रिपोर्टों के अनुसार, सैकड़ों विदेशी कार्यकर्ता इस अभियान में शामिल थे और उन्हें इज़राइल की सुरक्षा एजेंसियों ने हिरासत में लिया था।
वीडियो में कई कार्यकर्ता ज़मीन पर पंक्तियों में घुटनों के बल बैठे दिखाई देते हैं। उनके हाथ पीछे बंधे हैं और पास में इज़राइली सुरक्षा कर्मी खड़े हैं।
आलोचकों का कहना था कि यह दृश्य सार्वजनिक अपमान जैसा प्रतीत होता है। खास तौर पर इसलिए विवाद और बढ़ गया क्योंकि यह फुटेज किसी आम व्यक्ति ने नहीं बल्कि सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने साझा किया था।
इस घटना के बाद कई यूरोपीय देशों ने प्रतिक्रिया दी, लेकिन इटली, आयरलैंड और स्पेन ने कदम आगे बढ़ाते हुए यूरोपीय संघ (EU) से बेन्‑ग्विर पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी (Antonio Tajani) ने EU की विदेश नीति प्रमुख काया काल्लास (Kaja Kallas) से औपचारिक रूप से कहा कि बेन्‑ग्विर के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों को EU विदेश मंत्रियों की बैठक के एजेंडे में रखा जाए। तजानी का आरोप था कि कार्यकर्ताओं को “उत्पीड़न और अपमान” का सामना करना पड़ा, जो बुनियादी मानवाधिकार मानकों के खिलाफ है।
आयरलैंड और स्पेन ने भी इस मांग का समर्थन किया। उनका कहना था कि वीडियो में दिखाई गई स्थिति अस्वीकार्य है और इसके लिए जिम्मेदार मंत्री के खिलाफ कार्रवाई पर विचार होना चाहिए।
कई यूरोपीय राजधानियों में पहले से ही गाज़ा संघर्ष के दौरान बेन्‑ग्विर के बयान और रवैये को लेकर असंतोष था, इसलिए यह वीडियो व्यापक आलोचना का केंद्र बन गया।
वीडियो सामने आने के बाद यूरोप में कई देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। फ्रांस ने इसे “अस्वीकार्य” बताया, जबकि स्पेन ने कार्यकर्ताओं के साथ हुए व्यवहार की तीखी निंदा की।
कुछ देशों ने तो अपने यहां तैनात इज़राइली राजदूतों को तलब करके स्पष्टीकरण भी मांगा। यूरोपीय सरकारों ने कहा कि हिरासत में लिए गए किसी भी व्यक्ति के साथ गरिमा और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप व्यवहार किया जाना चाहिए।
इस तरह यह मामला सिर्फ एक सोशल‑मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इज़राइल और कई यूरोपीय देशों के बीच कूटनीतिक तनाव का मुद्दा बन गया।
EU संस्थानों ने भी इस घटना की सार्वजनिक रूप से आलोचना की। यूरोपीय आयोग और EU की कूटनीतिक सेवा ने कहा कि वीडियो में दिखाया गया व्यवहार “पूरी तरह अस्वीकार्य” है।
EU अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि हर हिरासत में लिए गए व्यक्ति के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होना चाहिए।
बेन्‑ग्विर ने वीडियो वापस नहीं लिया और अपने कदम का बचाव करते दिखाई दिए। लेकिन इस विवाद ने इज़राइल की राजनीति के भीतर भी आलोचना पैदा कर दी।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने ही राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री को दुर्लभ सार्वजनिक फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि इज़राइल को गाज़ा की ओर जाने वाले फ़्लोटिला को रोकने का अधिकार है, लेकिन जिस तरह से मंत्री ने हिरासत में लिए गए लोगों के साथ व्यवहार किया, वह इज़राइल के मूल्यों और मानकों के अनुरूप नहीं था।
इस घटना के बाद कई स्तरों पर असर दिखाई दिया:
हालांकि बाद में कई विदेशी कार्यकर्ताओं को प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वासित कर दिया गया, लेकिन इस विवाद ने इज़राइल और कई यूरोपीय देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया। साथ ही यह घटना गाज़ा की नाकेबंदी और उसे चुनौती देने वाली समुद्री अभियानों से जुड़ी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी उजागर करती है।
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