MV Hondius डच ध्वज वाला पोलर एक्सपीडिशन क्रूज जहाज है। रिपोर्टों में इस प्रकोप को Andes hantavirus से जुड़ा बताया गया, जो हंटावायरस का दुर्लभ स्ट्रेन है और नजदीकी संपर्क की स्थितियों में व्यक्ति-से-व्यक्ति संक्रमण के लिए दर्ज किया गया है .
आमतौर पर हंटावायरस संक्रमण संक्रमित चूहों या कृंतकों के मूत्र और मल के संपर्क से जुड़ा होता है, और व्यक्ति-से-व्यक्ति संक्रमण दुर्लभ माना जाता है। इसी वजह से Andes स्ट्रेन की संभावना ने स्वास्थ्य अधिकारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने पर मजबूर किया .
मुख्य निकासी शुरू होने से पहले ही रिपोर्टों में इस प्रकोप को 3 मौतों और कई संदिग्ध या पुष्ट संक्रमणों से जोड़ा जा चुका था . साथ ही, संदिग्ध मामलों की संख्या बदलती रही, क्योंकि स्वास्थ्य अधिकारी जांच और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जारी रखे हुए थे
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पहला बड़ा कदम उन लोगों को निकालना था जिन्हें बीमार माना जा रहा था। विश्व स्वास्थ्य संगठन और क्रूज ऑपरेटर का हवाला देते हुए रिपोर्टों में कहा गया कि MV Hondius से हंटावायरस के 3 संदिग्ध मरीजों को निकाला गया और वे नीदरलैंड में चिकित्सा देखभाल ले रहे थे . इन तीनों को जर्मन, डच और ब्रिटिश नागरिक बताया गया, जिनमें एक ब्रिटिश क्रू सदस्य भी शामिल था
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अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक, केप वर्डे के पास जहाज से संदिग्ध मामलों को निकालने की कार्रवाई चल रही थी, जिसके बाद पोत स्पेन के कैनरी द्वीपों की ओर बढ़ा . इस शुरुआती मेडिकल निकासी ने जहाज को टेनेरीफे तक आगे बढ़ने का रास्ता दिया, जहां बाकी लोगों की जांच, देखभाल और स्वदेश वापसी की व्यवस्था की जानी थी
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MV Hondius रविवार, 10 मई 2026 की सुबह टेनेरीफे पहुंचा और वहीं से यात्रियों और क्रू की मुख्य निकासी शुरू हुई . रिपोर्टों के अनुसार जहाज टेनेरीफे के ग्रानादीया औद्योगिक बंदरगाह क्षेत्र में पहुंचा था
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यह किसी सामान्य क्रूज आगमन जैसा नहीं था, जहां यात्री आराम से उतरकर शहर में चले जाएं। उतरने की प्रक्रिया नियंत्रित समूहों में की गई। स्पेनिश यात्रियों को शुरुआती समूहों में बताया गया; एक रिपोर्ट के मुताबिक 14 स्पेनिश यात्री सबसे पहले उतरे और उन्हें 5-5 के समूहों में ले जाया गया . अन्य रिपोर्टों में भी कहा गया कि टेनेरीफे पहुंचने के बाद सबसे पहले स्पेनिश नागरिकों को उतारा गया
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सुरक्षात्मक पोशाक और श्वसन मास्क पहने कर्मियों ने यात्रियों को जहाज से किनारे तक ले जाने में मदद की। इसके बाद लोगों को बसों से एयरपोर्ट या चिकित्सा सुविधाओं की ओर भेजा गया .
जहाज से उतरने के बाद यात्रियों को टेनेरीफे में स्वतंत्र रूप से नहीं छोड़ा गया। कई देशों ने अपने नागरिकों को वापस ले जाने के लिए सरकारी या सैन्य विमान भेजे, और लौटने पर लोगों को क्वारंटीन या अस्पताल सुविधाओं में भेजा गया .
रिपोर्टों में कहा गया कि पहले निकाले गए यात्री मैड्रिड पहुंचे और उन्हें सैन्य अस्पताल ले जाया गया। इसके तुरंत बाद एक फ्रांसीसी निकासी विमान पेरिस उतरा, जहां आपातकालीन वाहनों ने यात्रियों को अस्पतालों तक पहुंचाया . कनाडाई और डच नागरिकों के लिए भी उड़ानों की रिपोर्ट दी गई
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यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल यानी ECDC ने जहाज से उतरते और अपने देशों को लौटते यात्रियों तथा क्रू को “हाई-रिस्क कॉन्टैक्ट” के रूप में वर्गीकृत किया . विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने जहाज से आए यात्रियों के लिए 42 दिन के क्वारंटीन की सिफारिश की, जिससे साफ है कि निगरानी की अवधि लंबी और सावधानीपूर्ण रखी गई
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उपलब्ध स्रोत किसी हिंसक, बेकाबू या नाकाम निकासी की तस्वीर नहीं देते। वे एक धीमी, निगरानी में चलने वाली प्रक्रिया बताते हैं: पहले मेडिकल निकासी, फिर जहाज का टेनेरीफे तक पहुंचना, उसके बाद समूह-दर-समूह उतरना, सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में ट्रांसफर और फिर सरकारी व्यवस्थाओं से आगे की उड़ानें .
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हालात सामान्य थे। यह निकासी ऐसे प्रकोप के बाद हुई, जिसे रिपोर्टों ने कई हफ्तों की बीमारी, 3 मौतों और अंतरराष्ट्रीय कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग से जोड़ा . फर्क बस इतना था कि निकासी अपने आप में जल्दबाजी या भगदड़ नहीं, बल्कि सार्वजनिक-स्वास्थ्य सावधानियों से संचालित प्रक्रिया थी
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