20 अगस्त को राष्ट्रपति जोसेफ आऊन ने पोप लियो XIV से दक्षिणी लेबनान पर इज़राइली हमले रोकने, कब्जे वाले क्षेत्रों से वापसी और 26 जून के ढांचे को लागू कराने में मदद मांगी। समझौते में हिज़्बुल्लाह के क्रमिक निरस्त्रीकरण, लेबनानी सेना की दक्षिण में तैनाती और इज़राइली बलों की चरणबद्ध वापसी का प्रावधान है, लेकिन हिज़्बुल्ल...
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Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What happened during Lebanese President Joseph Aoun’s meeting with Pope Leo XIV at the Vatican regarding Lebanon’s deteriorating security si. Article summary: President Joseph Aoun used his Vatican audience with Pope Leo XIV to seek stronger diplomatic backing for Lebanon amid worsening southern-border violence and stalled implementation of the June 26 U.S.-brokered Trilateral. Topic tags: general, general web, news. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आऊन ने 20 अगस्त को वेटिकन में पोप लियो XIV से मुलाकात कर दक्षिणी सीमा पर बढ़ती हिंसा और 26 जून को हुए अमेरिकी मध्यस्थता वाले त्रिपक्षीय ढांचे को लागू कराने के लिए कूटनीतिक समर्थन मांगा। होली सी ने समझौते पर स्वागत जताया, लेकिन उसके अमल में आ रही अड़चनों को लेकर “गंभीर चिंता” भी व्यक्त की और इसे लागू कराने के प्रयासों के समर्थन का भरोसा दिया।
लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, आऊन ने पोप से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लेबनान की मांगों का समर्थन जारी रखने की अपील की। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
इस मुलाकात का उद्देश्य स्पष्ट रूप से कूटनीतिक था। आऊन चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के जरिए समझौते में तय सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को दोनों पक्षों पर समान रूप से लागू कराया जाए और युद्ध तथा शांति पर राज्य के अधिकार के दावे को मजबूती मिले।
अमेरिका की मध्यस्थता में 26 जून को लेबनान, इज़राइल और अमेरिका के बीच हुआ यह समझौता हर विवाद का तत्काल अंतिम समाधान नहीं है। यह सुरक्षा व्यवस्था को चरणों में लागू करने की योजना पेश करता है। इसके तहत हिज़्बुल्लाह का क्रमिक निरस्त्रीकरण, दक्षिणी इलाकों में लेबनानी सशस्त्र बलों की तैनाती और इज़राइली बलों की चरणबद्ध वापसी का प्रावधान बताया गया है।
समझौते में अमल और सत्यापन की व्यवस्था भी अहम है। पहले चरण में दक्षिणी लेबनान के कुछ “पायलट ज़ोन” में लेबनानी सेना सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगी। संबंधित सुरक्षा शर्तों की पुष्टि के बाद इज़राइली बलों से उन इलाकों से पुनर्तैनाती की अपेक्षा की गई है।
यही क्रम इस पूरे विवाद का केंद्र बन गया है। हिज़्बुल्लाह नेता नईम क़ासिम ने अमेरिकी मध्यस्थता वाले समझौते को खारिज करते हुए कहा कि संगठन अपना सशस्त्र प्रतिरोध जारी रखेगा। दूसरी ओर, इज़राइल ने पूर्ण वापसी के बजाय घोषित सुरक्षा क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखी।
पोप से मुलाकात के बाद आऊन ने होली सी के विदेश नीति प्रमुख और राज्य सचिव कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन से भी बातचीत की। राज्यों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ संबंधों के लिए सचिव आर्चबिशप पॉल रिचर्ड गैलाघर भी इसमें शामिल हुए। वेटिकन के अनुसार, बातचीत में ढांचा समझौता, लेबनान की दक्षिणी सीमा को स्थिर करना और न्यायपूर्ण तथा टिकाऊ शांति हासिल करना प्रमुख विषय रहे।
