26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में बर्फ, चट्टान और मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। शुरुआती विशेषज्ञ आकलनों और उपग्रह तस्वीरों के मुताबिक, यह मलबा संभवतः एक पहाड़ी नदी में गिरा या उसके प्रवाह को रोकने लगा। इसके बाद पानी, बर्फ और चट्टानों का तेज बहाव नेपाल की घाटियों से होता हुआ चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी और वहां की सीमा-सुविधाओं तक पहुंचा। हालांकि, इस ढहने की तत्काल वजह की जांच अभी जारी है।
6
10
22
यह सामान्य मानसूनी बाढ़ नहीं थी। संकरी हिमालयी नदी-घाटी में अचानक भारी मलबा गिरने से पानी विस्थापित हुआ, नदी में तलछट और चट्टानों की मात्रा बहुत बढ़ गई और आसपास के लोगों को प्रतिक्रिया देने के लिए बेहद कम समय मिला।
मौतों और लापता लोगों की संख्या क्यों बदलती रही
सड़कें टूटने, संचार व्यवस्था बाधित होने और बचाव दलों के नए इलाकों तक पहुंचने के साथ आंकड़े तेजी से बदलते रहे। 28 अगस्त की Reuters रिपोर्ट में नेपाल में कम-से-कम 579 मौतों और तिब्बत में सात मौतों का उल्लेख था। नेपाल की आपदा प्राधिकरण ने 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी दी, जबकि चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार ग्यिरोंग काउंटी में 558 लोग लापता थे।
9
42
29 अगस्त की बाद की रिपोर्ट में नेपाल में कम-से-कम 669 मौतें, करीब 2,426 लापता लोग और ग्यिरोंग में 554 लापता लोगों का आंकड़ा दिया गया। ऐसे अंतर का मतलब है कि बचाव अभियान के दौरान सूचनाएं लगातार अपडेट हो रही थीं; इसे अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
5
आपदाओं के शुरुआती आंकड़े अक्सर किसी खास तारीख की स्थिति बताते हैं। कुछ लापता लोग बाद में मिल सकते हैं, जबकि कई मौतों की पुष्टि बंद सड़कों, सुरंगों और क्षतिग्रस्त बस्तियों की तलाशी पूरी होने के बाद ही संभव होती है।
ग्यिरोंग में कितने विदेशी नागरिक लापता थे
बाढ़ से दोनों ओर पर्यटक, धार्मिक तीर्थयात्री, स्थानीय कर्मचारी और निवासी प्रभावित हुए। चीन के सरकारी प्रसारक CCTV ने शुरुआती तौर पर बताया कि ग्यिरोंग में लापता 558 लोगों में 260 विदेशी नागरिक थे।
3
15
बाद की रिपोर्टों के अनुसार, चीनी अधिकारियों ने 23 देशों के 261 लापता विदेशी नागरिकों की पहचान की। इनमें 104 नेपाली, 49 भारतीय, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी और 15 ब्रिटिश नागरिक शामिल थे। चूंकि बचाव अभियान के दौरान आंकड़े बदलते रहे, इसलिए इन राष्ट्रीयता-आधारित संख्याओं को उस समय की रिपोर्टेड गिनती के रूप में पढ़ना चाहिए, अंतिम सूची के रूप में नहीं।
43
नेपाल ने भी 30 से अधिक देशों के लापता पर्यटकों की जानकारी दी। सार्वजनिक रिपोर्टों में भारतीय, अमेरिकी, मलेशियाई, यूक्रेनी, ऑस्ट्रेलियाई, ब्रिटिश और कनाडाई नागरिकों का उल्लेख हुआ। कई भारतीय पर्यटक तिब्बत स्थित हिंदू तीर्थस्थल कैलाश पर्वत की यात्रा पर थे।
8
14
40
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित लोगों की बड़ी संख्या ने पहचान और दूतावासों के समन्वय को और कठिन बना दिया। सरकारों को लापता लोगों की शिकायतों का मिलान पर्यटन रिकॉर्ड, कर्मचारियों की सूची, सीमा-पार आवागमन के आंकड़ों और परिवारों से मिली जानकारी से करना पड़ा।
