मई की शुरुआत में फाये ने भी सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी कि अगर अंदरूनी विवाद जारी रहे तो सत्तारूढ़ पार्टी “ढह” सकती है।
इन बयानों से साफ हो गया कि यह केवल व्यक्तिगत टकराव नहीं था बल्कि पार्टी की दिशा और नेतृत्व पर संघर्ष भी था।
राजनीतिक तनाव के बीच देश एक गंभीर आर्थिक संकट से भी जूझ रहा था।
2024 में सत्ता में आने के बाद नई सरकार ने सरकारी वित्त का ऑडिट कराया। इस जांच में पता चला कि पिछली सरकार के दौरान लगभग 7 अरब डॉलर के कर्ज और देनदारियां सही तरीके से रिपोर्ट ही नहीं की गई थीं।
इस खुलासे के कई बड़े असर हुए:
फाये और सोनको दोनों ने इस संकट के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन इससे नई सरकार के सामने कठिन फैसले खड़े हो गए—खर्च घटाने, कर्ज प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय ऋणदाताओं से बातचीत जैसे मुद्दों पर।
कर्ज संकट के समाधान के लिए IMF के साथ बातचीत अहम हो गई।
राष्ट्रपति फाये ने बाद में इन वार्ताओं की सीधी जिम्मेदारी खुद अपने हाथ में ले ली, जिससे आर्थिक नीति पर राष्ट्रपति की भूमिका और मजबूत हो गई।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री सोनको ने कुछ IMF प्रस्तावों—खासकर कर्ज पुनर्गठन—की सार्वजनिक आलोचना की और कहा कि इससे देश की प्रतिष्ठा या आर्थिक संप्रभुता को नुकसान हो सकता है।
यही मतभेद कई बड़े सवालों को लेकर उभरे:
इससे पहले से मौजूद राजनीतिक तनाव और गहरा हो गया।
22 मई 2026 को राष्ट्रपति फाये ने राज्य मीडिया पर प्रसारित एक बयान में प्रधानमंत्री सोनको को पद से हटा दिया और पूरी सरकार भंग कर दी। सभी मंत्रियों को पद से मुक्त कर दिया गया और कहा गया कि पुरानी कैबिनेट केवल दैनिक प्रशासनिक कामकाज संभालेगी जब तक नई सरकार नहीं बन जाती।
यह फैसला 2024 में सत्ता में आई नेतृत्व जोड़ी के औपचारिक टूटने का संकेत था।
Pastef पार्टी के भीतर अब दो गुट बनने का खतरा है—एक राष्ट्रपति फाये के साथ और दूसरा सोनको के समर्थकों के साथ। इससे पार्टी में नेतृत्व संघर्ष या टूट की आशंका बढ़ गई है।
सोनको का देश में मजबूत जनाधार है, खासकर युवाओं के बीच। उनके हटाए जाने से राजनीतिक विरोध या सड़क पर प्रदर्शन की संभावना भी बढ़ सकती है।
सबसे बड़ी चिंता आर्थिक मोर्चे पर है। सेनेगल को अभी भी अपने कर्ज संकट से निकलने और IMF के साथ वित्तीय कार्यक्रम को फिर से शुरू कराने की जरूरत है।
राजनीतिक अस्थिरता के बीच निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के लिए बड़ा सवाल यही है: अब सेनेगल की आर्थिक नीति की दिशा तय कौन करेगा?
फाये और सोनको का अलग होना 2024 के सत्ता परिवर्तन के बाद देश की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना माना जा रहा है। जो गठबंधन कभी सुधार और बदलाव के वादे के साथ सत्ता में आया था, वह अब प्रतिस्पर्धी शक्ति केंद्रों और कठिन आर्थिक फैसलों के दबाव में टूट गया है।
आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि:
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