तत्काल उपलब्ध जानकारी सीमित है, लेकिन घटना गंभीर है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने कहा कि 12 सितंबर की देर रात हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज को अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने निशाना बनाया। जहाज पर आग लग गई और स्थानीय अधिकारियों ने चालक दल को निकालने में मदद की। शुरुआत में जहाज की पहचान, नुकसान की सीमा और पर्यावरणीय प्रभाव का पता नहीं था। UKMTO ने हमले के लिए किसी पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया।
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यह सिर्फ एक जहाज की घटना नहीं है। यह ऐसे समय हुई है जब इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से वाणिज्यिक यातायात पहले ही बहुत घट चुका था और कूटनीतिक बातचीत, नौसैनिक एस्कॉर्ट तथा अलग-अलग नौवहन दावे सुरक्षित व भरोसेमंद मार्ग तय नहीं कर पाए थे।
UKMTO और CNBC की रिपोर्ट में क्या कहा गया
UKMTO के शुरुआती अलर्ट में कहा गया कि जलडमरूमध्य से गुजरते समय जहाज को एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल लगा। बाद के अपडेट में बताया गया कि आग लग गई और स्थानीय अधिकारी चालक दल को निकालने में सहायता कर रहे हैं। न तो UKMTO और न ही CNBC की रिपोर्ट ने जहाज या हमलावर की पहचान बताई।
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इन अनिश्चितताओं का महत्व है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के आधार पर इस हमले को किसी देश या सशस्त्र समूह से जोड़ना उचित नहीं होगा। रिपोर्टों में हमले, आग और चालक दल को निकाले जाने की पुष्टि है; जिम्मेदारी, नुकसान की पूरी सीमा और जहाज व चालक दल की दीर्घकालिक स्थिति की नहीं।
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क़ेश्म द्वीप के पास हुए हमले से इसका क्या संबंध है
UKMTO की रिपोर्ट वाली घटना, हेंगाम और क़ेश्म द्वीपों के पास एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले से अलग बताई गई है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि उस हमले में एक चालक दल सदस्य की मौत हुई और चार लोग घायल हुए। तेहरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया, लेकिन यहां उपलब्ध स्वतंत्र रिपोर्टिंग उस आरोप की पुष्टि नहीं करती।
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दोनों घटनाओं की रिपोर्टें संकेत देती हैं कि इनमें अलग-अलग जहाज शामिल थे। इसलिए अज्ञात प्रोजेक्टाइल वाली घटना को क़ेश्म हमले का पुष्ट विवरण नहीं माना जा सकता, और क़ेश्म मामले में लगाया गया आरोप UKMTO वाली घटना की जिम्मेदारी तय नहीं करता।
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वाणिज्यिक जहाजरानी अब भी क्यों बाधित है
ताजा हमला इस जलडमरूमध्य के आसपास बार-बार हमलों और सैन्य टकराव के बाद हुआ है। जोखिम सिर्फ सामान्य नौवहन खतरे तक सीमित नहीं है। रॉयटर्स के अनुसार, 13 सितंबर तक कमोडिटी ले जाने वाले जहाजों का आवागमन घटकर प्रतिदिन एकल अंक में रह गया था। इससे पहले 11 अगस्त को केवल छह जहाजों के गुजरने की सूचना थी, जबकि 10 दिनों का औसत करीब 11 था।
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ऐसे माहौल में सामान्य वाणिज्यिक रूटिंग संभव नहीं मानी जाती। जहाज संचालकों को प्रोजेक्टाइल या ड्रोन हमलों के अलावा सुरक्षित गलियारों की अनिश्चितता, सैन्य गतिविधियों, गलत पहचान की आशंका और घटना के बाद सहायता मिलने की क्षमता पर भी विचार करना पड़ता है।
अमेरिकी समुद्री मार्गदर्शन ने जहाजों को, जहां संभव हो, क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है। वहां संचालित अमेरिकी ध्वज वाले जहाजों को अमेरिकी सैन्य पोतों से कम-से-कम 30 समुद्री मील की दूरी रखने, गठबंधन नौसेनाओं की VHF कॉल का जवाब देने और समुद्री समन्वय अधिकारियों के संपर्क में रहने की सलाह दी गई।
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प्रतिस्पर्धी मार्ग, एस्कॉर्ट और प्रस्तावित प्रतिबंधित क्षेत्र
