मिनेसोटा फिलहाल अपने नए AI फेक-न्यूड कानून को लागू कर सकता है। एलन मस्क की AI कंपनी xAI ने इसे रुकवाने के लिए फेडरल अदालत में प्रारंभिक निषेधाज्ञा (preliminary injunction) मांगी थी, लेकिन जज डोनोवन डब्ल्यू. फ्रैंक ने 4 सितंबर को यह मांग खारिज कर दी। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने कानून को संवैधानिक घोषित कर दिया है; मुख्य मुकदमा अभी जारी है।
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कानून किस चीज पर रोक लगाता है?
मिनेसोटा का हाउस फाइल 1606 (HF 1606) 1 अगस्त 2026 से प्रभावी हुआ। यह उन AI तकनीकी उत्पादों के प्रदाताओं को निशाना बनाता है जो उपयोगकर्ताओं को किसी पहचान योग्य व्यक्ति की कुछ यौन छवियां या अंतरंग अंगों वाली छवियां बनाने देते हैं। रिपोर्टों में xAI के Grok Imagine जैसे टूल का उल्लेख किया गया है।
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इसे आम तौर पर AI “न्यूडिफिकेशन” पर रोक कहा जा रहा है—यानी AI से किसी वास्तविक, पहचान योग्य व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को इस तरह बदलना या बनाना कि उसमें ऐसा अंतरंग अंग दिखाई दे जो मूल सामग्री में नहीं था। मुकदमे से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, यह अमेरिका में इस तरह का पहला राज्य कानून है।
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कानून के तहत मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल निषेधाज्ञा और हर उल्लंघन पर 5 लाख डॉलर तक के नागरिक जुर्माने की मांग कर सकते हैं।
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xAI ने कानून को क्यों चुनौती दी?
xAI ने जुलाई के अंत में मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन के खिलाफ मुकदमा दायर किया। कंपनी का कहना है कि HF 1606 अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन के तहत संरक्षित अभिव्यक्ति और दृश्य-रचनात्मक टूल्स पर सामग्री-आधारित पाबंदी लगाता है। xAI के अनुसार, किसी प्रदाता की जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर हो जाती है कि बदली गई छवि में क्या दिखाया गया है, और कानून गैर-सहमति वाली यौन सामग्री से आगे बढ़कर संरक्षित अभिव्यक्ति को भी अपनी जद में ले सकता है।
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कंपनी ने पहले कानून लागू होने से पहले आपात राहत मांगी और फिर मुकदमे के दौरान कानून के अमल को निलंबित कराने के लिए प्रारंभिक निषेधाज्ञा का अनुरोध किया। xAI का कहना था कि इसका असर मिनेसोटा में Grok और Grok Imagine के उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा।
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राज्य ने इस तर्क से असहमति जताई। एलिसन का कहना था कि कानून को गैर-सहमति वाली AI-निर्मित यौन छवियों की समस्या से निपटने के लिए सीमित दायरे में तैयार किया गया है। राज्य के मुताबिक, विवादित सुविधा एक विनियमित किया जा सकने वाला उत्पाद-फीचर है, न कि उस अर्थ में संरक्षित भाषण जैसा xAI बता रही है।
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जज ने शुरुआती रोक क्यों नहीं लगाई?
4 सितंबर के आदेश में जज फ्रैंक ने कानून के प्रथम संशोधन के अनुरूप होने या न होने पर अंतिम निर्णय नहीं दिया। उन्होंने कहा कि xAI उस तत्काल और अपूरणीय नुकसान को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर पाई, जो प्रारंभिक निषेधाज्ञा जैसे असाधारण उपाय के लिए जरूरी होता है।
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समय-निर्धारण भी अहम रहा। अदालत ने 31 जुलाई को xAI की अस्थायी रोक (temporary restraining order) की मांग पहले ही खारिज कर दी थी। तब अदालत ने कहा था कि कंपनी ने कानून लागू होने के बेहद करीब आकर आपात राहत मांगी। उसके बाद मामले को प्रारंभिक निषेधाज्ञा पर तेज सुनवाई के लिए आगे बढ़ाया गया।
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बाद के आदेश में अदालत ने नुकसान के संतुलन और जनहित को भी मिनेसोटा के पक्ष में माना। जज फ्रैंक ने कानून को एक लोकतांत्रिक ढंग से पारित नागरिक कानून बताया, जिसका उद्देश्य यथार्थवादी, यौन-रूप से प्रस्तुत AI छवियों के प्रसार से होने वाले नुकसान का सामना करना है।
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फैसले का व्यावहारिक असर क्या है?
सीधा नतीजा यह है कि मुकदमा चलते रहने के दौरान मिनेसोटा HF 1606 लागू कर सकता है। दायरे में आने वाले AI प्रदाताओं पर इस अवधि में कानून के तहत संभावित कार्रवाई और जुर्माने का जोखिम बना रहेगा।
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लेकिन यह कानून की संवैधानिकता पर अंतिम मुहर नहीं है। अदालत ने xAI के प्रथम संशोधन वाले तर्कों के गुण-दोष पर अभी फैसला नहीं किया है। xAI ने कहा है कि वह इस अस्वीकृति के खिलाफ अपील करने की योजना बना रही है, जबकि उसका मूल मुकदमा भी लंबित है।
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Grok और ‘न्यूडिफिकेशन’ टूल्स इस विवाद के केंद्र में क्यों हैं?
यह मामला एक बड़े नीतिगत सवाल को सामने लाता है: अगर AI टूल किसी पहचान योग्य व्यक्ति की यथार्थवादी, गैर-सहमति वाली यौन छवि बना सकते हैं, तो क्या राज्य उनके प्रदाताओं पर सीधे कानूनी जिम्मेदारियां डाल सकते हैं?
मिनेसोटा का पक्ष है कि आसानी से उपलब्ध न्यूडिफिकेशन सुविधाएं गंभीर नुकसान पैदा करती हैं और उन पर लक्षित नियमन जरूरी है। दूसरी ओर xAI का कहना है कि यह कानून सामान्य उपयोग वाले रचनात्मक AI टूल्स पर भाषण-आधारित प्रतिबंध बन जाता है।
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फिलहाल इस प्रक्रियागत चरण में बढ़त मिनेसोटा को मिली है। असली और अधिक महत्वपूर्ण सवाल—क्या AI टूल्स पर इस तरह की पाबंदी प्रथम संशोधन की कसौटी पर टिकेगी—अभी अनसुलझा है।