ओपनएआई ने इन आरोपों से इनकार किया और कहा कि कंपनी का ढांचा समय के साथ विकसित हुआ क्योंकि उन्नत एआई बनाने के लिए विशाल निवेश की जरूरत थी।
नौ सदस्यों वाली संघीय जूरी ने यह तय नहीं किया कि मस्क के आरोप सही थे या नहीं। उन्होंने सिर्फ यह देखा कि मुकदमा समय पर दायर हुआ था या नहीं।
जूरी ने सर्वसम्मति से फैसला दिया कि मस्क का मुकदमा तीन साल की ‘statute of limitations’ (कानूनी समय सीमा) से बाहर था। इसलिए अदालत इस पर जिम्मेदारी तय नहीं कर सकती थी।
फैसला भी बहुत जल्दी आ गया। कई हफ्तों की गवाही सुनने के बाद जूरी ने दो घंटे से भी कम समय में अपना निर्णय सुना दिया।
मुकदमे का एक बड़ा हिस्सा इस सवाल पर केंद्रित था कि मस्क को ओपनएआई के व्यावसायिक दिशा में जाने की जानकारी कब हुई।
ओपनएआई का तर्क:
मस्क का तर्क:
जूरी ने अंततः ओपनएआई के तर्क को स्वीकार किया कि मुकदमा देर से दायर हुआ।
इस केस में मस्क की शुरुआती आर्थिक मदद भी एक बड़ा मुद्दा थी। उन्होंने ओपनएआई के शुरुआती चरण में लगभग 38 मिलियन डॉलर दिए थे।
मस्क का कहना था कि उन्होंने यह पैसा इस समझ के साथ दिया था कि ओपनएआई एक गैर‑लाभकारी शोध संस्था के रूप में ही काम करेगी। उनके अनुसार बाद में कंपनी का व्यावसायिक मॉडल अपनाना उस समझ के खिलाफ था।
लेकिन चूंकि जूरी ने मामला समय सीमा के आधार पर खारिज कर दिया, इसलिए अदालत ने यह तय ही नहीं किया कि उन फंड्स का वास्तव में गलत इस्तेमाल हुआ था या नहीं।
तीन सप्ताह चले इस मुकदमे में तकनीकी उद्योग की कई प्रमुख हस्तियों ने अदालत में गवाही दी। इनमें शामिल थे:
सिलिकॉन वैली में इस केस को खास ध्यान से देखा जा रहा था क्योंकि यह दुनिया की सबसे प्रभावशाली एआई कंपनियों में से एक के शासन और संरचना से जुड़ा मामला था।
यह फैसला ओपनएआई और उसके नेतृत्व के लिए स्पष्ट कानूनी जीत माना जा रहा है। मुकदमे के खारिज होने से कंपनी और उसके अधिकारियों पर मंडरा रहा बड़ा कानूनी खतरा फिलहाल टल गया।
हालांकि इसका दायरा सीमित है। अदालत ने यह नहीं कहा कि ओपनएआई का ढांचा बदलना पूरी तरह सही या नैतिक था। उसने सिर्फ इतना तय किया कि मस्क ने चुनौती देने में बहुत देर कर दी।
फिर भी इस फैसले से सैम ऑल्टमैन और ग्रेग ब्रॉकमैन की स्थिति मजबूत हुई है और कंपनी पर चल रहा एक बड़ा कानूनी दबाव खत्म हो गया है।
लेकिन एआई कंपनियों के शासन, फंडिंग मॉडल और उन्नत एआई तकनीक के व्यावसायीकरण को लेकर बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।