वेटिकन की भूमिका कूटनीतिक रही। उसके आधिकारिक बयान में किसी नए प्रवर्तन तंत्र, सैन्य तैनाती या औपचारिक मध्यस्थता व्यवस्था की घोषणा नहीं की गई। इसके बजाय होली सी ने समझौते को लागू करने के प्रयासों का समर्थन किया और उसके अमल में आ रही गंभीर कठिनाइयों को सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि आऊन ने पोप को धन्य पितृसत्ता एलियास होयेक के अवशेष भेंट किए। हालांकि, यह विवरण होली सी के आधिकारिक बयान में शामिल नहीं था, इसलिए इसकी सार्वजनिक पुष्टि सीमित है।
यह कूटनीतिक अपील ऐसे समय हुई जब निगरानी रिपोर्टों में सैन्य गतिविधियों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। संयुक्त राष्ट्र की अंतरिम शांति सेना UNIFIL ने बताया कि 5 से 16 अगस्त के बीच प्रतिदिन औसतन 137 प्रक्षेप्य दागे गए। एक शनिवार को यह संख्या 208 और अगले रविवार को 185 रही।
UNIFIL ने 21 जून से 11 अगस्त के बीच लेबनानी हवाई क्षेत्र के 1,700 से अधिक उल्लंघन भी दर्ज किए। इसी अवधि में 100 से अधिक हवाई हमले और इज़राइली सेना की ओर से दागे गए 1,800 से अधिक प्रक्षेप्यों की सूचना मिली।
लेबनान के सरकारी मीडिया ने अलग से बताया कि अंसार और देर अल-ज़हरानी पर इज़राइली हमलों में कम से कम 11 लोग मारे गए, जिनमें तीन बच्चे और दो महिलाएं शामिल थीं। राष्ट्रपति आऊन ने कहा कि इन हमलों ने बातचीत की प्रक्रिया और समझौते को लागू कराने की कोशिशों की कठिनाई का स्पष्ट संकेत दिया।
ये आंकड़े उस माहौल को दिखाते हैं जिसमें कूटनीतिक प्रयास चल रहे हैं। वे यह साबित नहीं करते कि वेटिकन सीधे किसी पक्ष को समझौते का पालन करने के लिए मजबूर कर सकता है। हालांकि, वे यह जरूर समझाते हैं कि समझौते की सुरक्षा व्यवस्था अटकी रहने के बीच बेरूत व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन क्यों तलाश रहा है।
आऊन की रोम यात्रा में इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकातें भी शामिल होने की उम्मीद थी। इन वार्ताओं में दक्षिणी लेबनान में अंतरराष्ट्रीय बलों के भविष्य पर चर्चा होनी थी। इसमें फ्रांस और इटली की उस बहुराष्ट्रीय व्यवस्था की पहल भी शामिल है, जो UNIFIL का स्थान ले सकती है या उसके बाद जिम्मेदारी संभाल सकती है, क्योंकि उसका जनादेश इस वर्ष समाप्त होने वाला है।
भविष्य की ऐसी व्यवस्था से यह तय हो सकता है कि समझौते के अमल की निगरानी और सत्यापन कैसे किया जाएगा। फिर भी तत्काल समस्या जस की तस है: ढांचा समझौता ऐसे कदमों पर निर्भर है जिन पर इज़राइल, लेबनान और लेबनानी राजनीतिक गुटों के बीच अभी सहमति नहीं बनी है—और दक्षिण में हिंसा जारी है।
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20 अगस्त को राष्ट्रपति जोसेफ आऊन ने पोप लियो XIV से दक्षिणी लेबनान पर इज़राइली हमले रोकने, कब्जे वाले क्षेत्रों से वापसी और 26 जून के ढांचे को लागू कराने में मदद मांगी।
20 अगस्त को राष्ट्रपति जोसेफ आऊन ने पोप लियो XIV से दक्षिणी लेबनान पर इज़राइली हमले रोकने, कब्जे वाले क्षेत्रों से वापसी और 26 जून के ढांचे को लागू कराने में मदद मांगी। समझौते में हिज़्बुल्लाह के क्रमिक निरस्त्रीकरण, लेबनानी सेना की दक्षिण में तैनाती और इज़राइली बलों की चरणबद्ध वापसी का प्रावधान है, लेकिन हिज़्बुल्लाह ने इसे खारिज कर दिया और इज़राइल ने सुरक्षा क्षेत्र में अपनी मौजूदग...
आऊन की वेटिकन के वरिष्ठ अधिकारियों और इटली के नेताओं के साथ बातचीत का केंद्र दक्षिणी सीमा की स्थिरता, निगरानी व्यवस्था और UNIFIL के भविष्य से जुड़े विकल्प रहे।