स्वर्ण पदक बीजिंग नंबर 80 हाई स्कूल के वांगजिंग कैंपस के लियू सीची ने जीता। वहीं बीजिंग नंबर 11 स्कूल के वांग युआनफू, बीजिंग नंबर 8 हाई स्कूल के सुन रोंगजे और बीजिंग नंबर 101 हाई स्कूल के झांग युशुआन ने रजत पदक हासिल किए।
इस तरह चीन के INSO डेब्यू में कोई भी छात्र खाली हाथ नहीं लौटा। क्षेत्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, पदक तालिका में सऊदी अरब पहले स्थान पर रहा, जबकि चीन को सामान्य तौर पर शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल बताया गया।
INSO 2026 का आयोजन 2 से 9 अगस्त 2026 तक सऊदी अरब के जेद्दा शहर में हुआ। तीसरे संस्करण में 19 देशों से जुड़े प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें लगभग 120 छात्र, वैज्ञानिक विशेषज्ञ और अन्य प्रतिनिधि शामिल थे।
इस प्रतियोगिता की मेजबानी किंग अब्दुलअज़ीज़ विश्वविद्यालय ने की। आयोजन में सऊदी अरब का शिक्षा मंत्रालय, किंग अब्दुलअज़ीज़ एंड हिज कम्पैनियंस फाउंडेशन फॉर गिफ्टेडनेस एंड क्रिएटिविटी और किंग अब्दुल्लाह सिटी फॉर एटॉमिक एंड रिन्यूएबल एनर्जी साझेदारों के रूप में शामिल रहे।
ओलंपियाड में सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक—दोनों तरह की परीक्षाएं हुईं। पाठ्यवस्तु में मुख्य रूप से ये क्षेत्र शामिल थे:
इस प्रारूप में छात्रों की विषयगत समझ के साथ-साथ उनकी व्यावहारिक वैज्ञानिक क्षमता भी परखी गई। प्रतियोगिता की शुरुआत में हाई स्कूल छात्रों के लिए पांच घंटे की प्रयोगात्मक परीक्षा आयोजित किए जाने की जानकारी भी दी गई थी।
आयोजन समिति के प्रतिनिधि तलाल अलरशीदी ने चीन की पहली भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने चीनी छात्रों के प्रदर्शन और प्रतियोगिता के दौरान उनके सकारात्मक रवैये की सराहना की।
स्वर्ण पदक विजेता लियू सीची ने कहा कि दुनिया भर के प्रतिभाशाली छात्रों के साथ मुकाबला करने से उनकी पढ़ाई जारी रखने और विज्ञान के क्षेत्र में नए लक्ष्य हासिल करने की दृढ़ता और मजबूत हुई।
INSO का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं है। प्रतियोगिता छात्रों को दूसरे देशों के साथियों से मिलने, वैज्ञानिक विचार साझा करने और परमाणु विज्ञान के सुरक्षित तथा शांतिपूर्ण उपयोगों को समझने का अवसर भी देती है। 2026 संस्करण का विषय “उज्ज्वल प्रतिभाएं, आशाजनक भविष्य” था।
चीनी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख वांग पेंग ने कहा कि चीन परमाणु विज्ञान की शिक्षा और जन-जागरूकता को आगे भी मजबूत करेगा। उनका लक्ष्य अधिक युवाओं को परमाणु क्षेत्र के बारे में जानने, समझने और इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
चीन की यह टीम “शियाओहे झिशेंग” (Voice of Xia He) INSO हाई स्कूल गतिविधि के जरिए चुनी गई थी। यह कार्यक्रम चीन की राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की मंजूरी से आयोजित हुआ, जबकि चाइना एटॉमिक एनर्जी प्रेस ने इसे आयोजित किया और सिंघुआ विश्वविद्यालय के परमाणु विज्ञान विभाग ने सहयोग दिया।
जेद्दा में मिला परिणाम चीन के लिए इस शिक्षा-मार्ग को आगे बढ़ाने का मजबूत आधार बन सकता है—रुचि रखने वाले हाई स्कूल छात्रों की पहचान करना, उन्हें परमाणु विज्ञान के विषयों में तैयार करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा व सहयोग के अवसर उपलब्ध कराना।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु विज्ञान ओलंपियाड की शुरुआत 2024 में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के समर्थन से हुई थी। चीनी रिपोर्टिंग इसे विशेष रूप से परमाणु विज्ञान पर केंद्रित दुनिया की पहली अंतरराष्ट्रीय युवा ओलंपियाड प्रतियोगिता बताती है। इसका उद्देश्य युवाओं में परमाणु विज्ञान के प्रति रुचि जगाना, अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और अधिक छात्रों को परमाणु विज्ञान तथा परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित करना है।
