इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने डेमन जेल के महिला वार्ड का दौरा किया, फ़िलिस्तीनी महिला बंदियों से उनकी हिरासत की परिस्थितियों पर बातचीत की और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। वीडियो में एक कैदी ने बुनियादी स्वच्छता और चिकित्सा सुविधा की कमी की शिकायत की। बेन-ग्विर ने इसके जवाब में कहा कि इज़राइली जेलों में पहले मौजूद “अच्छी परिस्थितियां” अब खत्म हो चुकी हैं और मौजूदा स्थिति के लिए वह सीधे जिम्मेदार हैं।
11
10
फ़िलिस्तीनी कैदी-अधिकार संगठनों ने इस दौरे और महिलाओं को फिल्माकर वीडियो सार्वजनिक करने की कड़ी निंदा की। उनके अनुसार, यह वास्तविक निरीक्षण के बजाय डराने-धमकाने और अपमान का सार्वजनिक राजनीतिक प्रदर्शन था।
10
डेमन जेल की महिला कैदियों ने क्या बताया
वीडियो में एक महिला ने कहा कि कैदियों को तीन दिनों से स्नान करने का मौका नहीं मिला है, उन्हें चिकित्सा उपचार नहीं दिया जा रहा और वे साफ कपड़े नहीं पहन पा रही हैं। अन्य रिपोर्टों में कैदियों की ओर से सुविधाएं वापस लिए जाने और रोजमर्रा की बुनियादी निजी जरूरतों पर रोक की शिकायतों का भी उल्लेख है।
11
10
जारी किए गए वीडियो में महिलाओं के चेहरे धुंधले या ढके हुए दिखाई दिए। उपलब्ध रिपोर्टों में जेल की परिस्थितियों से जुड़े आरोप कैदियों और कैदी-अधिकार संगठनों के हवाले से हैं; महिलाओं के वार्ड का कोई स्वतंत्र निरीक्षण इन स्रोतों में दर्ज नहीं है।
11
8
बेन-ग्विर ने अपनी नीति का बचाव कैसे किया
बेन-ग्विर ने कहा कि जेलों में पहले मौजूद “अच्छी परिस्थितियां” अब समाप्त हो चुकी हैं। उन्होंने मौजूदा हालात की जिम्मेदारी खुद लेते हुए कहा कि वह इन बदलावों से खुश हैं। उन्होंने कैदियों की शिकायतों को “रोना-धोना” बताया और अपनी नीति को “न्यूनतम में भी न्यूनतम” कहा।
6
10
उन्होंने फ़िलिस्तीनी बंदियों के साथ व्यवहार की तुलना ग़ज़ा में बंधक बनाए गए इज़राइली लोगों के साथ व्यवहार से की और इसी तुलना के आधार पर पाबंदियों को उचित ठहराया। उनके कार्यालय ने इन महिलाओं को मुख्य रूप से इस्लामिक जिहाद की सदस्य या “आतंकवादी” बताया, न कि जेल की परिस्थितियों की शिकायत कर रही बंदियों के रूप में पेश किया।
10
11
इस पूरे प्रकरण में दो संदेश एक साथ दिखाई दिए: बेन-ग्विर ने कैदियों की सुविधाएं घटाने का श्रेय खुद लिया, जबकि महिलाओं ने बताया कि इन नीतियों का असर उनके रोजमर्रा के जीवन पर कैसे पड़ रहा है—जैसे स्वच्छता और चिकित्सा देखभाल की कमी। रिपोर्टों में भोजन और पानी में कटौती, परिवार से मुलाकात और स्नान पर पाबंदियां तथा पहले मिलने वाली सुविधाओं को हटाने का भी उल्लेख है।
10
20
फ़िलिस्तीनी अधिकार समूहों ने वीडियो की निंदा क्यों की
फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण के बंदी एवं पूर्व-बंदी मामलों के आयोग ने वीडियो बनाने को राजनीतिक तमाशा और उकसावे की कार्रवाई बताया। उसके अनुसार, इसका उद्देश्य महिला कैदियों को डराना और उनका मनोबल तोड़ना था। आयोग ने व्यापक जेल व्यवस्था पर प्रतिशोध, अपमान, भूख, वंचना और यातना जैसे आरोप लगाए।
10
फ़िलिस्तीनी कैदी सोसायटी ने कहा कि महिलाओं को फिल्माकर वीडियो प्रकाशित करना उनके मानवीय सम्मान पर हमला है। संगठन की आपत्ति केवल कथित खराब परिस्थितियों तक सीमित नहीं थी; उसने कैदियों की परेशानी को सार्वजनिक राजनीतिक संदेश में बदलने की भी आलोचना की।
