इज़राइल गाज़ा की ओर समुद्र के रास्ते जाने के प्रयासों को अपनी सुरक्षा नीतियों का उल्लंघन मानता है। इसी कारण फ्लोटिला के यात्रियों को पहले हिरासत में लिया गया और फिर उन्हें इज़राइल से बाहर भेज दिया गया।
हिरासत में लिए गए कई लोग विदेशी नागरिक थे। अलग‑अलग देशों ने अपने नागरिकों के लिए कांसुलर सहायता और वापसी की व्यवस्था की।
इस प्रक्रिया में तुर्किये (Turkey) एक प्रमुख ट्रांज़िट केंद्र बना, जहाँ से कई कार्यकर्ताओं—खासकर तुर्की नागरिकों—को उनके देशों तक वापस भेजने के लिए उड़ानों की व्यवस्था की गई।
घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब और ध्यान खींचा जब इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन‑गवीर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया।
वीडियो में कई कार्यकर्ता घुटनों के बल बैठे हुए, हाथ बंधे और सिर झुकाए हुए दिखाई दे रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार वीडियो में मंत्री उन्हें चिढ़ाते या ताना मारते हुए भी दिखे। यह फुटेज तेजी से वायरल हो गया और कई देशों तथा मानवाधिकार समूहों ने इसकी आलोचना की।
आलोचकों का कहना था कि हिरासत में लिए गए नागरिकों को इस तरह दिखाना अपमानजनक और अमानवीय है। बताया गया कि इज़राइल के भीतर भी कुछ नेताओं ने इस वीडियो को अनावश्यक रूप से विवाद भड़काने वाला बताया।
फ्लोटिला में कई देशों के नागरिक शामिल थे, इसलिए घटना पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेज़ रही।
कनाडा ने इज़राइल के राजदूत को तलब किया। विदेश मंत्री अनीता आनंद ने वीडियो को “गंभीर रूप से परेशान करने वाला और अस्वीकार्य” बताया और कनाडाई नागरिकों की सुरक्षा को लेकर स्पष्टीकरण माँगा।
यूरोप में भी कई देशों ने कड़ा रुख अपनाया। फ्रांस, इटली, स्पेन, नीदरलैंड, आयरलैंड और अन्य देशों ने इज़राइली राजनयिकों को बुलाकर स्पष्टीकरण माँगा या आधिकारिक विरोध दर्ज कराया। कई नेताओं ने वीडियो में दिखाए गए व्यवहार को मानव गरिमा के खिलाफ बताया।
दिलचस्प बात यह है कि कई सरकारों ने फ्लोटिला को रोकने की कार्रवाई पर सीधे सवाल नहीं उठाए, बल्कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ व्यवहार और सार्वजनिक अपमान पर ज़्यादा आपत्ति जताई।
यह घटना कोई अलग मामला नहीं है। पिछले डेढ़ दशक से गाज़ा की ओर जाने वाले ऐसे अभियानों और इज़राइल की नाकाबंदी के बीच टकराव होता रहा है।
इज़राइल ने 2009 से गाज़ा पर समुद्री नाकाबंदी लागू कर रखी है। समुद्री युद्ध के अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, यदि कोई देश वैध नाकाबंदी घोषित करता है तो वह उच्च समुद्र (high seas) में भी उसे लागू कर सकता है—बशर्ते कुछ कानूनी शर्तें पूरी हों, जैसे पारदर्शिता, प्रभावशीलता और अनुपातिकता।
इस मुद्दे पर सबसे बड़ा विवाद 2010 की Mavi Marmara फ्लोटिला घटना के बाद हुआ था। संयुक्त राष्ट्र की एक जांच समिति ने बाद में कहा कि गाज़ा की नौसैनिक नाकाबंदी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध मानी जा सकती है, लेकिन जहाज़ों पर चढ़ाई के दौरान बल प्रयोग के कुछ पहलुओं की आलोचना भी की गई।
तब से कई बार कार्यकर्ता फ्लोटिला लेकर गाज़ा जाने की कोशिश करते रहे हैं—अक्सर मानवीय संकट पर ध्यान खींचने के उद्देश्य से—और इज़राइल ने उन्हें समुद्र में ही रोक दिया है।
Global Sumud Flotilla की घटना इसलिए खास तौर पर सुर्खियों में रही क्योंकि कई संवेदनशील पहलू एक साथ सामने आए:
इन कारणों से यह घटना सिर्फ एक समुद्री सुरक्षा कार्रवाई नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, मानवाधिकार और समुद्री कानून से जुड़ा बड़ा राजनीतिक विवाद बन गई।
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