मोरक्को के अभियोजकों ने गिरफ्तार समर्थकों पर खेल आयोजन के दौरान हिंसा और अव्यवस्था फैलाने से जुड़े कई आरोप लगाए। इनमें मुख्य आरोप थे:
अदालत ने अंततः 19 लोगों को दोषी ठहराया—इनमें 18 सेनेगाली नागरिक और एक फ्रांसीसी नागरिक शामिल थे। सुनवाई कई घंटे चली, जिसके बाद फैसला सुनाया गया।
मोरक्को की अदालत ने दोषियों को तीन महीने से एक साल तक की जेल और जुर्माना दोनों की सजा दी। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार सजा इस प्रकार थी:
इनमें से कई आरोपी पहले ही फाइनल की रात से हिरासत में थे और मुकदमे से पहले कई हफ्ते जेल में रह चुके थे।
सजा सुनाए जाने के बाद सेनेगल में इसकी आलोचना हुई और मामला खेल से आगे बढ़कर कूटनीतिक स्तर तक पहुंच गया। सेनेगल के नेताओं ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और समाधान की अपील की।
बाद में सेनेगल के राष्ट्रपति बासिरू डियोमाये फाये ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मोरक्को के राजा मोहम्मद VI से कैद समर्थकों को माफी देने का अनुरोध किया था।
ईद अल-अज़हा से ठीक पहले मोरक्को के शाही दरबार ने घोषणा की कि इस मामले में दोषी ठहराए गए 18 सेनेगाली समर्थकों को शाही माफी दी जा रही है। महल के अनुसार यह निर्णय कई कारणों से लिया गया:
सरकारी बयान में इसे दोनों देशों के बीच दोस्ताना संबंधों को ध्यान में रखते हुए लिया गया कदम बताया गया।
राजा के इस फैसले ने दोनों देशों के बीच पैदा हुए तनाव को काफी हद तक शांत कर दिया। जिन समर्थकों को रिहाई मिली, उनमें से कुछ पहले ही अपनी सजा का हिस्सा काट चुके थे।
यह पूरा प्रकरण दिखाता है कि बड़े खेल आयोजन कभी‑कभी सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहते। रबात के इस AFCON फाइनल में शुरू हुआ स्टेडियम का हंगामा अदालत, कूटनीति और अंततः शाही माफी तक पहुंच गया—जिसका मकसद मोरक्को और सेनेगल के बीच संबंधों में फिर से संतुलन लाना था।