10
हालांकि, ये आरोप और आकलन फ़िलिस्तीनी कैदी संगठनों के हैं। उपलब्ध रिपोर्टें हर आरोप पर स्वतंत्र निष्कर्ष स्थापित नहीं करतीं। इसलिए व्यवस्थित दुर्व्यवहार या यातना से जुड़े दावों को उन्हीं संगठनों के आरोप के रूप में समझना चाहिए।
बेन-ग्विर के कार्यकाल में ऐसे अन्य मामले
डेमन जेल का दौरा बेन-ग्विर के कार्यकाल के दौरान जेलों और हिरासत केंद्रों से जुड़े कई सार्वजनिक रूप से प्रचारित टकरावों की कड़ी का हिस्सा था। उनका कार्यकाल 2022 के अंत में शुरू हुआ।
20
फरवरी 2026: ओफ़र जेल में छापा
फरवरी 2026 में बेन-ग्विर जेल दमन इकाइयों के साथ ओफ़र जेल के सेक्शन 26 में हुई कार्रवाई के दौरान मौजूद थे। फ़िलिस्तीनी कैदी सोसायटी के अनुसार, यह कार्रवाई शाम की गिनती के समय हुई और बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई। अन्य वीडियो और रिपोर्टों में अधिकारियों को हथियारों और स्टन ग्रेनेड के साथ वार्ड में घुसते, बंदियों को बाहर निकालते और उन्हें जमीन पर लेटने के लिए मजबूर करते दिखाया गया।
19
16
24
उपलब्ध स्रोत बेन-ग्विर की उस कार्रवाई में सटीक भूमिका का अलग-अलग वर्णन करते हैं। हालांकि, वे इस बात पर सहमत हैं कि वह उस समय मौजूद थे और कार्रवाई को फिल्माकर सार्वजनिक किया गया।
16
19
हिरासत में बंद लोगों से कैमरे के सामने टकराव
2026 की अन्य रिपोर्टों में भी बेन-ग्विर द्वारा फ़िलिस्तीनी बंदियों से मुलाकात और टकराव को वीडियो के जरिए अपनी जेल नीति के प्रचार के लिए इस्तेमाल करने का उल्लेख है। द गार्डियन ने टेलीविजन पर दिखाए गए दुर्व्यवहार को उनके सार्वजनिक राजनीतिक अंदाज की बार-बार दोहराई जाने वाली विशेषता बताया। अन्य रिपोर्टों में परिस्थितियों की शिकायत करने वाले बंदियों का मजाक उड़ाने या उन्हें उकसाने का आरोप लगाया गया।
13
21
इसलिए डेमन जेल का वीडियो केवल जेल सुविधाओं से जुड़ी एक विवादित शिकायत तक सीमित नहीं था। उसने यह भी दिखाया कि एक मंत्री कठोर व्यवहार को राजनीतिक उपलब्धि के रूप में सार्वजनिक रूप से पेश कर रहा था और बंदियों की शिकायतों को उसी राजनीतिक संदेश का हिस्सा बना रहा था।
इज़राइली जेलों में कितने फ़िलिस्तीनी बंद हैं?
अगस्त 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइली जेलों में फ़िलिस्तीनी कैदियों और बंदियों की संख्या लगभग 9,400 है। इन्हीं रिपोर्टों में करीब 92 महिलाएं और 370 बच्चे बताए गए हैं। हालांकि, कुल संख्या तारीख, संस्था और गिने गए बंदियों की श्रेणी के अनुसार बदलती रहती है।
28
34
जुलाई 2026 की शुरुआत के एक फ़िलिस्तीनी तथ्य-पत्र में भी कुल संख्या करीब 9,400 दी गई थी, लेकिन उसमें 99 महिलाएं और 350 से अधिक बच्चे दर्ज थे। अप्रैल की पुरानी रिपोर्टों में 9,600 से अधिक फ़िलिस्तीनी और अरब कैदियों तथा 86 महिला बंदियों का उल्लेख था। इससे स्पष्ट है कि ये आंकड़े किसी एक स्थायी वर्तमान संख्या के बजाय अलग-अलग समय के अनुमान हैं।
35
30
39
अगस्त की सबसे स्पष्ट तस्वीर लगभग 9,400 बंदियों की है, जिनमें करीब 90 महिलाएं और 350 से अधिक बच्चे शामिल हैं। आंकड़ों में अंतर के बावजूद डेमन जेल की घटना का व्यापक संदर्भ नहीं बदलता: यह वीडियो एक ऐसे बड़े हिरासत तंत्र के भीतर सामने आया है, जिसके आकार और परिस्थितियों पर राजनीतिक पक्षों तथा अधिकार संगठनों के दावे एक-दूसरे से sharply अलग हैं।