सऊदी अधिकारियों ने तत्काल हमले या कथित नुकसान की पुष्टि नहीं की। क्षेत्रीय रिपोर्टों में उद्धृत अलग-अलग सूत्रों ने कहा कि निशाना बना जहाज एक साल से अधिक समय से रखरखाव के कारण सेवा से बाहर हो सकता था और संभवतः खाली था। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह अनिश्चितता महत्वपूर्ण है। यदि जहाज सक्रिय था और बाद में बड़े नुकसान या सैनिकों के हताहत होने की पुष्टि होती है, तो यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के पास सऊदी सैन्य गतिविधियों के खिलाफ हूतियों की सीधी चुनौती का ज्यादा गंभीर संकेत होगा। यदि जहाज निष्क्रिय या खाली था, तब भी यह घटना सऊदी-सम्बद्ध सैन्य गतिविधियों को निशाना बनाने और दबाव बनाने के लिए हमले का इस्तेमाल करने की हूती क्षमता दिखाएगी।
यह दावा 20 जुलाई को हूतियों की ओर से सऊदी अरब के खिलाफ घोषित समुद्री नाकाबंदी के बाद आया। समूह ने इसे यमन के हूती-नियंत्रित इलाकों में बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर सऊदी प्रतिबंधों का जवाब बताया। हूती अधिकारियों ने इसे “नाकाबंदी के बदले नाकाबंदी” का नाम दिया।
इसके बाद समूह ने सऊदी-सम्बद्ध तेल टैंकरों पर मिसाइल हमलों का दावा किया। इनमें NCC GHAZAL भी शामिल था, जिसके बारे में हूतियों ने कहा कि समुद्री प्रतिबंध का उल्लंघन करने के बाद उसे पीछे हटना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में भी जुलाई के दौरान सऊदी-सम्बद्ध टैंकरों Encelia और Layla पर हमलों के हूती दावों का उल्लेख है।
अभियान केवल जहाजों तक सीमित नहीं रहा। 9 अगस्त को हूतियों ने कहा कि ड्रोन के जरिए सऊदी अरामको की जाज़ान रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि की कि प्रतिष्ठान में आग लगी थी, जिसे बाद में बुझा दिया गया और किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से आग का कारण या नुकसान की पूरी सीमा स्पष्ट नहीं की।
बाब अल-मंदेब के पास स्थित, सरकार के नियंत्रण वाले यमनी बंदरगाह मोचा पर भी हूती मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं। बंदरगाह के निदेशक के अनुसार, कई दिनों में वहां 25 से अधिक मिसाइलें गिरीं, जिसके बाद वाणिज्यिक और समुद्री गतिविधियां रोकनी पड़ीं। उन्होंने सात लोगों की मौत और करीब 16 मिलियन डॉलर के नुकसान की जानकारी दी।
यमनी सेना ने अलग से कहा कि मोचा और आसपास के ढांचे पर हुए हमले में सात लोग मारे गए और 30 घायल हुए। अन्य रिपोर्टों में बंदरगाह और सरकार के नियंत्रण वाले आसपास के इलाकों पर बार-बार हमलों का जिक्र है। इससे साफ होता है कि यह संकट केवल सऊदी-हूती समुद्री टकराव नहीं, बल्कि यमन के अंदर तेज हो रहे संघर्ष का भी हिस्सा है।
व्यावसायिक जहाजों पर हमलों में भी लोगों की जान गई है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने कहा कि मोचा के दक्षिण में मिस्र के स्वामित्व वाले Tihamah जहाज पर हूती हमले में छह लोग मारे गए और 10 घायल हुए। शुरुआती रिपोर्टों में चालक दल के चार सदस्यों की मौत बताई गई थी, जो लगातार बदलते और परस्पर विरोधी आंकड़ों को दिखाता है।
सऊदी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि हूती दक्षिण से और इराकी मिलिशिया उत्तर से हमलों का समन्वय कर सकते हैं। उनके अनुसार, यह गतिविधि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की निगरानी में हो सकती है। रॉयटर्स ने इसे सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी का आकलन बताया, जो सऊदी, अमेरिकी और अन्य क्षेत्रीय देशों से मिली खुफिया जानकारी पर आधारित था। यह इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है कि ईरान ने इन खास हमलों का निर्देश दिया, या संबंधित हथियार, लक्ष्य संबंधी जानकारी अथवा कमांडर उपलब्ध कराए।
