यह कार्रवाई उस हमले के एक दिन बाद हुई, जिसने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया। 18 अगस्त को इदलिब प्रांत के अबू अल-दुहूर सैन्य एयरबेस पर आठ इजरायली हवाई हमलों की खबर आई थी। सीरियाई स्रोतों के अनुसार, हमलों में रनवे और भंडारण सुविधाओं को नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
सीरियाई सरकारी मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायली बल बुधवार तड़के जबाटा अल-खशब में दाखिल हुए। उन्होंने कई संपत्तियों और घरों की तलाशी ली तथा दो लोगों को हिरासत में लिया। रिपोर्टों में बल की संख्या 100 से अधिक कर्मियों और वाहनों की संख्या 15 बताई गई है। उपलब्ध जानकारी में न तो हिरासत में लिए गए लोगों के नाम हैं, न वाहनों के प्रकार का स्पष्ट विवरण और न ही किसी मौत या चोट की पुष्टि।
यह इस कस्बे में पहली ऐसी रिपोर्टेड कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी इजरायली बलों के अस्थायी चौकियां बनाने, घरों की तलाशी लेने और लोगों को हिरासत में लेने की खबरें आती रही हैं।
18 अगस्त को सीरियाई सरकारी मीडिया ने इदलिब के पूर्वी हिस्से में स्थित अबू अल-दुहूर सैन्य एयरबेस पर आठ इजरायली हवाई हमलों की जानकारी दी। सीरियाई स्रोतों और रॉयटर्स द्वारा उद्धृत विवरणों के अनुसार, रनवे और भंडारण सुविधाओं को नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
तुर्की सीमा से एयरबेस की निकटता ने इस हमले को विशेष रूप से संवेदनशील बना दिया। रिपोर्टों में कहा गया कि हमलों से पहले एक तुर्की प्रतिनिधिमंडल ने एयरफील्ड का निरीक्षण किया था। इसी दौरान एयरबेस के पुनर्वास या वहां तुर्की की संभावित सैन्य तैनाती को लेकर चर्चा चल रही थी।
इजरायल ने बाद में हमले को स्वीकार करते हुए कहा कि सीरिया एक सहमत सुरक्षा “यथास्थिति” का उल्लंघन करने के करीब था, क्योंकि वह एयरबेस पर तुर्की बलों की तैनाती की अनुमति दे रहा था। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया कि इजरायल ने सीरिया को ऐसी तैनाती के संभावित खतरे को लेकर बार-बार चेतावनी दी थी।
यह इजरायल का पक्ष है। उपलब्ध रिपोर्टें स्वतंत्र रूप से यह साबित नहीं करतीं कि तुर्की की तैनाती निश्चित रूप से होने वाली थी या एयरबेस से तत्काल कोई परिचालन खतरा पैदा हो रहा था। नुकसान का पूरा आकलन भी स्पष्ट नहीं है; सीरियाई मीडिया ने मुख्य रूप से रनवे, भंडारण सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का उल्लेख किया है।
इसी अवधि के आसपास दक्षिणी सीरिया के पश्चिमी दारा क्षेत्र में इजरायली गोलाबारी की भी रिपोर्टें आईं। हालांकि, उपलब्ध सामग्री इस गोलाबारी से हुए विशिष्ट नुकसान या हताहतों की स्वतंत्र और पुष्ट संख्या उपलब्ध नहीं कराती। स्पष्ट रूप से दर्ज नुकसान और हताहतों का विवरण अबू अल-दुहूर एयरबेस से जुड़ा है, जहां सामग्रीगत नुकसान की बात कही गई, लेकिन किसी की मौत या चोट की सूचना नहीं थी।
कुनैतरा की यह कार्रवाई दिसंबर 2024 में बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद दक्षिणी सीरिया में इजरायल की लगभग रोजाना बताई जा रही सैन्य गतिविधियों की पृष्ठभूमि में हुई है। रिपोर्टों में कुनैतरा और दारा में छापे, घरों की तलाशी, हिरासत, अस्थायी चौकियां और सड़कों पर पाबंदियों का उल्लेख है।
