सबसे ज्यादा नुकसान शहर के प्रिमोर्स्की (Prymorskyi) जिले में हुआ, जहाँ एक ऊँची अपार्टमेंट इमारत और पाँच मंज़िला रिहायशी बिल्डिंग में आग लग गई। राहत और बचाव दल रात भर आग बुझाने और मलबे की जाँच करने में लगे रहे।
इससे कुछ दिन पहले 27 अप्रैल को भी ओडेसा पर एक और ड्रोन हमला हुआ था, जिसमें 14 लोग घायल हुए थे—इनमें दो बच्चे शामिल थे—और उसी इलाके में कई रिहायशी इमारतों को नुकसान पहुंचा था।
यूक्रेन का प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक केंद्र ड्निप्रो भी इसी अवधि में कई हमलों का निशाना बना।
23 अप्रैल को एक रूसी ड्रोन हमले ने शहर के एक रिहायशी इलाके को प्रभावित किया। इस हमले में 13‑मंज़िला अपार्टमेंट इमारत का हिस्सा नष्ट हो गया। घटना में तीन लोगों की मौत और 10 लोग घायल हुए, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे। आसपास की एक दुकान, कुछ वाहन और एक प्रशासनिक इमारत भी क्षतिग्रस्त हुई।
इसके बाद 25 अप्रैल को ड्निप्रो पर और भी बड़ा हमला हुआ। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार ड्रोन और मिसाइलों की लहरें 12 से 20 घंटे तक शहर को निशाना बनाती रहीं।
बाद में जारी आँकड़ों के अनुसार इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई और लगभग 56 लोग घायल हुए। बचाव दल ने कई घंटों तक मलबे में फँसे लोगों की तलाश की, जबकि कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई।
इन हमलों में ऊँची रिहायशी इमारतें, घर, कारें और औद्योगिक सुविधाएँ भी क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे शहर के कई हिस्सों में व्यापक नुकसान हुआ।
ओडेसा और ड्निप्रो पर हुए हमले यूक्रेन युद्ध में उभरती एक बड़ी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं—लंबी दूरी से बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले।
उदाहरण के लिए, अप्रैल में हुए एक बड़े हमले में रूस ने सैकड़ों ड्रोन और दर्जनों मिसाइलें दागीं, जिनमें ड्निप्रो प्रमुख लक्ष्य था।
हाल के महीनों में यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि कुछ दिनों में रूस ने ड्रोन की लहरों में सैकड़ों हमले किए—कभी‑कभी एक ही अवधि में 800 से अधिक ड्रोन लॉन्च किए गए। इस रणनीति का उद्देश्य यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली को दबाव में लाना बताया जाता है।
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, ड्रोन झुंड (drone swarms) और मिसाइलों का संयुक्त उपयोग युद्ध के इस चरण की एक प्रमुख विशेषता बन गया है। इससे अग्रिम मोर्चे से दूर स्थित शहरों और बुनियादी ढांचे को भी बार‑बार निशाना बनाया जा सकता है।
अप्रैल के अंत में हुए इन हमलों के बाद दोनों शहरों के कई इलाकों में नुकसान हुआ और बड़ी संख्या में नागरिक घायल हुए। रात भर चलने वाले हमलों के बाद अग्निशमन और बचाव दल को जली हुई इमारतों, ढही संरचनाओं और मलबे में फँसे लोगों को निकालने के लिए लंबा अभियान चलाना पड़ा।
जैसे‑जैसे रूस और यूक्रेन दोनों लंबी दूरी की ड्रोन क्षमताओं का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, ओडेसा और ड्निप्रो जैसे बड़े शहरों पर ऐसे हमले अधिक बार और कई घंटों तक चलने वाली लहरों में देखे जा रहे हैं।
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