कुछ रिपोर्टों में IRGC कमांडरों, खुफिया सहयोग और इराकी मिलिशिया के साथ समन्वय के बारे में अधिक विस्तृत आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध सामग्री के आधार पर इन दावों को आरोपों से आगे बढ़कर स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। फिलहाल सबसे स्पष्ट रूप से सामने आया घटनाक्रम यह है कि सऊदी अरब व्यापक सुरक्षा चुनौती की तैयारी कर रहा है और हूती सऊदी-सम्बद्ध ठिकानों पर हमलों का दावा जारी रखे हुए हैं।
रियाद ने जवाब में सुरक्षा साझेदारियां मजबूत की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त में सऊदी अरब ने तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता किया। इसके अलावा, उसने लाल सागर और अदन की खाड़ी के लिए बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पहल पर काम किया। जुलाई के अंत में 14 देशों ने एक संस्थापक बयान पर हस्ताक्षर किए, हालांकि गठबंधन की वास्तविक संचालन भूमिका और हर सदस्य की प्रतिबद्धताएं अभी स्पष्ट नहीं हैं।
सऊदी अरब ने लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश भी की है। राजनयिक प्रयासों के दौरान क्षेत्रीय सरकारों से बातचीत की खबरें आईं, लेकिन प्रस्तावित गठबंधन की संरचना और अंतिम सदस्यता पर चर्चा जारी थी।
नए हमलों ने 2022 के बाद से बनी यमन की नाजुक तनाव-नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर दबाव डाला है। बीबीसी के आकलन के अनुसार, संघर्षविराम के दौर में दिखा संयम कमजोर पड़ता नजर आया और सऊदी जहाजों पर हमलों ने व्यापक युद्ध की आशंका बढ़ा दी। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने कहा कि 2023 से हूती और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेनाओं के बीच लड़ाई अपेक्षाकृत सीमित रही थी, लेकिन मौजूदा तनाव सऊदी नौसैनिक और जमीनी कार्रवाई की संभावित तैयारियों की खबरों के बाद बढ़ा है।
यदि सऊदी युद्धपोत पर हमले, बड़े सैन्य नुकसान या तेल ढांचे को गंभीर क्षति की पुष्टि होती है, तो सऊदी अरब भारी हवाई हमले या बड़े यमनी जमीनी अभियान का विकल्प चुन सकता है। इससे ईरान-समर्थित इराकी समूह भी संघर्ष में खिंच सकते हैं और स्थानीय टकराव व्यापक क्षेत्रीय संकट बन सकता है। दूसरी ओर, बड़ा समुद्री गठबंधन हमलों को रोकने में मदद कर सकता है, लेकिन युद्धपोतों, गश्ती नौकाओं और वाणिज्यिक जहाजों के बीच गलत आकलन की संभावनाएं भी बढ़ा सकता है।
बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यह स्वेज नहर के जरिए यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री मार्ग का दक्षिणी प्रवेशद्वार है। अभी तक इस जलडमरूमध्य के पूरी तरह बंद होने की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन हमले, जहाजों को दी गई चेतावनियां, बंदरगाहों का बंद होना और नौसैनिक निगरानी या रोकथाम की आशंका बीमा और सुरक्षा लागत बढ़ा सकती है। इससे यात्राओं में देरी हो सकती है और जहाजों को केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते पर भेजना पड़ सकता है।
इसीलिए मोचा बंदरगाह का ठप होना यमन की सीमाओं से बाहर भी मायने रखता है। बंदरगाह बंद होने से स्थानीय कारोबार सीधे प्रभावित होता है, जबकि जलडमरूमध्य के पास लगातार हमले यूरोप-एशिया के पूरे समुद्री मार्ग पर कंपनियों के कारोबारी फैसले बदल सकते हैं—भले ही सभी जहाजों के लिए औपचारिक नाकाबंदी लागू न हो।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सऊदी अरब 17 अगस्त के जहाज हमले की पुष्टि करता है, क्या जहाज की वास्तविक स्थिति पर स्वतंत्र सबूत सामने आते हैं और क्या नया समुद्री गठबंधन खुले तौर पर जहाजों को सुरक्षा-एस्कॉर्ट देना या उन्हें रोकना शुरू करता है।
इन घटनाओं से यह समझने में मदद मिलेगी कि हूतियों का अभियान मुख्य रूप से दबाव और राजनीतिक संदेश देने तक सीमित है या वह व्यापक लाल सागर युद्ध पैदा करने में सक्षम लंबे सैन्य अभियान में बदल रहा है। फिलहाल उपलब्ध साक्ष्य एक बात स्पष्ट करते हैं: टकराव तेज हो रहा है, लेकिन उसके सबसे महत्वपूर्ण दावों में से कुछ की पुष्टि अभी बाकी है।