ईरानी अधिकारियों ने खाड़ी में नया प्रतिबंधित क्षेत्र और जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए एक शिपिंग कॉरिडोर बनाने की योजना बताई थी। रॉयटर्स के अनुसार, प्रस्तावित क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों को ईरानी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
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दूसरी ओर, अमेरिका ने दक्षिणी मार्ग से पारगमन का समर्थन किया है और वाणिज्यिक जहाजों को एस्कॉर्ट भी दिया है। CNN के मुताबिक, 2 सितंबर को अमेरिकी बलों ने 1.8 करोड़ बैरल तेल ले जा रहे 40 वाणिज्यिक जहाजों को जलडमरूमध्य से एस्कॉर्ट किया। अमेरिकी अधिकारियों ने वाणिज्यिक जहाजरानी पर हमला करने की ईरानी क्षमता के खिलाफ जारी प्रयासों का भी उल्लेख किया।
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ये दोनों व्यवस्थाएं मिलकर कोई साझा और भरोसेमंद नौवहन प्रणाली नहीं बनातीं। अगस्त में ईरान और ओमान ने अस्थायी शिपिंग लेन, बारूदी सुरंग हटाने के समन्वय और चरणबद्ध ढांचे पर चर्चा की थी। एक ईरानी अधिकारी ने कहा था कि मार्ग दो से चार महीने तक खुला रह सकता है।
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19 लेकिन बाद की घटनाओं और जारी टकराव ने दिखाया कि बातचीत से वाणिज्यिक आवाजाही अब तक अनुमानित और सुरक्षित नहीं बन सकी है।
BBC के अनुसार, लड़ाई रोकने और जलमार्ग खोलने के उद्देश्य से बताए गए 60-दिवसीय अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन भी जल्दी विफल हो गया।
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तेल की कीमतें क्यों बढ़ीं
तेल बाजारों ने इस आशंका पर प्रतिक्रिया दी कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के साथ-साथ वैकल्पिक निर्यात ढांचा भी बाधित हो सकता है। रॉयटर्स के अनुसार, 13 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 105.68 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 101.39 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
17 अगले दिन ब्रेंट 108 डॉलर के ऊपर और WTI करीब 103 डॉलर के पास पहुंचने की रिपोर्टें आईं, क्योंकि कारोबारियों ने ताजा जहाज हमले और सऊदी अरब की पाइपलाइन बंदी के असर का आकलन किया।
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सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन विशेष रूप से अहम है, क्योंकि यह खाड़ी के तेल निर्यात को हॉर्मुज़ से गुजरे बिना बाहर भेजने का विकल्प देती है। ड्रोन से नुकसान के बाद सऊदी अरब ने इसे बंद कर दिया, हालांकि सरकार ने नुकसान की गंभीरता या बंदी की संभावित अवधि सार्वजनिक नहीं की। विश्लेषक फर्म केप्लर का अनुमान था कि पाइपलाइन एक महीने बंद रहने और यानबू में भंडार घटने की स्थिति में 12 करोड़ बैरल तक जोखिम में पड़ सकते हैं। यह अनुमान है, पुष्टि किया हुआ नुकसान नहीं।
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क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से भी आपूर्ति जोखिम का प्रीमियम बढ़ा। रॉयटर्स ने कहा कि पाइपलाइन पर हमले से वैश्विक तेल आपूर्ति का 4% तक खतरे में पड़ सकता है। हूती गतिविधियों और सऊदी ठिकानों पर हमलों की रिपोर्टों ने यह चिंता भी बढ़ाई कि व्यवधान हॉर्मुज़ से आगे फैल सकता है।
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निष्कर्ष
ताजा घटना ने पुष्टि की कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरना अब भी जोखिमभरा और राजनीतिक रूप से विवादित है। फिलहाल भरोसे से इतना ही कहा जा सकता है: एक जहाज अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया, आग लगी और चालक दल को निकाला गया। UKMTO के विवरण में हमले की जिम्मेदारी स्थापित नहीं हुई है।
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जहाजरानी और ऊर्जा बाजारों के लिए सबसे बड़ा असर अनिश्चितता है। कम यातायात, प्रतिस्पर्धी मार्गों के दावे, सैन्य एस्कॉर्ट, अधूरे या विफल कूटनीतिक प्रयास और सऊदी अरब की अहम वैकल्पिक पाइपलाइन को हुआ नुकसान—इन सभी ने तेल प्रवाह को आगे के व्यवधान के प्रति संवेदनशील बनाया है और कच्चे तेल की कीमतों में जोखिम प्रीमियम बनाए रखा है।
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