MOL Slovenia ने निजी ग्राहकों के लिए प्रति यात्रा 30 लीटर की सीमा लगाई थी। व्यावसायिक वाहनों और कारोबारियों को अधिक मात्रा खरीदने की अनुमति थी। Shell ने भी बिक्री पर पाबंदियां लागू कीं। कंपनियों ने कहा कि इसका उद्देश्य उपलब्ध ईंधन को ग्राहकों के बीच अधिक समान रूप से बांटना और किसी एक स्टेशन पर स्थानीय कमी रोकना था।
MOL का नियम बाद में लागू सरकारी नियम से एक मामले में अधिक सख्त था: कंपनी की सीमा प्रति यात्रा थी, जबकि सरकारी सीमा प्रतिदिन की थी। इसलिए इन कदमों को आपातकालीन मांग-प्रबंधन के उपाय के रूप में समझना चाहिए। वे अपने-आप में यह साबित नहीं करते कि स्लोवेनिया का कुल ईंधन भंडार समाप्त हो गया था।
स्लोवेनिया के पेट्रोल पंपों पर दिखा दबाव उस व्यापक ऊर्जा संकट का हिस्सा था जिसे उपलब्ध रिपोर्टिंग में अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़े संघर्ष से जोड़ा गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास व्यवधान ने कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही को प्रभावित किया। युद्ध से पहले इस मार्ग से प्रतिदिन औसतन करीब 1.8 करोड़ बैरल तेल और उत्पाद गुजरते थे। Reuters द्वारा उद्धृत आंकड़ों के अनुसार यह प्रवाह जुलाई में घटकर 48 लाख बैरल प्रतिदिन और अगस्त की शुरुआत में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया।
रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचने और कुछ संयंत्रों के बंद रहने से समस्या और गहरी हुई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुमान के अनुसार दूसरी तिमाही में मध्य-पूर्व की रिफाइनिंग क्षमता युद्ध-पूर्व स्तर से 29 लाख बैरल प्रतिदिन कम रही, जबकि तीसरी तिमाही में भी 22 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी रहने का अनुमान था। यूक्रेनी हमलों ने रूस की रिफाइनिंग क्षमता को लगभग दो दशक के निचले स्तर के करीब पहुंचा दिया। चीन में कम रिफाइनिंग और घटते ईंधन निर्यात ने भी वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया।
यह अंतर महत्वपूर्ण है: पेट्रोल और डीजल सीधे कच्चे तेल से नहीं, बल्कि रिफाइनरियों में तैयार होते हैं। इसलिए दुनिया के किसी दूसरे हिस्से में कच्चा तेल उपलब्ध होने के बावजूद डीजल महंगा या दुर्लभ हो सकता है, यदि रिफाइनरियां क्षतिग्रस्त हों या उन्हें कच्चा तेल पहुंचाना मुश्किल हो। युद्ध शुरू होने के बाद यूरोपीय डीजल की कीमतें 70% से अधिक बढ़ीं और Brent कच्चे तेल की तुलना में यूरोपीय गैसऑयल का प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
कच्चे तेल और खुदरा ईंधन की कीमतें हमेशा एक साथ नहीं चलतीं। रिफाइनरी बंद होने, जहाजों की आवाजाही में बाधा, कम भंडार और बढ़े हुए रिफाइनिंग मार्जिन के कारण Brent सस्ता होने पर भी डीजल महंगा रह सकता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) ने Brent की औसत कीमत दूसरी तिमाही में 103 डॉलर प्रति बैरल रहने और चौथी तिमाही में घटकर 70 डॉलर प्रति बैरल होने का अनुमान लगाया था। यह बाजार की अस्थिरता दिखाता है, न कि करीब 90 डॉलर पर स्थिर कीमत।
रिफाइनिंग मार्जिन में यह दबाव सबसे स्पष्ट दिखा। Reuters के अनुसार जुलाई में यूरोपीय लो-सल्फर गैसऑयल का Brent पर प्रीमियम 74.66 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह बताता है कि कच्चे तेल की तुलना में डीजल कितना महंगा हो गया था। Goldman Sachs का अनुमान था कि 2026 के बाकी हिस्से में रिफाइंड ईंधन के मार्जिन ऊंचे बने रहेंगे, क्योंकि तैयार उत्पादों का बाजार कच्चे तेल के बाजार से कहीं अधिक तंग था।
क्षेत्र की सरकारों ने कीमतों पर सीमा, करों में बदलाव और आपातकालीन आपूर्ति उपायों का मिश्रण अपनाया। यूरोपीय संघ की परिषद के एक दस्तावेज के अनुसार 30 मार्च को क्रोएशिया में डीजल की कीमत 1.88 यूरो प्रति लीटर दर्ज की गई। अगस्त के बाद के बाजार आंकड़ों में वहां औसत डीजल कीमत करीब 1.835 यूरो प्रति लीटर रही।
मोल्दोवा में भी लॉजिस्टिक्स और कीमतों का अलग, लेकिन संबंधित दबाव देखने को मिला। जुलाई के अंत में वहां नियंत्रित डीजल कीमत बढ़कर करीब 1.62 यूरो प्रति लीटर हो गई। डीजल की आपूर्ति में गंभीर अड़चनों के बाद सरकार ने ऊर्जा और जल-प्रबंधन क्षेत्रों में 30 दिन की सतर्कता स्थिति घोषित की; रिपोर्टों के अनुसार दर्जनों स्टेशन डीजल से पूरी तरह खाली हो गए थे।
इन आंकड़ों को पूरे यूरोप के लिए एक समान कीमत या हर देश में एक जैसी कमी का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। वे यह दिखाते हैं कि रिफाइनरी व्यवधान, परिवहन बाधाओं और अलग-अलग राष्ट्रीय मूल्य नीतियों ने हर बाजार में अलग असर डाला।
उपलब्ध स्रोत 22 मार्च को 50 और 200 लीटर की सीमाएं लागू होने तथा उससे पहले वितरकों द्वारा बिक्री सीमित किए जाने की पुष्टि करते हैं। लेकिन मई के अंत में स्लोवेनिया द्वारा औपचारिक रूप से यह व्यवस्था हटाए जाने की मजबूत पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए उस तारीख को तयशुदा घटनाक्रम की तरह पेश करना उचित नहीं होगा।
स्लोवेनिया का अनुभव दिखाता है कि ईंधन संकट हमेशा राष्ट्रीय गोदामों के खाली होने से शुरू नहीं होता। कई बार इसकी पहली निशानी लंबी कतारों, खाली पंपों और खरीद सीमा के रूप में सामने आती है। स्लोवेनिया का कदम असाधारण खुदरा मांग को धीमा करने और वितरण नेटवर्क के संभलने तक अधिक स्टेशनों पर ईंधन उपलब्ध रखने के लिए था।