सऊदी अधिकारियों ने तत्काल हमले या कथित नुकसान की पुष्टि नहीं की। क्षेत्रीय रिपोर्टों में उद्धृत अलग-अलग सूत्रों ने कहा कि निशाना बना जहाज एक साल से अधिक समय से रखरखाव के कारण सेवा से बाहर हो सकता था और संभवतः खाली था। इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह अनिश्चितता महत्वपूर्ण है। यदि जहाज सक्रिय था और बाद में बड़े नुकसान या सैनिकों के हताहत होने की पुष्टि होती है, तो यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के पास सऊदी सैन्य गतिविधियों के खिलाफ हूतियों की सीधी चुनौती का ज्यादा गंभीर संकेत होगा। यदि जहाज निष्क्रिय या खाली था, तब भी यह घटना सऊदी-सम्बद्ध सैन्य गतिविधियों को निशाना बनाने और दबाव बनाने के लिए हमले का इस्तेमाल करने की हूती क्षमता दिखाएगी।
यह दावा 20 जुलाई को हूतियों की ओर से सऊदी अरब के खिलाफ घोषित समुद्री नाकाबंदी के बाद आया। समूह ने इसे यमन के हूती-नियंत्रित इलाकों में बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर सऊदी प्रतिबंधों का जवाब बताया। हूती अधिकारियों ने इसे “नाकाबंदी के बदले नाकाबंदी” का नाम दिया।
इसके बाद समूह ने सऊदी-सम्बद्ध तेल टैंकरों पर मिसाइल हमलों का दावा किया। इनमें NCC GHAZAL भी शामिल था, जिसके बारे में हूतियों ने कहा कि समुद्री प्रतिबंध का उल्लंघन करने के बाद उसे पीछे हटना पड़ा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट में भी जुलाई के दौरान सऊदी-सम्बद्ध टैंकरों Encelia और Layla पर हमलों के हूती दावों का उल्लेख है।
अभियान केवल जहाजों तक सीमित नहीं रहा। 9 अगस्त को हूतियों ने कहा कि ड्रोन के जरिए सऊदी अरामको की जाज़ान रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि की कि प्रतिष्ठान में आग लगी थी, जिसे बाद में बुझा दिया गया और किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से आग का कारण या नुकसान की पूरी सीमा स्पष्ट नहीं की।
बाब अल-मंदेब के पास स्थित, सरकार के नियंत्रण वाले यमनी बंदरगाह मोचा पर भी हूती मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं। बंदरगाह के निदेशक के अनुसार, कई दिनों में वहां 25 से अधिक मिसाइलें गिरीं, जिसके बाद वाणिज्यिक और समुद्री गतिविधियां रोकनी पड़ीं। उन्होंने सात लोगों की मौत और करीब 16 मिलियन डॉलर के नुकसान की जानकारी दी।
यमनी सेना ने अलग से कहा कि मोचा और आसपास के ढांचे पर हुए हमले में सात लोग मारे गए और 30 घायल हुए। अन्य रिपोर्टों में बंदरगाह और सरकार के नियंत्रण वाले आसपास के इलाकों पर बार-बार हमलों का जिक्र है। इससे साफ होता है कि यह संकट केवल सऊदी-हूती समुद्री टकराव नहीं, बल्कि यमन के अंदर तेज हो रहे संघर्ष का भी हिस्सा है।
व्यावसायिक जहाजों पर हमलों में भी लोगों की जान गई है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने कहा कि मोचा के दक्षिण में मिस्र के स्वामित्व वाले Tihamah जहाज पर हूती हमले में छह लोग मारे गए और 10 घायल हुए। शुरुआती रिपोर्टों में चालक दल के चार सदस्यों की मौत बताई गई थी, जो लगातार बदलते और परस्पर विरोधी आंकड़ों को दिखाता है।
सऊदी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि हूती दक्षिण से और इराकी मिलिशिया उत्तर से हमलों का समन्वय कर सकते हैं। उनके अनुसार, यह गतिविधि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की निगरानी में हो सकती है। रॉयटर्स ने इसे सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी का आकलन बताया, जो सऊदी, अमेरिकी और अन्य क्षेत्रीय देशों से मिली खुफिया जानकारी पर आधारित था। यह इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है कि ईरान ने इन खास हमलों का निर्देश दिया, या संबंधित हथियार, लक्ष्य संबंधी जानकारी अथवा कमांडर उपलब्ध कराए।