ग्लेशियर टूटने से इतनी खतरनाक बाढ़ कैसे बनी
प्रारंभिक आकलनों के अनुसार, ऊंचाई वाले क्षेत्र में ग्लेशियर का निचला हिस्सा या बर्फ और चट्टानों का भारी ढेर टूटकर घाटी में गिरा। उसके प्रभाव से नदी का रास्ता अस्थायी रूप से बंद हुआ या पानी तेजी से विस्थापित हुआ। इससे मलबे से भरी बाढ़ की लहर नीचे की ओर दौड़ पड़ी।
6
10
28
इस बहाव में बर्फ, मिट्टी और टूटी चट्टानें शामिल थीं। यह नदी-मार्गों के साथ आगे बढ़ा और रास्ते में बस्तियों तथा महत्वपूर्ण ढांचे को नष्ट करता गया। रिपोर्टों में ल्हेंदे नदी तंत्र और उससे जुड़ी सीमा घाटियों को इस घटना का मुख्य क्षेत्र बताया गया है। बाढ़ के बाद की उपग्रह तस्वीरों ने तबाही का पैमाना दिखाया।
22
36
इसी कारण आपदा अंतरराष्ट्रीय सीमा के दोनों ओर फैल गई। पहाड़ों का जलग्रहण क्षेत्र एक-दूसरे से जुड़ा था, इसलिए पैदा हुई बाढ़ नेपाल-चीन सीमा पर रुक नहीं सकी।
जलवायु परिवर्तन की भूमिका: क्या पता है, क्या अभी स्पष्ट नहीं
वैज्ञानिकों का कहना है कि लंबे समय तक बढ़ता तापमान ऊंचाई वाले पर्वतीय इलाकों को अधिक अस्थिर बना रहा है। गर्मी बढ़ने से ग्लेशियर तेजी से पिघल सकते हैं, बर्फ कमजोर हो सकती है, स्थायी रूप से जमी मिट्टी यानी पर्माफ्रॉस्ट पिघल सकता है और चट्टानें ढीली पड़ सकती हैं। इससे बर्फ-चट्टान के हिमस्खलन और उनसे जुड़ी बाढ़ का आधारभूत जोखिम बढ़ता है।
26
27
लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि वैश्विक तापमान वृद्धि ने सीधे इसी घटना को जन्म दिया। शुरुआती रिपोर्टों में विशेषज्ञों ने कहा कि तत्काल कारण तय करने या इस एक घटना को जलवायु परिवर्तन के लिए निर्णायक रूप से जिम्मेदार ठहराने के लिए अभी पर्याप्त जानकारी नहीं है। सावधानीपूर्ण निष्कर्ष यही है कि जलवायु परिवर्तन ने अस्थिरता के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाई हो सकती हैं, जबकि तत्काल ट्रिगर की जांच जारी है।
28
30
सड़क, पुल और सीमा ढांचे को भारी नुकसान
बाढ़ और मलबे ने घरों, बस्तियों, पुलों, सड़कों, बिजली व्यवस्था और सीमा-सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया। रिपोर्टों में नेपाल में करीब 40 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त होने और दर्जनों पुलों के बह जाने या टूटने की बात कही गई।
5
7
36
ग्यिरोंग सीमा चौकी लगभग पूरी तरह तबाह हो गई। जब चीनी बचाव दल वहां पहुंचा, तो Reuters के अनुसार उसे वहां “खंडहरों के अलावा कुछ नहीं” मिला।
9
इस नुकसान ने बचाव कार्य को भी बाधित किया। टूटे पुलों और सड़कों के कारण कई समुदाय अलग-थलग पड़ गए। संचार और बिजली संपर्क टूटने से यह पता लगाना मुश्किल हुआ कि कौन सुरक्षित है और कौन सुरंगों या मलबे में फंसा हो सकता है। नेपाल के वित्त मंत्री ने पुनर्निर्माण की लागत करीब 4 से 5 अरब डॉलर आंकी।
5
बचाव अभियान अब भी जोखिम भरा क्यों था
पहली बाढ़ के बाद खतरा खत्म नहीं हुआ। मलबे ने ऊपर की ओर पानी के निकाय बनाए या उनके आकार को बदल दिया। आशंका थी कि किसी झील या कमजोर अवरोध के टूटने से फिर तेज बाढ़ आ सकती है। नेपाल और चीन दोनों ने नए सिरे से बाढ़ की चेतावनी दी और क्षेत्र की निगरानी की।