सीरियाई और निगरानी संबंधी रिपोर्टों में 1974 के युद्धविराम-वियोजन समझौते के तहत बने संयुक्त राष्ट्र-निगरानी वाले बफर जोन में इजरायली बलों की आवाजाही, नई सैन्य चौकियों और अड्डों की स्थापना का भी जिक्र है। सीरियन नेटवर्क फॉर ह्यूमन राइट्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में कम से कम नौ इजरायली सैन्य अड्डे बनाए गए हैं, जिनमें अधिकांश कुनैतरा में हैं।
अन्य रिपोर्टों में खेतों को नुकसान, खाइयों, सड़कों और सैन्य ढांचे के निर्माण तथा गोलान सीमा के पास स्थिति मजबूत करने की बात कही गई है। इन गतिविधियों का पैमाना और उनका वर्णन स्रोतों के अनुसार अलग-अलग है, लेकिन लगातार सामने आने वाला रुझान अलग-अलग छिटपुट हमलों से आगे बढ़कर दक्षिणी सीरिया में अधिक टिकाऊ सैन्य मौजूदगी, चौकियों और पहुंच मार्गों के निर्माण का है।
अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि वॉशिंगटन ने इस मामले में सीधे दमिश्क के व्यापक दावों का समर्थन करने के बजाय तनाव कम करने पर जोर दिया। प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि यह हमला केवल इजरायल और सीरिया के बीच विवाद नहीं रहा; इससे तुर्की के साथ तनाव बढ़ा और इस विशेष कार्रवाई पर अमेरिका की असहमति भी खुलकर सामने आई।
सीरिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायली हमलों और घुसपैठ के खिलाफ ठोस कदम उठाने की अपील की है। दमिश्क की मांगों में दिसंबर 2024 के बाद इजरायल द्वारा प्रवेश किए गए क्षेत्रों से वापसी शामिल है। इसमें संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाले बफर जोन के हिस्से और कब्जे वाले सीरियाई गोलान हाइट्स भी शामिल हैं।
सीरिया इन मांगों को अपनी संप्रभुता और 1974 के वियोजन समझौते की रक्षा के रूप में पेश करता है। इसके विपरीत, इजरायल अपनी बढ़ी हुई सैन्य गतिविधियों को सीमा के निकट शत्रुतापूर्ण ताकतों या अस्थिर करने वाली सैन्य तैनाती को रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा कदम बताता है। उपलब्ध स्रोत दोनों पक्षों के रुख दर्ज करते हैं, लेकिन किसी नए व्यापक समझौते की पुष्टि नहीं करते।
जबाटा अल-खशब की जमीनी कार्रवाई और अबू अल-दुहूर पर हवाई हमले टकराव के दो अलग-अलग रूप हैं। कुनैतरा में बड़ी जमीनी टुकड़ी, घरों की तलाशी और दो हिरासतों की रिपोर्ट सामने आई। इदलिब में हमला इजरायल की गोलान सीमा से काफी दूर स्थित सैन्य स्थल तक पहुंचा और तुर्की के साथ तनाव का सीधा बिंदु बन गया।
दोनों घटनाएं संकेत देती हैं कि दिसंबर 2024 के बाद इजरायल की सीरिया नीति में दक्षिण में चौकियों और सैन्य ठिकानों के साथ-साथ छापे, हिरासत और संभावित सुरक्षा खतरों से जुड़ी सुविधाओं पर हमले भी शामिल हैं। इससे तीन तरफा क्षेत्रीय विवाद और गहरा हुआ है: सीरिया इजरायली घुसपैठ खत्म करने की मांग कर रहा है, तुर्की सीरिया की सुरक्षा और सैन्य ढांचे में भूमिका चाहता है, जबकि इजरायल सीमा के पास संतुलन बदलने वाली तुर्की या अन्य सैन्य मौजूदगी को रोकना चाहता है। अमेरिका की सार्वजनिक आपत्ति बताती है कि इजरायल का सुरक्षा तर्क भी तनाव बढ़ने को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता खत्म नहीं करता।
