यमन में मारिब, ताइज़, हद्रामौत और पश्चिमी तट समेत कई मोर्चों पर मिसाइल, ड्रोन और जमीनी हमले तेज हुए हैं। सरकारी बलों ने ताइज़ में हूती जमावड़ों, वाहनों और ठिकानों पर ड्रोन हमलों की बात कही, जबकि हूतियों ने मारिब के रिहायशी इलाकों और विस्थापितों के शिविरों को निशाना बनाया। दोनों पक्षों की लंबी दूरी के हथियारों और मान...
शोध उत्तर

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यमन में मिसाइल, ड्रोन और जमीनी हमलों का एक नया और तेज चक्र शुरू हो गया है। मारिब, ताइज़, हद्रामौत और लाल सागर के पश्चिमी तट तक फैली हिंसा ने आशंका बढ़ा दी है कि देश में बनी नाजुक शांति फिर से व्यापक युद्ध में बदल सकती है।
सरकार समर्थक सैन्य रिपोर्टों में 48 घंटों के दौरान 200 से अधिक हूती लड़ाकों—जिनमें अधिकतर ताइज़ की अल-समद ब्रिगेड के सदस्य बताए गए हैं—के मारे जाने का दावा किया गया है। इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। इसलिए इसे स्थापित हताहत आंकड़े के बजाय अपुष्ट युद्धकालीन दावा माना जाना चाहिए।
इस नए दौर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार से जुड़े बलों और ईरान-समर्थित हूतियों, दोनों के हमले शामिल हैं। शुरुआत में हूतियों ने मारिब और हद्रामौत प्रांतों में सरकारी सैन्य शिविरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यमनी रक्षा मंत्रालय ने कम-से-कम 30 सरकारी कर्मियों के मारे जाने या घायल होने की बात कही, जबकि एएफपी से बात करने वाले एक सैन्य अधिकारी ने मारिब के एक शिविर पर हुए हमले में मौतों की जानकारी दी।
हूतियों ने कहा कि उनका निशाना मारिब के पास सहन अल-जिन्न शिविर में हथियारों के भंडार, सैन्य वाहन और उपकरण थे। इसके बाद मारिब पर हुए एक अन्य हमले में दो लोगों की मौत और 14 के घायल होने की खबर स्थानीय अधिकारियों के हवाले से सामने आई।
सरकारी बलों ने कहा कि पश्चिमी ताइज़ के मकबाना मोर्चे पर हूती जमावड़ों, वाहनों और ठिकानों को ड्रोन से निशाना बनाया गया। सैन्य रिपोर्टों में जबल अल-जुहैब और मकबाना के अल-उर्फ इलाके के पास हमलों का भी उल्लेख है।
यमनी सेना के अनुसार, तीन हूती सदस्य मारे गए और कई अन्य घायल हुए, जिनमें क्षेत्रीय कमांडर भी शामिल थे। ये दावे सैन्य सूत्रों पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इन हमलों से संकेत मिलता है कि मानवरहित प्रणालियां अब युद्ध में कभी-कभार इस्तेमाल होने वाली क्षमता नहीं रह गई हैं। ड्रोन निगरानी, वाहन-रोधक कार्रवाई और अग्रिम मोर्चे पर मौजूद लड़ाकों को निशाना बनाने का नियमित साधन बनते जा रहे हैं।
हूतियों ने जवाबी कार्रवाई में सरकारी नियंत्रण वाले शहर मारिब पर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यह शहर लंबे समय से विस्थापित लोगों की बड़ी आबादी को भी आश्रय देता है। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि चार बैलिस्टिक मिसाइलों और चार ड्रोन ने रिहायशी इलाकों तथा विस्थापितों के शिविरों के आसपास प्रहार किया। इन हमलों में लोगों के घायल होने और घरों, वाहनों तथा अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचने की बात कही गई।
अधिकारियों ने बाद में मिसाइल प्रक्षेपण की अतिरिक्त घटनाओं की जानकारी दी। उनके अनुसार, पांचवीं मिसाइल से एक व्यक्ति घायल हुआ और छठी मिसाइल रात में मारिब की दिशा में दागी गई। अन्य रिपोर्टों में रिहायशी इलाकों पर छह बैलिस्टिक मिसाइलों और चार ड्रोन के हमले तथा एक बेकरी समेत नागरिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
अलग-अलग रिपोर्टों में हमलों की संख्या और हताहतों के आंकड़ों का विवरण एक जैसा नहीं है। फिर भी उनका साझा संकेत स्पष्ट है: लड़ाई अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि शहरों, नागरिक बस्तियों और विस्थापित परिवारों तक पहुंच रही है।