7
15
चीन ने ऊपर की ओर बने एक अवरोधक झील की स्थिति का आकलन करने के लिए कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोक दिया। अधिकारियों ने तत्काल खतरे को नियंत्रण योग्य मानने के बाद अभियान फिर शुरू किया और उसे तेज किया।
17
इन परिस्थितियों में बचावकर्मियों को तेजी से काम करने और अस्थिर घाटियों, बाढ़ग्रस्त सुरंगों तथा संभावित भूस्खलन या ग्लेशियर गतिविधि वाले इलाकों में टीम भेजने के जोखिम के बीच संतुलन बनाना पड़ा।
चीन, नेपाल और भारत की प्रतिक्रिया
नेपाल और चीन की टीमों ने हेलीकॉप्टर, जमीनी तलाशी, निकासी, आपात सामग्री और सीमा-पार समन्वय का इस्तेमाल किया। चीनी बचावकर्मी तबाह हो चुकी ग्यिरोंग सीमा चौकी तक पहुंचे, जबकि नेपाल ने प्रभावित नदी घाटियों में तलाश और सुरंगों या क्षतिग्रस्त ढांचे में फंसे लोगों को खोजने पर ध्यान दिया।
9
21
नेपाल ने सुरंगों में बचाव, डीएनए के जरिए पहचान और परिवहन संपर्क बहाल करने जैसे विशेष क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहायता की जरूरत बताई। हालांकि, उस समय उसने अतिरिक्त विदेशी खोज एवं बचाव दलों को आवश्यक नहीं माना।
5
21
चीन ने नेपाल को आपात नकद सहायता, मानवीय सामग्री और सुरंग-बचाव विशेषज्ञ उपलब्ध कराने की बात कही। चीनी अधिकारियों ने लापता विदेशी नागरिकों के संबंध में विभिन्न देशों के दूतावासों से भी समन्वय किया।
19
20
भारत ने अपने नागरिकों, खासकर तीर्थयात्रियों, का पता लगाने और उनकी मदद के लिए काम किया। रिपोर्टों के अनुसार चीनी बचावकर्मियों ने 100 लापता भारतीय यात्रियों को ढूंढ लिया, जिनमें अधिकांश तीर्थयात्री थे। भारतीय अधिकारी लगातार दूतावासीय समन्वय में जुटे रहे और चीन की ओर फंसे लोगों की सहायता की।
6
41
44
अन्य सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी मदद की पेशकश की। ब्रिटेन ने 50 लाख पाउंड की सहायता का वादा किया, यूरोपीय संघ ने अतिरिक्त मदद जुटाने की तैयारी बताई और भारत ने आपदा राहत सामग्री भेजी।
18
संयुक्त अरब अमीरात ने राहत प्रयासों के लिए 1 करोड़ डॉलर के मानवीय सहायता पैकेज की घोषणा की। यह सहायता UAE Aid Agency के माध्यम से स्थानीय अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के समन्वय से पहुंचाई जानी थी।
23
इस आपदा का सबसे बड़ा सबक
26 अगस्त की यह घटना दिखाती है कि ऊंचाई वाले क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों का टूटना कितनी तेजी से सीमा-पार मानवीय संकट में बदल सकता है। तत्काल घटनाक्रम—ढहना, नदी का रुकना या पानी का विस्थापन, मलबे का बहाव और अचानक बाढ़—अब काफी हद तक स्पष्ट है। लेकिन सटीक ट्रिगर और अंतिम मानवीय क्षति का पता लगाने में अभी समय लगेगा।
प्रभावित लोगों के लिए आपात स्थिति पहली बाढ़ के बाद भी जारी रही। अस्थिर ढलान, मलबे से बनी झीलें, टूटे परिवहन मार्ग और बाधित संचार ने खतरे को लंबा खींचा। सरकारों को एक साथ खोज एवं बचाव, विदेशी नागरिकों की पहचान, बुनियादी ढांचे की बहाली, कूटनीतिक समन्वय और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण की योजना बनानी पड़ी।