यह कार्रवाई उस हमले के एक दिन बाद हुई, जिसने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया। 18 अगस्त को इदलिब प्रांत के अबू अल-दुहूर सैन्य एयरबेस पर आठ इजरायली हवाई हमलों की खबर आई थी। सीरियाई स्रोतों के अनुसार, हमलों में रनवे और भंडारण सुविधाओं को नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
सीरियाई सरकारी मीडिया और क्षेत्रीय समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायली बल बुधवार तड़के जबाटा अल-खशब में दाखिल हुए। उन्होंने कई संपत्तियों और घरों की तलाशी ली तथा दो लोगों को हिरासत में लिया। रिपोर्टों में बल की संख्या 100 से अधिक कर्मियों और वाहनों की संख्या 15 बताई गई है। उपलब्ध जानकारी में न तो हिरासत में लिए गए लोगों के नाम हैं, न वाहनों के प्रकार का स्पष्ट विवरण और न ही किसी मौत या चोट की पुष्टि।
यह इस कस्बे में पहली ऐसी रिपोर्टेड कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी इजरायली बलों के अस्थायी चौकियां बनाने, घरों की तलाशी लेने और लोगों को हिरासत में लेने की खबरें आती रही हैं।
18 अगस्त को सीरियाई सरकारी मीडिया ने इदलिब के पूर्वी हिस्से में स्थित अबू अल-दुहूर सैन्य एयरबेस पर आठ इजरायली हवाई हमलों की जानकारी दी। सीरियाई स्रोतों और रॉयटर्स द्वारा उद्धृत विवरणों के अनुसार, रनवे और भंडारण सुविधाओं को नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
तुर्की सीमा से एयरबेस की निकटता ने इस हमले को विशेष रूप से संवेदनशील बना दिया। रिपोर्टों में कहा गया कि हमलों से पहले एक तुर्की प्रतिनिधिमंडल ने एयरफील्ड का निरीक्षण किया था। इसी दौरान एयरबेस के पुनर्वास या वहां तुर्की की संभावित सैन्य तैनाती को लेकर चर्चा चल रही थी।
इजरायल ने बाद में हमले को स्वीकार करते हुए कहा कि सीरिया एक सहमत सुरक्षा “यथास्थिति” का उल्लंघन करने के करीब था, क्योंकि वह एयरबेस पर तुर्की बलों की तैनाती की अनुमति दे रहा था। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया कि इजरायल ने सीरिया को ऐसी तैनाती के संभावित खतरे को लेकर बार-बार चेतावनी दी थी।
यह इजरायल का पक्ष है। उपलब्ध रिपोर्टें स्वतंत्र रूप से यह साबित नहीं करतीं कि तुर्की की तैनाती निश्चित रूप से होने वाली थी या एयरबेस से तत्काल कोई परिचालन खतरा पैदा हो रहा था। नुकसान का पूरा आकलन भी स्पष्ट नहीं है; सीरियाई मीडिया ने मुख्य रूप से रनवे, भंडारण सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का उल्लेख किया है।
इसी अवधि के आसपास दक्षिणी सीरिया के पश्चिमी दारा क्षेत्र में इजरायली गोलाबारी की भी रिपोर्टें आईं। हालांकि, उपलब्ध सामग्री इस गोलाबारी से हुए विशिष्ट नुकसान या हताहतों की स्वतंत्र और पुष्ट संख्या उपलब्ध नहीं कराती। स्पष्ट रूप से दर्ज नुकसान और हताहतों का विवरण अबू अल-दुहूर एयरबेस से जुड़ा है, जहां सामग्रीगत नुकसान की बात कही गई, लेकिन किसी की मौत या चोट की सूचना नहीं थी।
कुनैतरा की यह कार्रवाई दिसंबर 2024 में बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद दक्षिणी सीरिया में इजरायल की लगभग रोजाना बताई जा रही सैन्य गतिविधियों की पृष्ठभूमि में हुई है। रिपोर्टों में कुनैतरा और दारा में छापे, घरों की तलाशी, हिरासत, अस्थायी चौकियां और सड़कों पर पाबंदियों का उल्लेख है।