कुछ रिपोर्टों में IRGC कमांडरों, खुफिया सहयोग और इराकी मिलिशिया के साथ समन्वय के बारे में अधिक विस्तृत आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध सामग्री के आधार पर इन दावों को आरोपों से आगे बढ़कर स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। फिलहाल सबसे स्पष्ट रूप से सामने आया घटनाक्रम यह है कि सऊदी अरब व्यापक सुरक्षा चुनौती की तैयारी कर रहा है और हूती सऊदी-सम्बद्ध ठिकानों पर हमलों का दावा जारी रखे हुए हैं।
रियाद ने जवाब में सुरक्षा साझेदारियां मजबूत की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त में सऊदी अरब ने तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता किया। इसके अलावा, उसने लाल सागर और अदन की खाड़ी के लिए बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पहल पर काम किया। जुलाई के अंत में 14 देशों ने एक संस्थापक बयान पर हस्ताक्षर किए, हालांकि गठबंधन की वास्तविक संचालन भूमिका और हर सदस्य की प्रतिबद्धताएं अभी स्पष्ट नहीं हैं।
सऊदी अरब ने लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश भी की है। राजनयिक प्रयासों के दौरान क्षेत्रीय सरकारों से बातचीत की खबरें आईं, लेकिन प्रस्तावित गठबंधन की संरचना और अंतिम सदस्यता पर चर्चा जारी थी।
नए हमलों ने 2022 के बाद से बनी यमन की नाजुक तनाव-नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर दबाव डाला है। बीबीसी के आकलन के अनुसार, संघर्षविराम के दौर में दिखा संयम कमजोर पड़ता नजर आया और सऊदी जहाजों पर हमलों ने व्यापक युद्ध की आशंका बढ़ा दी। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर ने कहा कि 2023 से हूती और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेनाओं के बीच लड़ाई अपेक्षाकृत सीमित रही थी, लेकिन मौजूदा तनाव सऊदी नौसैनिक और जमीनी कार्रवाई की संभावित तैयारियों की खबरों के बाद बढ़ा है।
यदि सऊदी युद्धपोत पर हमले, बड़े सैन्य नुकसान या तेल ढांचे को गंभीर क्षति की पुष्टि होती है, तो सऊदी अरब भारी हवाई हमले या बड़े यमनी जमीनी अभियान का विकल्प चुन सकता है। इससे ईरान-समर्थित इराकी समूह भी संघर्ष में खिंच सकते हैं और स्थानीय टकराव व्यापक क्षेत्रीय संकट बन सकता है। दूसरी ओर, बड़ा समुद्री गठबंधन हमलों को रोकने में मदद कर सकता है, लेकिन युद्धपोतों, गश्ती नौकाओं और वाणिज्यिक जहाजों के बीच गलत आकलन की संभावनाएं भी बढ़ा सकता है।
बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यह स्वेज नहर के जरिए यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री मार्ग का दक्षिणी प्रवेशद्वार है। अभी तक इस जलडमरूमध्य के पूरी तरह बंद होने की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन हमले, जहाजों को दी गई चेतावनियां, बंदरगाहों का बंद होना और नौसैनिक निगरानी या रोकथाम की आशंका बीमा और सुरक्षा लागत बढ़ा सकती है। इससे यात्राओं में देरी हो सकती है और जहाजों को केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते पर भेजना पड़ सकता है।
इसीलिए मोचा बंदरगाह का ठप होना यमन की सीमाओं से बाहर भी मायने रखता है। बंदरगाह बंद होने से स्थानीय कारोबार सीधे प्रभावित होता है, जबकि जलडमरूमध्य के पास लगातार हमले यूरोप-एशिया के पूरे समुद्री मार्ग पर कंपनियों के कारोबारी फैसले बदल सकते हैं—भले ही सभी जहाजों के लिए औपचारिक नाकाबंदी लागू न हो।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सऊदी अरब 17 अगस्त के जहाज हमले की पुष्टि करता है, क्या जहाज की वास्तविक स्थिति पर स्वतंत्र सबूत सामने आते हैं और क्या नया समुद्री गठबंधन खुले तौर पर जहाजों को सुरक्षा-एस्कॉर्ट देना या उन्हें रोकना शुरू करता है।
इन घटनाओं से यह समझने में मदद मिलेगी कि हूतियों का अभियान मुख्य रूप से दबाव और राजनीतिक संदेश देने तक सीमित है या वह व्यापक लाल सागर युद्ध पैदा करने में सक्षम लंबे सैन्य अभियान में बदल रहा है। फिलहाल उपलब्ध साक्ष्य एक बात स्पष्ट करते हैं: टकराव तेज हो रहा है, लेकिन उसके सबसे महत्वपूर्ण दावों में से कुछ की पुष्टि अभी बाकी है।