इज़राइली सेना ने इसे एक ब्रिगेड-स्तरीय अभियान का हिस्सा बताया, जिसमें सुरक्षा बलों ने उन लोगों से पूछताछ की जिन्हें सेना ने ‘संदिग्ध’ कहा। IDF के अनुसार, पूछताछ की प्रक्रिया के दौरान कुछ लोगों को नंबरों से चिह्नित किया गया। हालांकि, सेना के बयान में यह विस्तार से नहीं बताया गया कि त्वचा पर नंबर लिखना क्यों आवश्यक था।
रिपोर्टों के मुताबिक, बलों ने क़बातिया में घरों की तलाशी ली और कई निवासियों को हिरासत में लिया। द जेरूसलम पोस्ट के अनुसार, IDF ने दो कथित आतंकवादियों की गिरफ्तारी और 100 से अधिक घरों की तलाशी की बात कही। दूसरी ओर, स्थानीय स्रोतों के हवाले से कुछ रिपोर्टों में महिलाओं समेत दर्जनों लोगों को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख है। उपलब्ध स्रोतों से हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या तय नहीं होती।
IDF ने स्वीकार किया कि अभियान के दौरान पूछताछ किए जा रहे लोगों पर नंबर लिखे गए थे। सेना की सफाई प्रशासनिक थी—इन लोगों को संदिग्ध बताया गया और नंबरों का इस्तेमाल पूछताछ के दौरान पहचान के लिए किया गया।
फिर भी, सेना ने इस व्यवहार को सामान्य या स्वीकार्य नीति के रूप में पेश नहीं किया। उसके बयान के अनुसार, कमांडरों ने शामिल सैनिकों को कृत्य की गंभीरता समझाई और कहा कि “सबक सीखे गए हैं।” उपलब्ध रिपोर्टों में किसी खास सज़ा, औपचारिक जांच या जिम्मेदार अधिकारी की जानकारी नहीं दी गई है।
इस जवाब पर इसलिए भी सवाल उठे क्योंकि IDF कुछ महीने पहले ऐसी ही घटना पर प्रतिक्रिया दे चुका था। अप्रैल में सेना ने कहा था कि जेनिन शरणार्थी शिविर में नियंत्रित प्रवेश के दौरान फ़िलिस्तीनी महिलाओं के हाथों पर नंबर लिखने वाले सैनिकों ने खराब निर्णय लिया था।
अरब विपक्षी सांसद अहमद तिबी ने तस्वीरों की आलोचना करते हुए कहा कि यह अमानवीयकरण है और “अंधेरे दौर” की याद दिलाता है। मानवाधिकार समर्थकों ने भी सैन्य नियंत्रण में रखे गए लोगों के शरीर पर खुले तौर पर नंबर लिखने को अपमानजनक और अमानवीय बताया। ये टिप्पणियां इस प्रथा की आलोचना हैं; इन्हें IDF की प्रशासनिक सफाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विवाद का एक अहम कारण यह था कि नंबर माथे और बाजुओं जैसी साफ़ दिखाई देने वाली जगहों पर लिखे गए थे। इससे हिरासत में लिए गए लोगों को केवल पहचान-चिह्न में बदल देने का दृश्य प्रभाव पैदा हुआ। स्रोत इस प्रथा और उस पर हुई आलोचना को दर्ज करते हैं, लेकिन सेना की पहचान संबंधी व्याख्या के अलावा सैनिकों की सटीक मंशा स्थापित नहीं करते।
अप्रैल की घटना में फ़िलिस्तीनियों को अपने घरों का निरीक्षण करने और सामान लेने के लिए सैन्य नियंत्रण वाले जेनिन शरणार्थी शिविर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। मिडिल ईस्ट आई ने बताया कि दर्जनों महिलाओं के हाथों पर नंबर लिखे गए, जबकि अन्य रिपोर्टों में कहा गया कि लगभग 120 महिलाओं को शिविर में जाने दिया गया था।
क़बातिया की घटना का संदर्भ अलग था: यह प्रतिबंधित शिविर में संगठित प्रवेश के बजाय छापे और पूछताछ अभियान के दौरान हुई। लेकिन दोनों मामलों में फ़िलिस्तीनी नागरिकों के शरीर पर नंबर लिखने की समान प्रथा सामने आई। इसी वजह से यह सवाल उठा कि अप्रैल में IDF का यह आश्वासन कितना प्रभावी था कि ऐसा व्यवहार अनुचित है और दोबारा नहीं होगा।
