इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन्‑गवीर ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें गाज़ा फ्लोटिला के हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता घुटनों के बल बैठे और हाथ बंधे हुए दिखाई दिए। तुर्किये, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब और यूएई सहित आठ मुस्लिम‑बहुल देशों ने इसे अपमानजनक और अंतरराष्ट्रीय मानकों का...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Ben‑Gvir’s Gaza Flotilla Video: What Happened, Why Countries Condemned It, and How Israel Responded. Article summary: A video posted by Israeli National Security Minister Itamar Ben‑Gvir showed Gaza flotilla activists kneeling with their hands bound after Israel intercepted their aid convoy; the footage sparked international condemna.... Topic tags: israel, gaza, middle east, humanitarian aid, international law. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Israel’s Ben Gvir shown taunting flotilla activists arrested with some held in stress position at port of Ashdod. Video showing Israel’s far-right National Security Minister Itamar" source context "Video showing far-right Israeli minister taunting Gaza flotilla activists sparks global outcry | CNN" Reference image 2: visual sub
मई 2026 में इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन्‑गवीर द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी। वीडियो में गाज़ा की ओर जा रहे सहायता काफिले के कार्यकर्ताओं को हिरासत में घुटनों के बल बैठे और हाथ पीछे बंधे हुए दिखाया गया था। कई सरकारों और मानवाधिकार संगठनों ने इसे अपमानजनक और अनुचित व्यवहार बताया।
वीडियो इज़राइल के दक्षिणी बंदरगाह शहर अशदोद (Ashdod) में रिकॉर्ड किया गया था, जहाँ गाज़ा की ओर जा रहे जहाज़ों को रोकने के बाद कार्यकर्ताओं को लाया गया था। फुटेज में कई कार्यकर्ता ज़मीन पर घुटनों के बल बैठे दिखाई देते हैं और उनके हाथ पीछे बंधे हुए हैं। बेन्‑गवीर वीडियो में इज़राइली झंडा लहराते हुए उन्हें ताना मारते भी दिखाई देते हैं।
यह समूह उस समय हिरासत में था जब इज़राइली नौसेना ने समुद्र में उनके जहाज़ों को रोककर उन्हें इज़राइल ले आया था।
वीडियो के वायरल होते ही कई देशों और संगठनों ने कहा कि हिरासत में लिए गए नागरिकों को इस तरह सार्वजनिक रूप से दिखाना उनकी गरिमा के खिलाफ है।
तुर्किये, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर वीडियो और उसमें दिखाए गए व्यवहार की कड़ी निंदा की।
इन देशों ने कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों को सार्वजनिक रूप से इस तरह दिखाना और उनका मज़ाक उड़ाना "मानव गरिमा पर हमला" है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून तथा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के दायित्वों के विपरीत है।
उनके अनुसार, जब लोग पहले ही हिरासत में हों, तब उनके साथ अपमानजनक व्यवहार या सार्वजनिक प्रदर्शन स्वीकार्य नहीं है।
वीडियो के फैलने के बाद इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी बेन्‑गवीर की आलोचना की।
नेतन्याहू ने कहा कि हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के साथ जिस तरह व्यवहार दिखाया गया, वह "इज़राइल के मूल्यों और मानकों के अनुरूप नहीं" है।
हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि इज़राइल को गाज़ा पर लगाए गए अपने नौसैनिक नाकेबंदी को लागू करने और उसे तोड़ने की कोशिश करने वाले जहाज़ों को रोकने का अधिकार है।
चूँकि बेन्‑गवीर नेतन्याहू की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का हिस्सा हैं, इसलिए प्रधानमंत्री की यह सार्वजनिक फटकार इज़राइल की राजनीति में असामान्य मानी गई।
वीडियो सामने आने के बाद कई यूरोपीय देशों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
फ्रांस ने इसे "अस्वीकार्य" बताया और पेरिस में इज़राइल के राजदूत को तलब किया। साथ ही फ्रांसीसी नागरिकों को रिहा करने की मांग भी की।
स्पेन ने भी मैड्रिड में इज़राइल के प्रतिनिधि को तलब किया और तस्वीरों को अपमानजनक बताया।
इटली के विदेश मंत्री एंतोनियो ताजानी ने कहा कि यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों को बेन्‑गवीर के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों पर चर्चा करनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ "उत्पीड़न और अपमान" जैसा व्यवहार किया।
ब्रिटेन ने भी वीडियो की आलोचना करते हुए कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों के साथ सम्मान और गरिमा के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए।
जिस काफिले को रोका गया वह "ग्लोबल सुमूद फ्लोटिला" (Global Sumud Flotilla) नामक अभियान का हिस्सा था। यह कई जहाज़ों का समूह था जो तुर्किये से रवाना हुआ था। इसका उद्देश्य गाज़ा तक मानवीय सहायता पहुँचाना और इज़राइल की नौसैनिक नाकेबंदी को चुनौती देना था।
इस फ्लोटिला में दर्जनों देशों के कार्यकर्ता, मानवाधिकार समर्थक और स्वयंसेवक शामिल थे।
इज़राइल ने जहाज़ों को गाज़ा की ओर बढ़ने से पहले चेतावनी दी और बाद में पूर्वी भूमध्य सागर में उन्हें रोक लिया।
इज़राइली अधिकारियों के अनुसार, फ्लोटिला से लगभग 430 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और उन्हें अशदोद बंदरगाह पर लाकर प्रक्रिया पूरी की गई।
अंतरराष्ट्रीय आलोचना बढ़ने के बाद इज़राइल ने कहा कि सभी विदेशी कार्यकर्ताओं को प्रक्रिया के बाद देश से निर्वासित कर दिया गया।
यह घटना दिखाती है कि किसी एक वीडियो क्लिप से भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विवाद तेज़ी से भड़क सकता है—खासतौर पर तब, जब मामला गाज़ा, मानवीय सहायता और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़ा हो।
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इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन्‑गवीर ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें गाज़ा फ्लोटिला के हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता घुटनों के बल बैठे और हाथ बंधे हुए दिखाई दिए।
इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन्‑गवीर ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें गाज़ा फ्लोटिला के हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता घुटनों के बल बैठे और हाथ बंधे हुए दिखाई दिए। तुर्किये, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब और यूएई सहित आठ मुस्लिम‑बहुल देशों ने इसे अपमानजनक और अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन बताया।
करीब 430 कार्यकर्ताओं को समुद्र में रोके जाने के बाद इज़राइल लाया गया और बाद में विदेशी कार्यकर्ताओं को देश से निर्वासित कर दिया गया।