तनाव लाल सागर के तट पर स्थित अल-मुखा, जिसे मोचा भी कहा जाता है, तक फैल गया। सरकारी सैन्य मीडिया के अनुसार, हूती हमले में चार सैनिक और तीन नागरिक मारे गए, 15 लोग घायल हुए और 11 ड्रोन मार गिराए गए।
अन्य रिपोर्टों में अल-मुखा और मारिब में रातभर हुए हमलों में कई लोगों के मारे जाने और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई। रिपोर्टों के बीच हताहतों की संख्या अलग-अलग है, इसलिए इन आंकड़ों को सावधानी से देखा जाना चाहिए।
ताजा संघर्ष में बैलिस्टिक मिसाइलों, हमलावर ड्रोन, तोपखाने और जमीनी अभियानों का एक साथ इस्तेमाल हो रहा है। हूती सैन्य शिविरों, हथियार भंडारों और शहरी इलाकों के खिलाफ मिसाइलों और ड्रोन का प्रयोग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकारी बलों ने हूती ठिकानों, जमावड़ों और वाहनों पर ड्रोन हमलों की जानकारी दी है।
इस बदलाव से दो बड़े खतरे पैदा होते हैं। पहला, हमले तत्काल मोर्चे से काफी दूर तक किए जा सकते हैं, जिससे तनाव को सीमित करना कठिन हो जाता है। दूसरा, जब सैन्य सुविधाएं रिहायशी इलाकों और विस्थापितों के शिविरों के करीब हों, तो नागरिकों की मौत और बुनियादी ढांचे को नुकसान का जोखिम तेजी से बढ़ता है।
अल-मुखा के पास 11 ड्रोन गिराए जाने की रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि हवाई सुरक्षा और ड्रोन-रोधी प्रणालियां संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही हैं।
सरकार समर्थक खेमे में कुछ आवाजें इन हमलों और हूती लड़ाकों के बारे में किए गए नुकसान के दावों के आधार पर हूती-नियंत्रित राजधानी सना की ओर व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने की मांग कर रही हैं। हालांकि, ऐसा अभियान कठिन सैन्य-साजो-सामान संबंधी चुनौतियों, सरकार-विरोधी गुटों के बीच बिखराव और नागरिक नुकसान बढ़ने के गंभीर खतरे से जुड़ा होगा।
सबसे महत्वपूर्ण बात किसी एक मोर्चे पर बताए गए हताहतों की संख्या नहीं, बल्कि हमलों का फैलाव और उनका दोहराया जाना है। हूती हमले सरकारी ठिकानों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहे हैं, सरकारी बल ड्रोन और तोपखाने से जवाब दे रहे हैं, और उन मोर्चों पर फिर से लड़ाई तेज हो रही है जहां कुछ समय के लिए अपेक्षाकृत शांति थी।
उपलब्ध रिपोर्टें यह साबित नहीं करतीं कि पूरे देश में एक बार फिर पूर्ण पैमाने का युद्ध शुरू हो गया है। लेकिन वे गंभीर गिरावट जरूर दिखाती हैं। अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से बनी युद्धविराम-व्यवस्था के बाद यह यमन में बड़े पैमाने के संघर्ष की वापसी का सबसे गंभीर जोखिम माना जा रहा है।
फिलहाल मौतों और नुकसान के आंकड़े विवादित हैं। सबसे स्पष्ट निष्कर्ष यह है कि यमन का संघर्ष अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां मानवरहित हवाई प्रणालियां और लंबी दूरी के हथियार सैन्य बलों के साथ-साथ नागरिकों पर भी दबाव बढ़ा रहे हैं।
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यमन में मारिब, ताइज़, हद्रामौत और पश्चिमी तट समेत कई मोर्चों पर मिसाइल, ड्रोन और जमीनी हमले तेज हुए हैं।
यमन में मारिब, ताइज़, हद्रामौत और पश्चिमी तट समेत कई मोर्चों पर मिसाइल, ड्रोन और जमीनी हमले तेज हुए हैं। सरकारी बलों ने ताइज़ में हूती जमावड़ों, वाहनों और ठिकानों पर ड्रोन हमलों की बात कही, जबकि हूतियों ने मारिब के रिहायशी इलाकों और विस्थापितों के शिविरों को निशाना बनाया।
दोनों पक्षों की लंबी दूरी के हथियारों और मानवरहित हवाई प्रणालियों पर बढ़ती निर्भरता से सैन्य ठिकानों और नागरिक बस्तियों के बीच की सुरक्षा रेखा और कमजोर हो रही है।