत माना गया।
ईरान ने उसी दिन 26 जहाज़ों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने की बात कही, जो संकट के शुरुआती महीनों की तुलना में स्पष्ट वृद्धि थी।
फिर भी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि इसका मतलब यह नहीं है कि सब कुछ सामान्य हो गया है—उस समय भी फारस की खाड़ी से बाहर निकलने वाले टैंकरों की संख्या बहुत कम थी।
लेकिन 2026 के संकट के दौरान:
संघर्ष के शुरुआती दिनों में तेल बाज़ार में तेज़ उथल‑पुथल देखी गई। व्यापारियों को डर था कि अगर होर्मुज़ बंद हो गया तो दुनिया की बड़ी तेल आपूर्ति अचानक प्रभावित हो सकती है। इसी कारण तेल कीमतों में तेज़ उछाल आया।
हालांकि कुछ टैंकरों का सफल पारगमन तत्काल सप्लाई को लेकर चिंताओं को थोड़ा कम कर सकता है, लेकिन सीमित मात्रा और जारी भू‑राजनीतिक जोखिम के कारण बाज़ार में अस्थिरता की आशंका बनी रही।
तीन सुपरटैंकरों का यह पारगमन होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने का संकेत नहीं था। लेकिन यह एक अहम संकेत जरूर था कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक में धीरे‑धीरे और नियंत्रित तरीके से शिपिंग वापस लौट सकती है।
जब तक क्षेत्र में राजनीतिक और सैन्य तनाव बना रहेगा, तब तक होर्मुज़ से गुजरने वाला तेल—और उससे जुड़ा वैश्विक ऊर्जा बाज़ार—बेहद संवेदनशील बना रहेगा।
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