यूक्रेन की Unmanned Systems Forces से जुड़े ड्रोन ऑपरेटरों का कहना है कि फ्रिगेट Admiral Essen को उसके बर्थ के पास निशाना बनाया गया। हालांकि शुरुआती घंटों में यह स्पष्ट नहीं था कि जहाज़ों को कितना नुकसान पहुँचा।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार 2026 के दौरान यह Admiral Essen पर यूक्रेन का एक और हमला था, जिससे संकेत मिलता है कि यूक्रेन ब्लैक सी फ्लीट की मिसाइल‑लॉन्च क्षमता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
हमले का दूसरा बड़ा लक्ष्य रूस की तेल निर्यात प्रणाली से जुड़ा बुनियादी ढांचा था। यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने कहा कि दो प्रमुख सुविधाएँ प्रभावित हुईं:
रूसी क्षेत्रीय अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन के मलबे के गिरने से तकनीकी और प्रशासनिक इमारतों में आग लग गई और ईंधन टर्मिनल के परिसर में भी नुकसान हुआ। आग बुझाने के लिए आपातकालीन सेवाएँ मौके पर तैनात की गईं।
हमले में मानव हानि सीमित बताई गई, लेकिन शुरुआती रिपोर्टें एक‑दूसरे से पूरी तरह मेल नहीं खातीं।
कुल मिलाकर शुरुआती जानकारी से इतना स्पष्ट हुआ कि तेल ढांचे में आग और नुकसान हुआ, जबकि नौसैनिक जहाज़ों को हुए वास्तविक नुकसान का स्वतंत्र सत्यापन तुरंत उपलब्ध नहीं था।
विश्लेषकों के अनुसार यह हमला यूक्रेन की 2026 की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसमें रूस के अंदर दूर तक स्थित ऊर्जा ढांचे और सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य रूस की युद्ध क्षमता और वित्तीय संसाधनों दोनों को कमजोर करना है।
तेल से जुड़ी सुविधाएँ—जैसे बंदरगाह, रिफाइनरी और भंडारण डिपो—इस रणनीति के प्रमुख लक्ष्य बन गए हैं क्योंकि ये रूस की ऊर्जा निर्यात प्रणाली की अहम कड़ियाँ हैं। इन्हें बाधित करने से तेल आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
नोवोरोस्सिय्स्क पर इस हमले में तेल टर्मिनल और Kalibr‑मिसाइल क्षमता वाले जहाज़ दोनों को निशाना बनाना इस दोहरे उद्देश्य की ओर इशारा करता है:
क्योंकि नोवोरोस्सिय्स्क एक साथ नौसैनिक अड्डा और बड़ा तेल निर्यात केंद्र है, इसलिए यह बंदरगाह यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोन अभियान में सबसे रणनीतिक लक्ष्यों में से एक बन गया है।
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