अमेरिकी परीक्षण उसी अवधि में हुआ जब रूस 19 मई से 21 मई 2026 तक बड़े रणनीतिक परमाणु अभ्यास चला रहा था। इन अभ्यासों में लगभग 64,000 से अधिक सैनिक और करीब 7,800 सैन्य उपकरण शामिल थे।
रूस के अनुसार इन ड्रिल्स का उद्देश्य बाहरी खतरे की स्थिति में परमाणु बलों की तैयारी और तैनाती का अभ्यास करना था। इनमें बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों के अभ्यास प्रक्षेपण के साथ विमान, जहाज़ और पनडुब्बियाँ भी शामिल थीं।
चूंकि अमेरिकी परीक्षण 20 मई को हुआ, इसलिए यह रूसी अभ्यास के बीच में पड़ गया। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने बार‑बार कहा कि यह सिर्फ समय का संयोग था। उनका कहना है कि Minuteman III का यह परीक्षण वर्षों पहले तय किए गए नियमित कार्यक्रम का हिस्सा था।
अमेरिका दशकों से अपने परमाणु प्रतिरोध को विश्वसनीय बनाए रखने के लिए ऐसे परीक्षण करता रहा है। इनसे इंजीनियरों और सैन्य योजनाकारों को यह समझने में मदद मिलती है कि पुराने सिस्टम अभी भी सुरक्षित और प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं।
Air Force Global Strike Command समय‑समय पर ऐसे लॉन्च आयोजित करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मिसाइल बल सुरक्षित, भरोसेमंद और संचालन के लिए तैयार बना रहे।
Minuteman III अमेरिका की न्यूक्लियर ट्रायड (Nuclear Triad) का भूमि‑आधारित हिस्सा है। इस त्रयी के तीन घटक होते हैं:
इस तीन‑स्तरीय संरचना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी संभावित हमले के बाद भी अमेरिका के पास विश्वसनीय प्रतिरोध क्षमता बनी रहे।
Minuteman III प्रणाली अब काफी पुरानी हो चुकी है और अपने नियोजित सेवा जीवन के अंतिम चरण में है। इसलिए अमेरिकी वायुसेना इसे LGM‑35A Sentinel नामक नई ICBM प्रणाली से बदलने की तैयारी कर रही है।
Sentinel कार्यक्रम का उद्देश्य अमेरिकी परमाणु त्रयी के भूमि‑आधारित हिस्से का आधुनिकीकरण करना है और इसे लगभग 2075 तक सक्रिय रखने की योजना है।
जब तक यह नई प्रणाली पूरी तरह तैनात नहीं हो जाती, तब तक Minuteman III के नियमित परीक्षण अमेरिकी परमाणु प्रतिरोध की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
20 मई 2026 को हुआ Minuteman III का प्रक्षेपण एक नियमित, बिना वारहेड वाला परीक्षण था, जिसका उद्देश्य अमेरिकी ICBM प्रणाली की विश्वसनीयता और तैयारी की जांच करना था। हालांकि यह रूस के बड़े परमाणु अभ्यास के दौरान हुआ, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह सिर्फ संयोग था और पहले से निर्धारित कार्यक्रम का हिस्सा था।
रणनीतिक दृष्टि से यह घटना दिखाती है कि अमेरिका और रूस दोनों ही अपने परमाणु बलों को बनाए रखने और उन्हें आधुनिक बनाने की प्रक्रिया जारी रखे हुए हैं।
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