सीरियाई और निगरानी संबंधी रिपोर्टों में 1974 के युद्धविराम-वियोजन समझौते के तहत बने संयुक्त राष्ट्र-निगरानी वाले बफर जोन में इजरायली बलों की आवाजाही, नई सैन्य चौकियों और अड्डों की स्थापना का भी जिक्र है। सीरियन नेटवर्क फॉर ह्यूमन राइट्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में कम से कम नौ इजरायली सैन्य अड्डे बनाए गए हैं, जिनमें अधिकांश कुनैतरा में हैं।
अन्य रिपोर्टों में खेतों को नुकसान, खाइयों, सड़कों और सैन्य ढांचे के निर्माण तथा गोलान सीमा के पास स्थिति मजबूत करने की बात कही गई है। इन गतिविधियों का पैमाना और उनका वर्णन स्रोतों के अनुसार अलग-अलग है, लेकिन लगातार सामने आने वाला रुझान अलग-अलग छिटपुट हमलों से आगे बढ़कर दक्षिणी सीरिया में अधिक टिकाऊ सैन्य मौजूदगी, चौकियों और पहुंच मार्गों के निर्माण का है।
अमेरिका की सार्वजनिक आलोचना इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि वॉशिंगटन ने इस मामले में सीधे दमिश्क के व्यापक दावों का समर्थन करने के बजाय तनाव कम करने पर जोर दिया। प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि यह हमला केवल इजरायल और सीरिया के बीच विवाद नहीं रहा; इससे तुर्की के साथ तनाव बढ़ा और इस विशेष कार्रवाई पर अमेरिका की असहमति भी खुलकर सामने आई।
सीरिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायली हमलों और घुसपैठ के खिलाफ ठोस कदम उठाने की अपील की है। दमिश्क की मांगों में दिसंबर 2024 के बाद इजरायल द्वारा प्रवेश किए गए क्षेत्रों से वापसी शामिल है। इसमें संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाले बफर जोन के हिस्से और कब्जे वाले सीरियाई गोलान हाइट्स भी शामिल हैं।
सीरिया इन मांगों को अपनी संप्रभुता और 1974 के वियोजन समझौते की रक्षा के रूप में पेश करता है। इसके विपरीत, इजरायल अपनी बढ़ी हुई सैन्य गतिविधियों को सीमा के निकट शत्रुतापूर्ण ताकतों या अस्थिर करने वाली सैन्य तैनाती को रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा कदम बताता है। उपलब्ध स्रोत दोनों पक्षों के रुख दर्ज करते हैं, लेकिन किसी नए व्यापक समझौते की पुष्टि नहीं करते।
जबाटा अल-खशब की जमीनी कार्रवाई और अबू अल-दुहूर पर हवाई हमले टकराव के दो अलग-अलग रूप हैं। कुनैतरा में बड़ी जमीनी टुकड़ी, घरों की तलाशी और दो हिरासतों की रिपोर्ट सामने आई। इदलिब में हमला इजरायल की गोलान सीमा से काफी दूर स्थित सैन्य स्थल तक पहुंचा और तुर्की के साथ तनाव का सीधा बिंदु बन गया।
दोनों घटनाएं संकेत देती हैं कि दिसंबर 2024 के बाद इजरायल की सीरिया नीति में दक्षिण में चौकियों और सैन्य ठिकानों के साथ-साथ छापे, हिरासत और संभावित सुरक्षा खतरों से जुड़ी सुविधाओं पर हमले भी शामिल हैं। इससे तीन तरफा क्षेत्रीय विवाद और गहरा हुआ है: सीरिया इजरायली घुसपैठ खत्म करने की मांग कर रहा है, तुर्की सीरिया की सुरक्षा और सैन्य ढांचे में भूमिका चाहता है, जबकि इजरायल सीमा के पास संतुलन बदलने वाली तुर्की या अन्य सैन्य मौजूदगी को रोकना चाहता है। अमेरिका की सार्वजनिक आपत्ति बताती है कि इजरायल का सुरक्षा तर्क भी तनाव बढ़ने को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता खत्म नहीं करता।