अधिकारियों के अनुसार उस छात्रावास में लगभग 14 से 18 वर्ष के किशोर छात्र रह रहे थे। बताया गया कि हमले के समय कई छात्र सो रहे थे और बाद में बचाव दलों को मलबा हटाकर लोगों को निकालना पड़ा।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि उसे इस हमले में बच्चों सहित नागरिकों के मारे जाने और घायल होने की खबरें मिली हैं। लेकिन संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र रूसी कब्ज़े में होने के कारण अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को वहां पहुंच नहीं है, इसलिए वह स्वतंत्र रूप से सभी विवरणों की पुष्टि नहीं कर सकता।
इस घटना को लेकर मुख्य विवाद यही है कि हमला किसी नागरिक इमारत पर हुआ या सैन्य ठिकाने पर।
रूस का दावा:
मॉस्को और रूसी‑समर्थित स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन के ड्रोन ने जानबूझकर छात्रों के छात्रावास और कॉलेज की इमारतों को निशाना बनाया। रूसी अधिकारियों ने इसे नागरिकों पर हमला बताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की मांग की।
यूक्रेन का दावा:
यूक्रेन ने इस बात से इनकार किया कि उसने किसी छात्रावास को निशाना बनाया। संयुक्त राष्ट्र में आई रिपोर्टों के अनुसार कीव का कहना है कि ड्रोन हमला दरअसल उस इलाके में चल रहे रूसी सैन्य ड्रोन कमांड मुख्यालय को लक्ष्य बनाकर किया गया था।
क्योंकि अंतरराष्ट्रीय जांचकर्ताओं को घटनास्थल तक पहुंच नहीं मिली, इसलिए अभी तक किसी भी पक्ष के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस घटना के बाद रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की और हमले को युद्ध अपराध बताया।
बैठक के दौरान प्रमुख देशों ने अलग‑अलग दृष्टिकोण पेश किए।
रूस:
रूसी प्रतिनिधियों ने हमले को “भयानक” बताया और कहा कि यह छात्रों और नाबालिगों वाली इमारत पर जानबूझकर किया गया हमला था।
ब्रिटेन:
ब्रिटेन ने कहा कि किसी भी नागरिक की मौत—खासकर बच्चों की—निंदनीय है। लेकिन उसने यह भी कहा कि अगर रूस सच में नागरिकों की सुरक्षा चाहता है तो उसे युद्ध समाप्त करने या युद्धविराम के लिए सहमत होना चाहिए।
संयुक्त राज्य अमेरिका:
अमेरिकी प्रतिनिधियों ने कहा कि यूक्रेन युद्ध में लगातार हो रही मौत और तबाही तुरंत रुकनी चाहिए। अमेरिका ने एक तत्काल और व्यापक युद्धविराम की मांग दोहराई ताकि बातचीत के जरिए युद्ध का अंत हो सके।
चीन:
चीन ने हमले की खबरों और खासकर छात्रों में हुए हताहतों पर चिंता जताई और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा नागरिकों की पीड़ा कम करने के प्रयास करने की अपील की।
स्टारोबिल्स्क की घटना से कुछ ही दिन पहले युद्ध के मानवीय असर को दिखाने वाली एक और घटना सामने आई।
20 मई को यूक्रेन के शहर ड्नीप्रो में रूसी मिसाइल हमले में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के उपयोग वाला एक गोदाम नष्ट हो गया। इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई और लगभग 900 पैलेट मानवीय सहायता सामग्री नष्ट हो गई, जिसकी कीमत एक मिलियन डॉलर से अधिक बताई गई।
इस गोदाम में अस्थायी आश्रय के लिए मैट, स्वच्छता किट और अन्य जरूरी सामान रखा था, जो अग्रिम मोर्चों के पास रहने वाले विस्थापित लोगों के लिए भेजा जाना था। गोदाम के नष्ट होने से हजारों लोगों तक सहायता पहुंचाने की योजना प्रभावित हुई।
स्टारोबिल्स्क का ड्रोन हमला और ड्नीप्रो में सहायता गोदाम का नष्ट होना—दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि यूक्रेन युद्ध का असर सिर्फ सैन्य मोर्चों तक सीमित नहीं रहा।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2022 से अब तक युद्ध में दसियों हजार नागरिक हताहत हुए हैं और स्कूलों, घरों तथा मानवीय सुविधाओं सहित बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है।
Comments
0 comments