मोहम्मद असासा के मुताबिक दफन की प्रक्रिया इज़राइली सेना के साथ समन्वय में हुई थी और जरूरी अनुमति मौजूद थी . उनका कहना है कि अंतिम संस्कार के कुछ ही समय बाद गांव वालों ने परिवार को वापस कब्रिस्तान बुलाया, क्योंकि बसने वाले कब्र के पास थे और उसे खोदने का आदेश दे रहे थे
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परिवार के अनुसार बसने वालों ने दावा किया कि वह जमीन पास की एक बस्ती का हिस्सा है। परिवार का यह भी कहना है कि रिश्तेदारों ने शव खुद निकाला, क्योंकि उन्हें चेतावनी दी गई थी कि अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो बसने वाले बुलडोज़र इस्तेमाल करेंगे . इसके बाद परिवार ने असासा को दूसरे कब्रिस्तान में दफनाया
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Reuters की एक वीडियो रिपोर्ट, जिसे MarketScreener ने प्रकाशित किया, में कहा गया कि उसने घटना से जुड़े वीडियो की लोकेशन सत्यापित की, लेकिन तारीख की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की। उसी रिपोर्ट में कहा गया कि तस्वीरों में इज़राइली सैनिक भी दिखाई दे रहे थे . अन्य रिपोर्टों में भी कहा गया कि सत्यापित वीडियो में लोग पहाड़ी इलाके से किसी शव जैसा दिखने वाला शरीर हटाते दिखे, जबकि इज़राइली सैनिक उनके पीछे चलते नजर आए
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इससे यह बात मजबूत होती है कि सैनिक मौके पर मौजूद थे, लेकिन केवल वीडियो से यह तय नहीं होता कि कब्र खुलवाने का आदेश किसने दिया। इसी बिंदु पर परिवार के बयान और इज़राइली सेना के बयान में फर्क है .
इज़राइली सेना ने कहा कि अंतिम संस्कार उसके साथ समन्वय में हुआ था, लेकिन उसने परिवार को असासा को दोबारा दफनाने का निर्देश नहीं दिया . सेना के अनुसार सैनिकों को इलाके में तब भेजा गया, जब टकराव के दौरान बसने वालों के “इलाके में खुदाई” करने की सूचना मिली। सेना ने कहा कि सैनिकों ने इज़राइली नागरिकों से खुदाई के औज़ार जब्त किए और आगे तनाव रोकने के लिए वहां मौजूद रहे
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Xinhua की अलग रिपोर्ट के अनुसार IDF ने कहा कि वह घटना की जांच कर रही है। उसी रिपोर्ट में सेना के हवाले से कहा गया कि वह “सार्वजनिक व्यवस्था, कानून के शासन, मानव गरिमा और मृतक की गरिमा” को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश की निंदा करती है .
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने घटना की निंदा की . रिपोर्टों में अधिकृत फ़लस्तीनी क्षेत्र में OHCHR कार्यालय के प्रमुख अजित सुंघे को यह कहते हुए उद्धृत किया गया कि शव निकालने की यह घटना भयावह है और अधिकृत क्षेत्र में फ़लस्तीनियों के अमानवीयकरण को दिखाती है
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UN की प्रतिक्रिया पर आधारित अन्य रिपोर्टों में घटना को “appalling and emblematic of the dehumanization of Palestinians” — यानी भयावह और फ़लस्तीनियों के अमानवीयकरण का प्रतीक — कहा गया .
इस घटना से जुड़ी कुछ चर्चाओं में अलग-अलग जगहों के नाम सामने आए हैं। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टें दफन की जगह को जेनिन के दक्षिण में असासा या अल-असासा गांव बताती हैं और पास की बस्ती को Sa-Nur या Sanur के रूप में पहचानती हैं . इन रिपोर्टों से यह स्थापित नहीं होता कि संबंधित बस्ती Tarsala थी। Reuters ने यह भी बताया कि वह पास की Sa-Nur बस्ती के बसने वालों से टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं कर सका
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रिपोर्टों में Sa-Nur को ऐसी बस्ती बताया गया है, जिसकी फिर से स्थापना को इज़राइली सरकार ने पिछले वर्ष मंजूरी दी थी .
मौजूद रिपोर्टों के आधार पर सबसे सावधानीपूर्ण निष्कर्ष यही है: असासा के परिवार का आरोप है कि बसने वालों ने कब्र खुलवाकर शव दूसरी जगह ले जाने पर मजबूर किया; रिपोर्ट किए गए वीडियो में इज़राइली सैनिकों की मौजूदगी बताई गई; IDF ने दोबारा दफनाने का आदेश देने से इनकार किया और जांच की बात कही; और संयुक्त राष्ट्र ने इस घटना को अमानवीय बताया .
लेकिन जिम्मेदारी की पूरी तस्वीर अभी साफ नहीं है। Sa-Nur के बसने वालों से टिप्पणी नहीं मिल सकी और प्रसारित वीडियो की तारीख स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की गई। इसलिए प्रकाशित रिकॉर्ड घटना के हर पहलू, खासकर आदेश किसने दिया, पर अंतिम निष्कर्ष नहीं देता .
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