वीडियो के वायरल होते ही कई देशों और संगठनों ने कहा कि हिरासत में लिए गए नागरिकों को इस तरह सार्वजनिक रूप से दिखाना उनकी गरिमा के खिलाफ है।
तुर्किये, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर वीडियो और उसमें दिखाए गए व्यवहार की कड़ी निंदा की।
इन देशों ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों को सार्वजनिक रूप से इस तरह दिखाना और उनका मज़ाक उड़ाना "मानव गरिमा पर हमला" है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून तथा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के दायित्वों के विपरीत है।
उनके अनुसार, जब लोग पहले ही हिरासत में हों, तब उनके साथ अपमानजनक व्यवहार या सार्वजनिक प्रदर्शन स्वीकार्य नहीं है।
वीडियो के फैलने के बाद इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी बेन्‑गवीर की आलोचना की।
नेतन्याहू ने कहा कि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के साथ जिस तरह व्यवहार दिखाया गया, वह "इज़राइल के मूल्यों और मानकों के अनुरूप नहीं" है।
हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल को गाज़ा पर लगाए गए अपने नौसैनिक नाकेबंदी को लागू करने और उसे तोड़ने की कोशिश करने वाले जहाज़ों को रोकने का अधिकार है।
चूँकि बेन्‑गवीर नेतन्याहू की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का हिस्सा हैं, इसलिए प्रधानमंत्री की यह सार्वजनिक फटकार इज़राइल की राजनीति में असामान्य मानी गई।
वीडियो सामने आने के बाद कई यूरोपीय देशों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
फ्रांस ने इसे "अस्वीकार्य" बताया और पेरिस में इज़राइल के राजदूत को तलब किया। साथ ही फ्रांसीसी नागरिकों को रिहा करने की मांग भी की।
इटली के विदेश मंत्री एंतोनियो ताजानी ने कहा कि यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों को बेन्‑गवीर के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों पर चर्चा करनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ "उत्पीड़न और अपमान" जैसा व्यवहार किया।
ब्रिटेन ने भी वीडियो की आलोचना करते हुए कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए।
जिस काफिले को रोका गया वह "ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला" (Global Sumud Flotilla) नामक अभियान का हिस्सा था। यह कई जहाज़ों का समूह था जो तुर्किये से रवाना हुआ था। इसका उद्देश्य गाज़ा तक मानवीय सहायता पहुँचाना और इज़राइल की नौसैनिक नाकेबंदी को चुनौती देना था।
इज़राइल ने जहाज़ों को गाज़ा की ओर बढ़ने से पहले चेतावनी दी और बाद में पूर्वी भूमध्य सागर में उन्हें रोक लिया।
इज़राइली अधिकारियों के अनुसार, फ्लोटिला से लगभग 430 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और उन्हें अशदोद बंदरगाह पर लाकर प्रक्रिया पूरी की गई।
अंतरराष्ट्रीय आलोचना बढ़ने के बाद इज़राइल ने कहा कि सभी विदेशी कार्यकर्ताओं को प्रक्रिया के बाद देश से निर्वासित कर दिया गया।
यह घटना दिखाती है कि किसी एक वीडियो क्लिप से भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विवाद तेज़ी से भड़क सकता है—खासतौर पर तब, जब मामला गाज़ा, मानवीय सहायता और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़ा हो।
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