इस घटना की शुरुआत सोमवार, 1 जून 2026 की दोपहर को हुई, जब यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने दोपहर 1:00 बजे (UTC) एक तत्काल चेतावनी जारी की । शुरुआती रिपोर्टें बेहद अफरातफरी भरी थीं। पहले इराकी मीडिया ने इसे "यांत्रिक विफलता" (मैकेनिकल फेल्योर) का नाम दिया
। लेकिन जल्द ही यह बात खारिज हो गई और सूचना आई कि जहाज को किसी "अज्ञात प्रोजेक्टाइल" ने टक्कर मारी है
।
यह हमला इराक के मुख्य बंदरगाह उम्म क़स्र से लगभग 40 समुद्री मील (65 किलोमीटर) दक्षिण-पूर्व में हुआ, जो कुवैत सीमा के पास फारस की खाड़ी के उत्तरी भाग में स्थित है । बताया गया कि जहाज ने उम्म क़स्र में अपना माल उतारने के बाद जब वहाँ से रवाना हुआ था, तभी बॉय नंबर पांच के पास उसके दाहिनी ओर (स्टारबोर्ड साइड) एक जबरदस्त धमाका हुआ
।
कुछ ही घंटों में तस्वीर साफ हो गई। इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने आकलन किया कि दूसरा धमाका एक मानवरहित हवाई वाहन (ड्रोन) के कारण हुआ था । बसरा के एक सुरक्षा सूत्र ने बाद में बताया कि एहतियात के तौर पर 20 नाविकों को अल-फॉ बंदरगाह स्थित खोज और बचाव केंद्र में ले जाया गया
।
लेकिन निर्णायक दावा 2 जून को आया। IRGC ने आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी लेते हुए घोषणा की कि उसकी नौसेना बलों ने MSC Sariska V को एक क्रूज मिसाइल से निशाना बनाया है। ईरानी राज्य मीडिया ने इसके पीछे का मकसद भी बिल्कुल साफ बता दिया: यह हमला 29 मई को ओमान सागर में एक ईरानी जहाज, लियान स्टार, पर हुए अमेरिकी हमले का सीधा जवाब था । यह एक दुर्लभ मौका था जब ईरान ने किसी खास हमले की जिम्मेदारी तुरंत और सार्वजनिक रूप से ली, जो एक स्पष्ट संदेश देने की जानबूझकर की गई कोशिश को दर्शाता है।
हमले का सबसे भयावह सबूत ईरान-समर्थक इराकी आउटलेट 'अलसुमारिया न्यूज़' द्वारा प्रसारित एक वीडियो से मिला, जिसमें MSC Sariska V के ढांचे में पानी की सतह के ठीक ऊपर, दाहिनी ओर एक बड़ा छेद साफ देखा जा सकता है । UKMTO ने भी पुष्टि की कि हमले से जहाज के स्टारबोर्ड साइड "महत्वपूर्ण रूप से टूट गया" था
। धमाके के बाद आग भड़क उठी, लेकिन चालक दल ने उस पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया। किसी तेल रिसाव या बड़े पर्यावरणीय नुकसान की कोई सूचना नहीं आई
।
सबसे राहत देने वाली बात यह रही कि किसी भी क्रू मेंबर की मृत्यु नहीं हुई या वह घायल नहीं हुआ। कई रिपोर्टों ने पुष्टि की कि जहाज पर सवार सभी लोग सुरक्षित हैं । हालांकि जहाज की संरचनात्मक मजबूती से समझौता हुआ, लेकिन यह डूबा नहीं और न ही इसका माल खराब हुआ, फिर भी शिपिंग उद्योग में इस हमले की मनोवैज्ञानिक और वित्तीय सदमे की लहर तुरंत दौड़ गई।
MSC Sariska V पर हमला कोई अलग-थलग घटना नहीं थी। फरवरी 2026 के अंत में अमेरिकी-ईरान संघर्ष के भड़कने के बाद से इराक के तट पर वाणिज्यिक जहाजों पर यह तीसरी रिपोर्टेड अटैक थी । इस बड़े युद्ध ने पूरे क्षेत्र के जलमार्गों को एक सक्रिय रणभूमि में बदल दिया।