क़बातिया की घटना ऐसे समय में सामने आई जब कब्जे वाले वेस्ट बैंक में यहूदी राष्ट्रवादी-प्रेरित अपराध और बसने वालों के हमलों में बढ़ोतरी की खबरें थीं। इज़राइली सुरक्षा प्रतिष्ठान के आंकड़ों को Kan ने रिपोर्ट किया कि 2026 की पहली छमाही में ऐसी 660 घटनाएं दर्ज हुईं। एक रिपोर्ट ने इसकी तुलना 2025 की पहली छमाही की 440 घटनाओं से की, जबकि अन्य कवरेज में तुलना के लिए 405 का आंकड़ा इस्तेमाल किया गया और वृद्धि 63 प्रतिशत बताई गई।
इन आंकड़ों में अंतर इस बात से जुड़ा है कि विभिन्न रिपोर्टों ने किस अवधि और तुलना-आधार का इस्तेमाल किया। ‘राष्ट्रवादी अपराध’ इज़राइली सुरक्षा एजेंसियों की एक श्रेणी है, जिसमें झड़प, तोड़फोड़, आगजनी, रास्ते रोकना और संपत्ति पर हमले जैसे अलग-अलग घटनाक्रम शामिल हो सकते हैं। इसलिए आंकड़े ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी का संकेत देते हैं, लेकिन वे अपने-आप क़बातिया में नंबर लिखने की घटना को नहीं समझाते और न ही दोनों को एक साझा समन्वित नीति का हिस्सा साबित करते हैं।
उपलब्ध सामग्री में वेस्ट बैंक की कुछ नागरिक-प्रवर्तन शक्तियों को सेना से पुलिस को हस्तांतरित करने की व्यापक योजनाओं, या इससे इज़राइली संप्रभुता के विस्तार के दावों का उल्लेख मिलता है। लेकिन इन नीतिगत और कानूनी दावों तथा क़बातिया में हिरासत में लिए गए लोगों पर नंबर लिखने के बीच कोई सीधा परिचालन संबंध इन स्रोतों से स्थापित नहीं होता।
इसी तरह, फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से अक्टूबर 2023 के बाद वेस्ट बैंक में 1,100 से अधिक फ़िलिस्तीनियों की मौत का बताया गया आंकड़ा उपलब्ध सामग्री में स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है। इसे क़बातिया छापे से जुड़े पुष्ट तथ्यों से अलग रखकर देखना चाहिए।
इज़राइली सेना ने इसे एक ब्रिगेड-स्तरीय अभियान का हिस्सा बताया, जिसमें सुरक्षा बलों ने उन लोगों से पूछताछ की जिन्हें सेना ने ‘संदिग्ध’ कहा। IDF के अनुसार, पूछताछ की प्रक्रिया के दौरान कुछ लोगों को नंबरों से चिह्नित किया गया। हालांकि, सेना के बयान में यह विस्तार से नहीं बताया गया कि त्वचा पर नंबर लिखना क्यों आवश्यक था।
रिपोर्टों के मुताबिक, बलों ने क़बातिया में घरों की तलाशी ली और कई निवासियों को हिरासत में लिया। द जेरूसलम पोस्ट के अनुसार, IDF ने दो कथित आतंकवादियों की गिरफ्तारी और 100 से अधिक घरों की तलाशी की बात कही। दूसरी ओर, स्थानीय स्रोतों के हवाले से कुछ रिपोर्टों में महिलाओं समेत दर्जनों लोगों को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख है। उपलब्ध स्रोतों से हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या तय नहीं होती।
IDF ने स्वीकार किया कि अभियान के दौरान पूछताछ किए जा रहे लोगों पर नंबर लिखे गए थे। सेना की सफाई प्रशासनिक थी—इन लोगों को संदिग्ध बताया गया और नंबरों का इस्तेमाल पूछताछ के दौरान पहचान के लिए किया गया।
फिर भी, सेना ने इस व्यवहार को सामान्य या स्वीकार्य नीति के रूप में पेश नहीं किया। उसके बयान के अनुसार, कमांडरों ने शामिल सैनिकों को कृत्य की गंभीरता समझाई और कहा कि “सबक सीखे गए हैं।” उपलब्ध रिपोर्टों में किसी खास सज़ा, औपचारिक जांच या जिम्मेदार अधिकारी की जानकारी नहीं दी गई है।
इस जवाब पर इसलिए भी सवाल उठे क्योंकि IDF कुछ महीने पहले ऐसी ही घटना पर प्रतिक्रिया दे चुका था। अप्रैल में सेना ने कहा था कि जेनिन शरणार्थी शिविर में नियंत्रित प्रवेश के दौरान फ़िलिस्तीनी महिलाओं के हाथों पर नंबर लिखने वाले सैनिकों ने खराब निर्णय लिया था।
