इसके बाद इन एसेट्स को तेजी से स्वैप करके लगभग 5,402 ETH में बदल दिया गया—संभवतः आगे लॉन्ड्रिंग या क्रॉस‑चेन मूवमेंट को आसान बनाने के लिए।
शुरुआत में यह मामला थोड़ा उलझा हुआ लगा क्योंकि ब्रिज का क्रिप्टोग्राफ़िक वेरिफिकेशन सिस्टम सही काम कर रहा था।
Verus ब्रिज ट्रांजैक्शन सत्यापित करने के लिए दो मुख्य तकनीकें इस्तेमाल करता था:
लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण फर्क है:
Merkle proof यह साबित करता है कि कोई डेटा ब्लॉक या स्टेट ट्री में मौजूद है—लेकिन यह नहीं बताता कि वह ट्रांजैक्शन आर्थिक रूप से वैध है या उसके पीछे वास्तविक फंड लॉक हैं।
जांचकर्ताओं ने पाया कि कॉन्ट्रैक्ट:
यानी हमलावर ऐसा डेटा तैयार कर सकता था जो तकनीकी रूप से सही दिखे—लेकिन फिर भी Ethereum पर ज्यादा रकम निकालने की अनुमति दे दे।
सुरक्षा शोधकर्ताओं के अनुसार यह एक क्लासिक बिज़नेस‑लॉजिक वैलिडेशन फेल्योर था।
Ethereum कॉन्ट्रैक्ट को ideally इन चीज़ों की पुष्टि करनी चाहिए थी:
इन वैलिडेशन नियमों के बिना कॉन्ट्रैक्ट ऐसे ट्रांसफर भी स्वीकार कर रहा था जिनके पीछे असली जमा राशि मौजूद नहीं थी। रिपोर्टों के अनुसार हमलावर को Verus नेटवर्क पर केवल कुछ डॉलर की फीस देनी पड़ी, जबकि Ethereum पर लाखों डॉलर की निकासी संभव हो गई।
चूंकि यह क्रिप्टोग्राफ़ी की समस्या नहीं बल्कि लॉजिक की गलती थी, डेवलपर्स ने इस खामी को बंद करने के लिए Solidity पैच तैयार करने की बात कही।
Verus का मामला DeFi इतिहास के कुछ बड़े ब्रिज हैक्स की याद दिलाता है।
फरवरी 2022 में Wormhole ब्रिज पर हमले में हमलावर ने लगभग 120,000 wrapped ETH (wETH) मिंट कर लिए थे, जिनकी कीमत उस समय $320 मिलियन से ज्यादा थी। यह हमला सिग्नेचर वेरिफिकेशन बायपास करके किया गया था।
अगस्त 2022 में Nomad ब्रिज से लगभग $190 मिलियन चोरी हो गए। कारण था एक कॉन्फ़िगरेशन गलती, जिससे कई संदेश स्वतः वैध मान लिए गए और हमलावरों को फंड निकालने का मौका मिल गया।
Verus का मामला तकनीकी रूप से Nomad के ज्यादा करीब माना जा रहा है, क्योंकि दोनों मामलों में:
परिणाम एक ही रहा—बिना बैकिंग के फंड निकासी।
क्रॉस‑चेन ब्रिज DeFi में सबसे ज्यादा निशाना बनने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर में से एक हैं, क्योंकि उनमें कई जटिल सिस्टम एक साथ काम करते हैं:
अगर इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी चरण में छोटी‑सी गलती रह जाए, तो सिस्टम वास्तविक संपत्ति से अधिक निकासी की अनुमति दे सकता है।
इस घटना ने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत फिर से साबित किया:
“प्रूफ वैरिफाइड” का मतलब यह नहीं कि “ट्रांसफर वैध” भी है।
जब शुरुआती रिपोर्ट सामने आईं, तब तक नुकसान की भरपाई या रिकवरी योजना के बारे में आधिकारिक जानकारी सीमित थी। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि घटना के समय विस्तृत खुलासे अभी जारी थे।
अगर चोरी हुई राशि वापस नहीं मिलती, तो संभावित मुआवजा कई कारकों पर निर्भर कर सकता है:
Verus‑Ethereum ब्रिज घटना यह दिखाती है कि DeFi में सबसे खतरनाक कमजोरियां अक्सर क्रिप्टोग्राफी में नहीं बल्कि स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट लॉजिक की छोटी गलतियों में होती हैं।
एक ब्रिज सभी सिग्नेचर, प्रूफ और स्टेट रूट सही तरीके से वेरिफाई कर सकता है—लेकिन अगर कॉन्ट्रैक्ट यह सुनिश्चित नहीं करता कि वही डेटा सही ट्रांसफर को अधिकृत करता है, तो सिस्टम फिर भी असुरक्षित रहता है।
DeFi में अरबों डॉलर के नुकसान वाली कई घटनाओं की तरह, Verus एक्सप्लॉइट भी यह याद दिलाता है कि क्रॉस‑चेन सिस्टम में सुरक्षा उतनी ही अकाउंटिंग लॉजिक पर निर्भर करती है जितनी क्रिप्टोग्राफी पर।
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