युद्ध के दौरान हमला किए गए जहाजों की एक विकिपीडिया सूची में मार्च की शुरुआत में फुजैराह के पूर्व में एक 'अज्ञात प्रोजेक्टाइल' की चपेट में आए बल्क कैरियर गोल्ड ओक जैसी घटनाएँ शामिल हैं । अप्रैल में ही, IRGC ने 'समुद्री उल्लंघनों' के लिए MSC Francesca और Epaminodes नामक दो अन्य जहाजों को पहले ही जब्त कर लिया था
। यह पैटर्न दर्शाता है कि IRGC वाणिज्यिक शिपिंग को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का एक व्यापक अभियान चला रही है, जिसमें सीधे हमलों और जहाज जब्ती का मिलाजुला तरीका अपनाकर व्यापार बाधित किया जाता है और अमेरिका व उसके सहयोगियों पर दबाव डाला जाता है।
इन हमलों का लक्ष्य एक खास रणनीति की ओर इशारा करता है: अमेरिकी, इजरायली या उनके सहयोगियों से जुड़े हुए प्रतीत होने वाले जहाज, भले ही वे सिर्फ सुविधा के लिए पनामा जैसे देशों के झंडे लगाए हों, वैध निशाना समझे जा रहे हैं। IRGC का MSC Sariska V को आधिकारिक तौर पर "अमेरिकी-इजरायली संपत्ति" करार देना एक जनसंपर्क और डराने वाली रणनीति है, जो वैश्विक शिपिंग बेड़े पर संदेह का एक बड़ा जाल फैलाने के लिए बनाई गई है ।
यह हमला एक बेहद नाजुक कूटनीतिक क्षण पर हुआ। कई हफ्तों से, अमेरिका और ईरान एक संभावित 60-दिवसीय युद्धविराम विस्तार और एक व्यापक शांति ढाँचे की ओर बढ़ रहे थे। 24 मई को एक्सियोस द्वारा रिपोर्ट की गई प्रस्तावित डील के मूल में हॉर्मुज जलडमरूमध्य—दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग—को खोलना शामिल था, जिसके बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाता और ईरान को स्वतंत्र रूप से तेल बेचने की अनुमति देता ।
28 मई तक, वार्ताकार कथित तौर पर एक ढांचे की व्यापक रूपरेखा पर सहमत हो गए थे, हालांकि राष्ट्रपति ट्रम्प से इसकी अंतिम मंजूरी बाकी थी । यह डील 30 दिनों के भीतर जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाजों की आवाजाही को युद्ध-पूर्व स्तर पर बहाल करने और ईरान द्वारा बिछाई गई सुरंगों को साफ करने का वादा करती थी
। यह नाजुक प्रगति महीनों की असफल इस्लामाबाद वार्ता, 13 अप्रैल को लगाई गई अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को रुक-रुक कर बंद करने व टोल वसूलने के बाद आई थी
।
1 जून के हमले ने इन वार्ताओं को पूरी तरह पटरी से उतारने का सीधा खतरा पैदा कर दिया। इराकी जलक्षेत्र में एक वाणिज्यिक जहाज पर हमला करके—एक ऐसी जगह जो खासतौर पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर है लेकिन व्यापक संघर्ष क्षेत्र में आती है—IRGC ने दिखा दिया कि केवल हॉर्मुज के लिए डील भी उत्तरी फारस की खाड़ी में सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती। इसने वाशिंगटन को यह संकेत दिया कि ईरान के पास हॉरिजॉन्टल एस्केलेशन की क्षमता और इच्छाशक्ति बरकरार है, वह अमेरिकी सहयोगी के पास एक नया मोर्चा खोल सकता है, जबकि बातचीत किसी और जलमार्ग पर केंद्रित हो। यह कदम युद्ध के पहले के चक्रों को दोहराता है: युद्धविराम घोषित किए जाते थे, जबकि दोनों पक्ष नौसैनिक नाकेबंदी और जहाज जब्ती जारी रखते थे, जिससे विश्वास खत्म होता गया और हर कूटनीतिक मील का पत्थर अनिश्चितता से भरा रहता था ।
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