फ्रांस की राष्ट्रीय रक्त सेवा, एताब्लिस्मां फ़्रांसे दु सों (EFS), के तीन केंद्रों पर 2 नवंबर को साइबर हमले के दौरान रेफ्रिजरेशन नियंत्रण बदले गए। इन ठंडे कमरों में प्लाज़्मा और रक्त के नमूने रखे जाते थे। निगरानी प्रणालियों और कर्मचारियों की समय रहते कार्रवाई से नुकसान टल गया। EFS ने बताया कि कोई रक्त उत्पाद या नमूना खराब नहीं हुआ।
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खबरों में आया 110°C, तापमान नियंत्रण की बदली हुई लक्ष्य-सेटिंग थी—इसका यह मतलब नहीं कि प्लाज़्मा या भंडारण कक्ष सचमुच उस तापमान तक पहुंच गए थे। उपलब्ध रिपोर्टिंग यह स्पष्ट नहीं करती कि उपकरणों का वास्तविक तापमान कितना बढ़ा था।
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रेफ्रिजरेशन नियंत्रणों में क्या बदला गया
EFS के मुताबिक, उसके तीन ठंडे भंडारण केंद्रों पर तापमान और डीफ्रॉस्ट की सीमाएं “बेहद ऊंचे स्तर” पर कर दी गई थीं। फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया कि सामान्य तौर पर लगभग −30°C पर रखे जाने वाले सिस्टम की लक्ष्य-सेटिंग 110°C कर दी गई थी।
1 इन कमरों में ट्रांसफ्यूजन के लिए रखा प्लाज़्मा और रक्त के नमूने मौजूद थे।
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हमले की पहुंच उन प्रणालियों तक हुई जिनसे EFS के लिए लगे रेफ्रिजरेशन उपकरणों की निगरानी और नियंत्रण किया जाता था। EFS ने कहा कि उसे सीधे निशाना नहीं बनाया गया था; मामला रेफ्रिजरेशन उपकरणों के एक आपूर्तिकर्ता से जुड़ा था।
4 यानी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने वेंडर से जुड़े उपकरणों और नियंत्रण प्रणालियों के रास्ते असर डाला—EFS के मुख्य सिस्टम पर सीधे हमला होने की बात नहीं कही गई।
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अलार्म और कर्मचारियों की कार्रवाई से कैसे टला नुकसान
EFS के मुताबिक, निगरानी और अलार्म प्रणालियों ने असामान्य सेटिंग का पता लगा लिया। इससे कर्मचारियों को रक्त उत्पादों या नमूनों के खराब होने से पहले कदम उठाने का मौका मिला।
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4 रिपोर्टों के अनुसार, रात की ड्यूटी पर मौजूद एक तकनीशियन ने तापमान बढ़ता देखा और आपातकालीन टीमों ने कार्रवाई की।
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EFS ने बताया कि कोई रक्त उत्पाद या नमूना प्रभावित नहीं हुआ और स्वास्थ्य पर किसी असर की जानकारी नहीं मिली।
1 एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पतालों को आपूर्ति या रक्त चढ़ाने की सेवाओं पर भी असर नहीं पड़ा।
3 हालांकि, उपलब्ध स्रोतों से यह स्पष्ट नहीं होता कि रक्त संग्रह और वितरण की प्रक्रिया हर जगह बिना किसी रुकावट के जारी रही या नहीं।
Coolworld ने क्या कहा, और क्या अब भी साफ नहीं है
रेफ्रिजरेशन उपकरणों की आपूर्ति करने वाली कंपनी Coolworld ने कहा कि उसे घटना की जानकारी है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने कहा कि मीडिया में जिस कमजोरी की चर्चा है, वह किसी तीसरे पक्ष के आपूर्तिकर्ता के एक घटक से जुड़ी थी और Coolworld के सीधे नियंत्रण से बाहर थी।
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EFS ने तीन प्रभावित केंद्रों की पहचान की है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह पता नहीं चलता कि रेफ्रिजरेशन की कुल कितनी इकाइयां प्रभावित हुईं।
1 हमले का सटीक तरीका, उसका पूरा तकनीकी दायरा और सभी प्रभावित उपकरण कब दोबारा चालू हुए—इन बातों की पुष्टि के लिए भी स्रोतों में पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसलिए यह अलग-अलग समझना जरूरी है कि कौन-सा असर पुष्ट है और किन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।
यूरोप में रेफ्रिजरेशन प्रणालियों पर हमलों की व्यापक कड़ी
ब्लड स्टोरेज केंद्रों पर हमला ऐसे समय हुआ जब यूरोप में व्यावसायिक रेफ्रिजरेशन प्रणालियों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आ रही थीं। यूरोपीय आयोग और यूरोपीय संघ की साइबर सुरक्षा एजेंसी ENISA ने कहा कि 11 अक्टूबर से यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों में व्यावसायिक रेफ्रिजरेशन प्रणालियां और उनसे मिलते-जुलते उपकरण साइबर सुरक्षा घटनाओं से प्रभावित हुए हैं। 1–2 नवंबर को एक नई लहर सामने आई।
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नवंबर की उस लहर के दौरान सुपरमार्केट के रेफ्रिजरेशन सिस्टम की घटनाओं के बाद तापमान बढ़ने से कुछ दुकानदारों को खाद्य सामग्री फेंकनी पड़ी।
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34 लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग यह साबित नहीं करती कि EFS की घटना और सुपरमार्केट पर हुए हमले एक ही हमलावर ने किए थे या वे किसी एक समन्वित अभियान का हिस्सा थे। सुपरमार्केट की घटनाओं पर एक रिपोर्ट में कहा गया कि यह साफ नहीं था कि हमले आपस में जुड़े थे या अलग-अलग निशाने चुने गए थे।
36 उद्धृत सामग्री में EFS पर हमले की जिम्मेदारी भी तय नहीं की गई है।
EFS की घटना दिखाती है कि साइबर जोखिम तीसरे पक्ष के उपकरणों और सेवाओं के जरिए भौतिक प्रणालियों तक पहुंच सकता है। इस मामले में रेफ्रिजरेशन नियंत्रणों में बदलाव से चिकित्सा उपयोग के लिए रखे उत्पाद जोखिम में आए, हालांकि अलार्म और कर्मचारियों की कार्रवाई के चलते किसी उत्पाद के नुकसान की खबर नहीं आई।
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