24 अगस्त 2026 को वैश्विक शेयर बाजारों में सावधानी का माहौल रहा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान और उससे जुड़े कारोबारी-आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ की घोषणा की। हालांकि दिन का सबसे अहम बाजार संकेत तत्काल तेल संकट नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली रही। अमेरिका में S&P 500 में 0.28% और Nasdaq में 0.76% की गिरावट आई, जबकि कच्चा तेल 2 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा सस्ता हुआ।
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‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ में क्या निशाने पर है
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य ईरान के आर्थिक संबंधों को तोड़ना और उन कंपनियों व देशों को चेतावनी देना है जो तेहरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं। ऐसे पक्षों की अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक पहुंच प्रभावित होने का जोखिम बढ़ सकता है।
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अभियान के प्रमुख क्षेत्र हैं:
- डिजिटल एसेट्स;
- टेक्नोलॉजी;
- सोना;
- विमानन; और
- शिपिंग।
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इसे सेकेंडरी प्रतिबंधों के विस्तार के रूप में पेश किया गया है। इसका अर्थ है कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले तीसरे देशों की कंपनियां भी अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था से बाहर किए जाने के जोखिम में आ सकती हैं। हालांकि शुरुआती घोषणा को एक ‘चेतावनी शॉट’ भी बताया गया, क्योंकि तत्काल तौर पर ईरान से जुड़े कारोबार में शामिल बड़े विदेशी वित्तीय संस्थानों पर व्यापक दंड नहीं लगाया गया।
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प्रमुख बाजार सूचकांकों का प्रदर्शन
सोमवार के बंद स्तर पर विभिन्न बाजारों में यह बदलाव दर्ज किया गया:
| सूचकांक |
बंद स्तर |
बदलाव |
| KOSPI |
6,696.96 |
-3.12% 14 |
| Hang Seng |
25,517.33 |
-1.89% 14 |
| Nikkei 225 |
65,528.09 |
-0.74% 44 |
| Shanghai Composite |
3,882.01 |
-0.59% 43 |
| Sensex |
77,369.11 |
-0.22% 45 |
| Nifty 50 |
24,219.05 |
-0.14% 45 |
| S&P/ASX 200 |
9,163.30 |
+0.66% 35 |
| DAX |
26,106.60 |
-0.11% 33 |
| FTSE 100 |
10,854.32 |
+0.35% 31 |
यूरोपीय बाजारों में कुल मिलाकर स्थिरता रही। पैन-यूरोपीय STOXX 600 अपरिवर्तित बंद हुआ, जर्मनी का DAX मामूली नीचे रहा और ब्रिटेन का FTSE 100 बढ़त के साथ बंद हुआ।
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दक्षिण कोरिया और हांगकांग पर सबसे ज्यादा दबाव क्यों
सबसे बड़ी गिरावट उन बाजारों में दिखी जिनमें टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर कंपनियों का भार अधिक है। दक्षिण कोरिया का KOSPI 3.12% गिरा। Nvidia के नतीजों से पहले निवेशकों ने चिप शेयरों में मुनाफावसूली की, जिससे दक्षिण कोरियाई बाजार एआई और सेमीकंडक्टर कारोबार से जुड़ी धारणा के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील रहा।
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हांगकांग का Hang Seng 1.89% नीचे आया। सूचकांक में टेक्नोलॉजी और चीन-केंद्रित कंपनियों का बड़ा हिस्सा होने के कारण वैश्विक जोखिम कम करने की प्रवृत्ति का असर यहां भी तेज रहा। निवेशकों ने ईरान से जुड़े कारोबार करने वाली कंपनियों और उसके व्यापारिक साझेदारों पर कड़े प्रतिबंधों के संभावित असर का भी आकलन किया।
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जापान का Nikkei 225 0.74% और चीन का Shanghai Composite 0.59% गिरा। यह अंतर बताता है कि सोमवार की प्रतिक्रिया केवल भू-राजनीतिक जोखिम की एकसमान कीमत तय करने का मामला नहीं थी। बाजार की क्षेत्रीय संरचना, टेक शेयरों में निवेश और Nvidia के संभावित नतीजों ने भी दिशा तय की।
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भारत अपेक्षाकृत मजबूत क्यों रहा—और आगे क्या जोखिम है
भारत में Sensex 0.22% और Nifty 50 0.14% की सीमित गिरावट के साथ बंद हुए।
45 फिर भी इससे लंबे समय तक चलने वाले ऊर्जा संकट का जोखिम खत्म नहीं होता।
यदि तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ती हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे महंगाई पर दबाव, डॉलर की मांग और चालू खाते से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। ऐसे हालात में रुपये पर दबाव पड़ सकता है और कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि सोमवार को यह एक संभावित भविष्य का जोखिम था, तत्काल बाजार स्थिति अलग रही। West Texas Intermediate करीब 2.5% गिरकर 84.89 डॉलर प्रति बैरल और Brent crude करीब 2.5% टूटकर 92.06 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
8 तेल की कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने भू-राजनीतिक तथा टेक्नोलॉजी संबंधी चिंताओं का कुछ असर कम किया। इसी वजह से बाजार में व्यापक घबराहट के बजाय नियंत्रित कमजोरी दिखाई दी।
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दिए गए बाजारों में ऑस्ट्रेलिया अलग रहा। S&P/ASX 200 0.66% चढ़कर 9,163.30 पर पहुंचा।
35 अन्य बाजारों में टेक शेयरों की बिकवाली और ऊर्जा व कमोडिटी से जुड़ी बदलती उम्मीदों के बीच ऑस्ट्रेलियाई बाजार का प्रदर्शन बेहतर रहा। हालांकि एक कारोबारी सत्र के आधार पर क्षेत्रीय नेतृत्व में स्थायी बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
अब बाजार किन घटनाओं पर नजर रखेगा
निवेशकों का ध्यान अब व्यस्त आर्थिक और कॉरपोरेट कैलेंडर पर है। Nvidia के नतीजे एआई और सेमीकंडक्टर कारोबार की मजबूती का संकेत देंगे। इसके अलावा फेडरल रिजर्व की Jackson Hole बैठक और महंगाई से जुड़ी अहम रिपोर्ट अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, टेक्नोलॉजी शेयरों के मूल्यांकन और ब्याज दरों की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।
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बाजार की अगली चाल इस बात पर निर्भर कर सकती है कि:
- अमेरिका प्रतिबंधों को कितनी आक्रामकता से लागू करता है;
- क्या तनाव से खाड़ी क्षेत्र की शिपिंग या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है;
- Nvidia के नतीजे सेमीकंडक्टर शेयरों में भरोसा बढ़ाते हैं या नहीं; और
- Jackson Hole बैठक तथा महंगाई के आंकड़े अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीदों को किस दिशा में ले जाते हैं।
सोमवार का सीधा संदेश था: बाजारों ने जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया, लेकिन इसे पूर्ण वित्तीय संकट के रूप में भी नहीं देखा। टेक्नोलॉजी शेयरों की कमजोरी ने इक्विटी बाजारों पर दबाव डाला, जबकि तेल की गिरती कीमतों और नरम अमेरिकी यील्ड ने कुछ राहत दी।