क्रिप्टो ऑप्शंस ट्रेडिंग का बड़ा हिस्सा डेरिबिट (Deribit) जैसे डेरिवेटिव्स एक्सचेंजों पर होता है, इसलिए ऐसे एक्सपायरी इवेंट का बाजार पर खास असर माना जाता है।
एक्सपायरी से पहले के ऑप्शंस डेटा से ट्रेडर्स की सोच का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बिटकॉइन (BTC)
Put‑call ratio 1 से कम होने का मतलब है कि call ऑप्शंस (ऊपर जाने की उम्मीद) की संख्या put ऑप्शंस से ज्यादा थी। इससे हल्का बुलिश झुकाव दिखता है, लेकिन बहुत आक्रामक नहीं।
एथेरियम (ETH)
यह अनुपात लगभग संतुलित है, यानी ट्रेडर्स ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं की संभावना देख रहे थे।
Max pain वह कीमत होती है जहां सबसे ज्यादा ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट बेकार (worthless) हो जाते हैं। कई बार एक्सपायरी के आसपास कीमतें इसी स्तर की ओर खिंचती हुई दिखाई देती हैं।
22 मई की सेटलमेंट के आसपास कीमतों का व्यवहार इस “मैक्स‑पेन” प्रभाव से मेल खाता दिखा।
जब कीमतें इन प्रमुख स्ट्राइक के आसपास रहती हैं तो मार्केट‑मेकर्स की हेजिंग गतिविधि वोलैटिलिटी को कम कर सकती है और कीमतों को सीमित दायरे में रखती है।
इस एक्सपायरी का एक प्रमुख असर implied volatility (IV) में कमी के रूप में सामने आया।
डेटा के मुताबिक:
जब बड़ी संख्या में ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायर हो जाते हैं, तो हेजिंग का दबाव घट सकता है—जिससे अल्पकालिक वोलैटिलिटी कम हो जाती है।
ऑप्शंस डेटा से यह भी संकेत मिला कि बड़े निवेशक या “व्हेल” इस समय आक्रामक दांव लगाने के बजाय रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान दे रहे थे।
मुख्य संकेत:
इस तरह के माहौल में संस्थागत ट्रेडर्स आमतौर पर हेजिंग और पूंजी की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
डेरिवेटिव्स डेटा उस समय के व्यापक क्रिप्टो माहौल से मेल खाता था:
ऐसी स्थिति में बड़े एक्सपायरी इवेंट अक्सर शांत रहते हैं क्योंकि बहुत कम ट्रेडर बड़े दिशात्मक दांव लगाए होते हैं।
22 मई की सेटलमेंट के तुरंत बाद ही बाजार का ध्यान अगले सप्ताह की एक्सपायरी पर चला गया। इसकी वजह है कि 29 मई की संभावित एक्सपायरी का आकार काफी बड़ा—लगभग $6.25 बिलियन—माना जा रहा है।
बड़ी एक्सपायरी महत्वपूर्ण इसलिए होती है क्योंकि:
इस वजह से कई ट्रेडर यह देखने के लिए तैयार हैं कि कीमतें फिर से प्रमुख स्ट्राइक लेवल की ओर खिंचेंगी या हेजिंग दबाव खत्म होने के बाद नया ट्रेंड शुरू होगा।
22 मई की $1.9 बिलियन BTC‑ETH ऑप्शंस एक्सपायरी अपेक्षा से शांत रही। कीमतें प्रमुख स्ट्राइक लेवल के आसपास रहीं, वोलैटिलिटी घटी और बड़े ट्रेडर्स ने रक्षात्मक रुख अपनाया।
यह संकेत देता है कि फिलहाल क्रिप्टो बाजार लो‑वोलैटिलिटी कंसोलिडेशन फेज में है—जहां ट्रेडर्स अगले बड़े डेरिवेटिव्स इवेंट का इंतजार कर रहे हैं, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकता है।
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