अरब विपक्षी सांसद अहमद तिबी ने तस्वीरों की आलोचना करते हुए कहा कि यह अमानवीयकरण है और “अंधेरे दौर” की याद दिलाता है। मानवाधिकार समर्थकों ने भी सैन्य नियंत्रण में रखे गए लोगों के शरीर पर खुले तौर पर नंबर लिखने को अपमानजनक और अमानवीय बताया। ये टिप्पणियां इस प्रथा की आलोचना हैं; इन्हें IDF की प्रशासनिक सफाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विवाद का एक अहम कारण यह था कि नंबर माथे और बाजुओं जैसी साफ़ दिखाई देने वाली जगहों पर लिखे गए थे। इससे हिरासत में लिए गए लोगों को केवल पहचान-चिह्न में बदल देने का दृश्य प्रभाव पैदा हुआ। स्रोत इस प्रथा और उस पर हुई आलोचना को दर्ज करते हैं, लेकिन सेना की पहचान संबंधी व्याख्या के अलावा सैनिकों की सटीक मंशा स्थापित नहीं करते।
अप्रैल की घटना में फ़िलिस्तीनियों को अपने घरों का निरीक्षण करने और सामान लेने के लिए सैन्य नियंत्रण वाले जेनिन शरणार्थी शिविर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। मिडिल ईस्ट आई ने बताया कि दर्जनों महिलाओं के हाथों पर नंबर लिखे गए, जबकि अन्य रिपोर्टों में कहा गया कि लगभग 120 महिलाओं को शिविर में जाने दिया गया था।
क़बातिया की घटना का संदर्भ अलग था: यह प्रतिबंधित शिविर में संगठित प्रवेश के बजाय छापे और पूछताछ अभियान के दौरान हुई। लेकिन दोनों मामलों में फ़िलिस्तीनी नागरिकों के शरीर पर नंबर लिखने की समान प्रथा सामने आई। इसी वजह से यह सवाल उठा कि अप्रैल में IDF का यह आश्वासन कितना प्रभावी था कि ऐसा व्यवहार अनुचित है और दोबारा नहीं होगा।
क़बातिया की घटना ऐसे समय में सामने आई जब कब्जे वाले वेस्ट बैंक में यहूदी राष्ट्रवादी-प्रेरित अपराध और बसने वालों के हमलों में बढ़ोतरी की खबरें थीं। इज़राइली सुरक्षा प्रतिष्ठान के आंकड़ों को Kan ने रिपोर्ट किया कि 2026 की पहली छमाही में ऐसी 660 घटनाएं दर्ज हुईं। एक रिपोर्ट ने इसकी तुलना 2025 की पहली छमाही की 440 घटनाओं से की, जबकि अन्य कवरेज में तुलना के लिए 405 का आंकड़ा इस्तेमाल किया गया और वृद्धि 63 प्रतिशत बताई गई।
इन आंकड़ों में अंतर इस बात से जुड़ा है कि विभिन्न रिपोर्टों ने किस अवधि और तुलना-आधार का इस्तेमाल किया। ‘राष्ट्रवादी अपराध’ इज़राइली सुरक्षा एजेंसियों की एक श्रेणी है, जिसमें झड़प, तोड़फोड़, आगजनी, रास्ते रोकना और संपत्ति पर हमले जैसे अलग-अलग घटनाक्रम शामिल हो सकते हैं। इसलिए आंकड़े ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी का संकेत देते हैं, लेकिन वे अपने-आप क़बातिया में नंबर लिखने की घटना को नहीं समझाते और न ही दोनों को एक साझा समन्वित नीति का हिस्सा साबित करते हैं।
उपलब्ध सामग्री में वेस्ट बैंक की कुछ नागरिक-प्रवर्तन शक्तियों को सेना से पुलिस को हस्तांतरित करने की व्यापक योजनाओं, या इससे इज़राइली संप्रभुता के विस्तार के दावों का उल्लेख मिलता है। लेकिन इन नीतिगत और कानूनी दावों तथा क़बातिया में हिरासत में लिए गए लोगों पर नंबर लिखने के बीच कोई सीधा परिचालन संबंध इन स्रोतों से स्थापित नहीं होता।
इसी तरह, फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से अक्टूबर 2023 के बाद वेस्ट बैंक में 1,100 से अधिक फ़िलिस्तीनियों की मौत का बताया गया आंकड़ा उपलब्ध सामग्री में स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं है। इसे क़बातिया छापे से जुड़े पुष्ट तथ्यों से अलग रखकर देखना चाहिए।