रोके जाने के बाद 100 से अधिक अन्य प्रतिभागियों को यूनान के द्वीप क्रीट भेजा गया, जबकि आविला और अबू केशेक को पूछताछ के लिए इज़राइल ले जाया गया और इज़राइली अदालतों से रिमांड बढ़ने के कारण वे हिरासत में रहे। इज़राइल ने दोनों को 10 मई को निर्वासित किया; विदेश मंत्रालय ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर निर्वासित किया गया।
आविला 11 मई को साओ पाउलो लौटे और आरोप लगाया कि करीब 10 दिन की हिरासत के दौरान उन्हें यातना दी गई।
रिहाई के बाद आविला का मुख्य आरोप था कि इज़राइली हिरासत में उन्हें यातना दी गई और उन्होंने फलस्तीनी कैदियों के साथ दुर्व्यवहार देखा। निर्वासन से पहले Dawn ने रिपोर्ट किया था कि आविला और अबू केशेक कथित गंभीर शारीरिक दुर्व्यवहार और गैरकानूनी हिरासत के विरोध में भूख हड़ताल पर थे।
Middle East Eye के अनुसार, अदालाह की वकील लुबना तुमा ने कहा कि दोनों कार्यकर्ताओं ने बताया था कि बाकी फ्लोटिला प्रतिभागियों से अलग किए जाने के बाद उन्हें पीटा गया, आंखों पर पट्टी बांधी गई और मुंह के बल लेटने को मजबूर किया गया।
मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा के लिए ऑब्ज़र्वेटरी—FIDH और OMCT का संयुक्त कार्यक्रम—ने बाद में अदालाह से मिली जानकारी के आधार पर इस मामले को अपहरण, मनमानी हिरासत और दुर्व्यवहार से जुड़ा बताया।
ये आरोप गंभीर हैं, लेकिन फर्क समझना जरूरी है: उपलब्ध स्रोत आरोपों और जांच की मांगों को दर्ज करते हैं; वे हर कथित घटना पर अंतिम, स्वतंत्र निष्कर्ष पेश नहीं करते।
उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग में इज़राइल का रुख मुख्य रूप से पूछताछ, रिमांड और निर्वासन पर केंद्रित रहा। इज़राइली अधिकारियों ने शुरुआत में कहा था कि फ्लोटिला रोके जाने के बाद आविला और अबू केशेक को पूछताछ के लिए इज़राइल ले जाया जा रहा है। इसके बाद इज़राइली अदालतों ने उनकी हिरासत पहले 5 मई और फिर 10 मई तक बढ़ाई।
निर्वासन के बाद इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोनों को रिहा कर निर्वासित कर दिया गया। Reuters-आधारित रिपोर्टों के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा संबंधी संदेह भी उठाए, जिनमें अबू केशेक के किसी आतंकवादी संगठन से संबंध के संदेह का उल्लेख था।
उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग में आविला के रिहाई के बाद लगाए गए खास आरोपों—यातना और फलस्तीनी कैदियों से दुर्व्यवहार देखने—पर इज़राइल का विस्तृत प्रतिवाद शामिल नहीं है। यही वजह है कि निर्वासन के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुआ।
ब्राज़ील और स्पेन ने शुरुआती चरण में ही आपत्ति जताई। AP ने रिपोर्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में कार्यकर्ताओं को पकड़े जाने के बाद दोनों सरकारों ने इज़राइल पर अपने नागरिकों की “किडनैपिंग” का आरोप लगाया। Reuters-आधारित कवरेज में बाद में कहा गया कि दोनों सरकारों ने हिरासत को गैरकानूनी माना।
संयुक्त राष्ट्र ने इज़राइल से आविला और अबू केशेक को तुरंत रिहा करने को कहा और उन “चिंताजनक विवरणों” की जांच की मांग की जिनमें दोनों के साथ गंभीर दुर्व्यवहार का आरोप था। ICJP ने भी उनकी तत्काल रिहाई की मांग की और यूनान के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हिरासत को गैरकानूनी बताया।
मानवाधिकार समूहों की आलोचना मुख्य रूप से अधिकार-क्षेत्र और हिरासत में कथित व्यवहार पर केंद्रित रही। Dawn के अनुसार, अदालाह ने रिमांड कार्यवाही के दौरान इज़राइली अधिकार-क्षेत्र को चुनौती दी। OMCT और FIDH की ऑब्ज़र्वेटरी ने कहा कि उसे अदालाह से दोनों कार्यकर्ताओं के अपहरण, मनमानी हिरासत और दुर्व्यवहार की जानकारी मिली।
हिरासत का तात्कालिक सवाल सुलझ चुका है: आविला और अबू केशेक को इज़राइल से निर्वासित कर दिया गया। लेकिन बड़े सवाल अब भी उपलब्ध रिकॉर्ड में अनसुलझे हैं: फ्लोटिला को रोकना और दोनों को इज़राइल ले जाना कानूनी था या नहीं; आविला के यातना और कैदियों से दुर्व्यवहार देखने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि हो सकती है या नहीं; और क्या कोई सार्वजनिक जांच आविला, वकीलों, संयुक्त राष्ट्र और अधिकार समूहों की ओर से उठाए गए दुर्व्यवहार के दावों की जांच करेगी।
फिलहाल सबसे साफ पुष्टि किया जा सकने वाला परिणाम निर्वासन है। जवाबदेही का असली सवाल अभी खुला है।
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