हालांकि एक स्रोत में 149,000+ पैकेज का आंकड़ा भी बताया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि लाइवस्ट्रीम के दौरान प्रकाशित कुल संख्याओं में थोड़ा अंतर हो सकता है।
फिर भी मुख्य बात यह रही कि रोबोट लगभग एक हफ्ते तक लगातार वेयरहाउस‑स्टाइल काम करते रहे और उन्हें दूर से नियंत्रित नहीं करना पड़ा।
इस टेस्ट का मुख्य मापदंड था थ्रूपुट—यानी एक पैकेज को प्रोसेस करने में कितना समय लगता है।
Figure AI का दावा है कि उसका सिस्टम अब “human parity” यानी इंसानी स्तर के करीब पहुँच चुका है, जहां औसतन एक पैकेज को प्रोसेस करने में 3 सेकंड से कम समय लगता है।
डेमो में रोबोट का काम सामान्य वेयरहाउस प्रक्रिया जैसा था:
यदि हर पैकेज लगभग 3 सेकंड में प्रोसेस हो रहा है और यह गति हजारों पैकेज तक बनी रहती है, तो यह सिर्फ डेमो स्पीड नहीं बल्कि प्रोडक्शन‑लेवल काम के करीब माना जा सकता है।
इन F.03 रोबोट्स के पीछे Figure AI का खुद का बनाया हुआ AI सिस्टम Helix‑02 है।
Helix‑02 को कंपनी Vision‑Language‑Action (VLA) मॉडल कहती है। इसका मतलब है कि यह एक ही न्यूरल नेटवर्क में तीन चीजों को जोड़ता है:
यह सिस्टम कैमरों से मिलने वाले “पिक्सेल” को सीधे रोबोट की “एक्शन” कमांड में बदल देता है, जिससे रोबोट वास्तविक वातावरण में वस्तुओं को पहचानकर उन्हें संभाल सकता है।
लॉजिस्टिक्स में इसका मतलब है कि रोबोट अलग‑अलग पैकेज—जैसे बॉक्स, लिफाफे या पॉली बैग—को पहचानकर उन्हें सही तरीके से पकड़ सकता है और स्कैन करने के लिए घुमा सकता है।
टेस्ट के दौरान Figure AI ने एक दिलचस्प मुकाबला भी कराया—10 घंटे की सीधी प्रतियोगिता एक रोबोट और कंपनी के इंटर्न Aime के बीच।
दोनों को एक ही काम दिया गया:
अंतिम परिणाम बेहद करीब थे:
यानी स्पीड लगभग बराबर थी—लेकिन उस एक शिफ्ट में इंसान थोड़ा आगे रहा।
ह्यूमनॉइड रोबोट कई सालों से मौजूद हैं, लेकिन पहले अधिकतर डेमो कुछ मिनट या घंटों तक ही चलते थे।
Figure के इस प्रयोग से तीन महत्वपूर्ण संकेत मिलते हैं:
1. लंबी अवधि की विश्वसनीयता
लगातार 200 घंटे काम करना दिखाता है कि हार्डवेयर और कंट्रोल सिस्टम लंबे समय तक चल सकते हैं।
2. इंसान के करीब उत्पादकता
करीब 3 सेकंड प्रति पैकेज की गति वेयरहाउस में इंसानी उत्पादकता के काफी करीब है।
3. वास्तविक ऑटोनॉमी
रोबोट बिना टेलीऑपरेशन के काम कर रहे थे, यानी निर्णय और हरकतें सीधे AI द्वारा नियंत्रित थीं।
इन सबके आधार पर यह संकेत मिलता है कि ह्यूमनॉइड रोबोट धीरे‑धीरे छोटे डेमो से आगे बढ़कर वास्तविक औद्योगिक काम की ओर जा रहे हैं।
फिर भी यह याद रखना जरूरी है कि अभी तक ये नतीजे मुख्य रूप से कंपनी द्वारा चलाए गए डेमो और लाइवस्ट्रीम से आए हैं। बड़े पैमाने पर स्वतंत्र तैनाती (independent deployments) के आंकड़े अभी सीमित हैं।
इसलिए इसे तुरंत बड़े पैमाने पर इंसानी श्रम के प्रतिस्थापन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
लेकिन इतना साफ है कि अंतर अब बहुत कम रह गया है—वेयरहाउस के इस तरह के कामों में इंसान और ह्यूमनॉइड रोबोट के बीच फर्क अब मिनटों या घंटों का नहीं, बल्कि हर पैकेज पर कुछ सेकंड का रह गया है।
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