इसी ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरानी बलों पर गोली चलाई और नागरिक जहाजों को निशाना बना रहीं छह ईरानी छोटी नौकाओं को डुबो दिया । अल-मॉनिटर में प्रकाशित Reuters रिपोर्ट के अनुसार, फंसे टैंकरों की एस्कॉर्टिंग के लिए नौसेना भेजे जाने के बाद अमेरिकी बलों ने ईरानी छोटी नौकाओं, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन को भी नष्ट किया
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उधर, UAE ने कहा कि अप्रैल की शुरुआत में नाजुक सीजफायर लागू होने के बाद पहली बार ईरान ने उस पर हमला किया । 5 मई को अमेरिकी सैन्य नेताओं ने कहा कि सीजफायर अभी भी प्रभावी है, जबकि UAE ने उसी समय एक और ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमले की सूचना दी
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हॉर्मुज की लड़ाई का केंद्र यह है कि क्या अमेरिकी सुरक्षा में व्यावसायिक जहाज इस रास्ते से गुजर सकते हैं, या ईरान इस समुद्री मार्ग को लगातार दबाव में रख सकता है।
रिपोर्टों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा के लिए अत्यंत अहम जलमार्ग बताया गया है; इसलिए वहां सीमित सैन्य टकराव भी केवल समुद्र में हुई मुठभेड़ तक सीमित नहीं रहता । अमेरिका का ऑपरेशन यह दिखाने की कोशिश था कि जहाज गुजर सकते हैं; वहीं ईरान की बाधा डालने की क्षमता इस रास्ते को विवादित और असुरक्षित दिखाने का साधन बनती है
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Institute for the Study of War यानी ISW के आकलन के मुताबिक, ईरान अमेरिका के उन प्रयासों के जवाब में हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना ‘नियंत्रण’ दिखाना चाहता था, जिनका उद्देश्य व्यावसायिक नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना था । ISW ने कहा कि ईरान ने व्यावसायिक जहाजों, UAE में तेल अवसंरचना और ओमान में एक नागरिक इमारत पर हमलों के जरिए अमेरिकी प्रयासों को बाधित करने की कोशिश की
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यानी यह केवल सैन्य टकराव नहीं, बल्कि दबाव और भरोसे की लड़ाई भी है। अगर एस्कॉर्ट किए गए जहाज हॉर्मुज से गुजरते हैं, तो वॉशिंगटन कह सकता है कि रास्ता खुल रहा है। अगर ईरान जहाजों, ऊर्जा ढांचे या क्षेत्रीय साझेदारों को खतरे में दिखा सकता है, तो वह यह संदेश दे सकता है कि रास्ता अब भी उसकी चुनौती के दायरे में है।
जमीन—या कहें समुद्र—पर जितना तनाव है, उतना ही संघर्ष सार्वजनिक दावों में भी दिखता है। अमेरिकी सेना ने कहा कि दो अमेरिकी-ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज हॉर्मुज से गुजर गए, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इससे इनकार किया कि कोई व्यावसायिक जहाज जलडमरूमध्य पार कर पाया ।
दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने ईरान के उस दावे को भी खारिज किया कि उसने जलडमरूमध्य के दक्षिण-पूर्व में अमेरिकी नौसेना के जहाज पर हमला किया था । ये दावे इसलिए अहम हैं क्योंकि जहाजों का गुजरना ही रणनीतिक संदेश बन गया है: अमेरिका को यह दिखाना है कि रास्ता खुल सकता है, जबकि ईरान के लिए इस दावे को चुनौती देना दबाव बनाए रखने का तरीका है।
UAE की भूमिका इस संकट को सिर्फ अमेरिका-ईरान समुद्री झड़प से बड़ा बना देती है। UAE अमेरिका का प्रमुख सहयोगी है, और उसने कहा कि सीजफायर लागू होने के बाद पहली बार ईरान ने उस पर हमला किया । बाद में UAE ने एक और ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमले की सूचना दी
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एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी ड्रोन ने फुजैरा में एक तेल सुविधा में आग लगा दी; फुजैरा को हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करने वाले मार्ग से जुड़ा एक प्रमुख पाइपलाइन हब बताया गया । इसका मतलब यह है कि टकराव केवल जलडमरूमध्य के भीतर जहाजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उस ढांचे तक भी पहुंचा जो हॉर्मुज पर निर्भरता घटाने के लिए अहम माना जाता है
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उपलब्ध रिपोर्टिंग के आधार पर जवाब है: औपचारिक रूप से नहीं। 5 मई को अमेरिकी सैन्य नेताओं ने कहा कि हॉर्मुज और UAE पर हमलों के बावजूद सीजफायर अभी भी लागू है ।
लेकिन यह भी साफ है कि युद्धविराम बेहद दबाव में है। अल-मॉनिटर में प्रकाशित Reuters रिपोर्ट ने कहा कि अमेरिका और ईरान हॉर्मुज पर नियंत्रण के लिए जूझ रहे हैं और नाजुक युद्धविराम खतरे में है; वहीं AFP रिपोर्टिंग में कहा गया कि दोनों देशों की फायरिंग और UAE की हमले संबंधी रिपोर्टों के बीच सीजफायर डगमगा रहा था ।
व्यावहारिक निष्कर्ष यही है: सीजफायर तकनीकी रूप से जिंदा है, लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद कमजोर। युद्धविराम कभी-कभी अलग-थलग घटनाओं के बावजूद बच सकता है, अगर दोनों पक्ष आगे बढ़कर जवाबी कार्रवाई से बचें। लेकिन जब सीधे अमेरिका-ईरान टकराव, जहाजों के गुजरने पर विरोधी दावे, और अमेरिका-समर्थित खाड़ी देश पर हमलों की रिपोर्ट साथ आ जाएं, तो उसे टिकाए रखना कहीं मुश्किल हो जाता है।
सबसे पहला संकेत यह होगा कि क्या एस्कॉर्ट किए गए व्यावसायिक जहाज हॉर्मुज से बिना नई गोलीबारी के गुजरते रहते हैं। अमेरिका का कहना है कि दो अमेरिकी-ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाज गुजर चुके हैं, जबकि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि कोई व्यावसायिक जहाज जलडमरूमध्य पार नहीं कर पाया ।
दूसरा संकेत UAE से आने वाली रिपोर्टें होंगी—खासकर अगर उनमें फिर ड्रोन, मिसाइल, तेल सुविधाओं या फुजैरा जैसे ऊर्जा ढांचे का जिक्र हो । संकट जितना जलडमरूमध्य से निकलकर खाड़ी की ऊर्जा अवसंरचना और अमेरिका-समर्थित साझेदारों तक फैलता है, सीजफायर को सिर्फ ‘तकनीकी रूप से लागू’ कहना उतना ही अधूरा लगने लगता है।
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