इसलिए चीन की पहली INSO भागीदारी का महत्व केवल एक स्वर्ण और तीन रजत पदकों तक सीमित नहीं है। पदक परिणाम चीन की तत्काल प्रतिस्पर्धी क्षमता दिखाता है, जबकि उसकी शिक्षा संबंधी योजनाएं यह संकेत देती हैं कि देश अगली पीढ़ी के लिए परमाणु विज्ञान को अधिक परिचित और सुलभ बनाने पर दीर्घकालिक जोर दे रहा है।
स्वर्ण पदक बीजिंग नंबर 80 हाई स्कूल के वांगजिंग कैंपस के लियू सीची ने जीता। वहीं बीजिंग नंबर 11 स्कूल के वांग युआनफू, बीजिंग नंबर 8 हाई स्कूल के सुन रोंगजे और बीजिंग नंबर 101 हाई स्कूल के झांग युशुआन ने रजत पदक हासिल किए।
इस तरह चीन के INSO डेब्यू में कोई भी छात्र खाली हाथ नहीं लौटा। क्षेत्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, पदक तालिका में सऊदी अरब पहले स्थान पर रहा, जबकि चीन को सामान्य तौर पर शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल बताया गया।
INSO 2026 का आयोजन 2 से 9 अगस्त 2026 तक सऊदी अरब के जेद्दा शहर में हुआ। तीसरे संस्करण में 19 देशों से जुड़े प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें लगभग 120 छात्र, वैज्ञानिक विशेषज्ञ और अन्य प्रतिनिधि शामिल थे।
इस प्रतियोगिता की मेजबानी किंग अब्दुलअज़ीज़ विश्वविद्यालय ने की। आयोजन में सऊदी अरब का शिक्षा मंत्रालय, किंग अब्दुलअज़ीज़ एंड हिज कम्पैनियंस फाउंडेशन फॉर गिफ्टेडनेस एंड क्रिएटिविटी और किंग अब्दुल्लाह सिटी फॉर एटॉमिक एंड रिन्यूएबल एनर्जी साझेदारों के रूप में शामिल रहे।
ओलंपियाड में सैद्धांतिक और प्रयोगात्मक—दोनों तरह की परीक्षाएं हुईं। पाठ्यवस्तु में मुख्य रूप से ये क्षेत्र शामिल थे:
इस प्रारूप में छात्रों की विषयगत समझ के साथ-साथ उनकी व्यावहारिक वैज्ञानिक क्षमता भी परखी गई। प्रतियोगिता की शुरुआत में हाई स्कूल छात्रों के लिए पांच घंटे की प्रयोगात्मक परीक्षा आयोजित किए जाने की जानकारी भी दी गई थी।
आयोजन समिति के प्रतिनिधि तलाल अलरशीदी ने चीन की पहली भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने चीनी छात्रों के प्रदर्शन और प्रतियोगिता के दौरान उनके सकारात्मक रवैये की सराहना की।
स्वर्ण पदक विजेता लियू सीची ने कहा कि दुनिया भर के प्रतिभाशाली छात्रों के साथ मुकाबला करने से उनकी पढ़ाई जारी रखने और विज्ञान के क्षेत्र में नए लक्ष्य हासिल करने की दृढ़ता और मजबूत हुई।
INSO का उद्देश्य केवल पदक जीतना नहीं है। प्रतियोगिता छात्रों को दूसरे देशों के साथियों से मिलने, वैज्ञानिक विचार साझा करने और परमाणु विज्ञान के सुरक्षित तथा शांतिपूर्ण उपयोगों को समझने का अवसर भी देती है। 2026 संस्करण का विषय “उज्ज्वल प्रतिभाएं, आशाजनक भविष्य” था।
चीनी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख वांग पेंग ने कहा कि चीन परमाणु विज्ञान की शिक्षा और जन-जागरूकता को आगे भी मजबूत करेगा। उनका लक्ष्य अधिक युवाओं को परमाणु क्षेत्र के बारे में जानने, समझने और इसमें भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है।
चीन की यह टीम “शियाओहे झिशेंग” (Voice of Xia He) INSO हाई स्कूल गतिविधि के जरिए चुनी गई थी। यह कार्यक्रम चीन की राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की मंजूरी से आयोजित हुआ, जबकि चाइना एटॉमिक एनर्जी प्रेस ने इसे आयोजित किया और सिंघुआ विश्वविद्यालय के परमाणु विज्ञान विभाग ने सहयोग दिया।
जेद्दा में मिला परिणाम चीन के लिए इस शिक्षा-मार्ग को आगे बढ़ाने का मजबूत आधार बन सकता है—रुचि रखने वाले हाई स्कूल छात्रों की पहचान करना, उन्हें परमाणु विज्ञान के विषयों में तैयार करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा व सहयोग के अवसर उपलब्ध कराना।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु विज्ञान ओलंपियाड की शुरुआत 2024 में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के समर्थन से हुई थी। चीनी रिपोर्टिंग इसे विशेष रूप से परमाणु विज्ञान पर केंद्रित दुनिया की पहली अंतरराष्ट्रीय युवा ओलंपियाड प्रतियोगिता बताती है। इसका उद्देश्य युवाओं में परमाणु विज्ञान के प्रति रुचि जगाना, अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और अधिक छात्रों को परमाणु विज्ञान तथा परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित करना है।
इसलिए चीन की पहली INSO भागीदारी का महत्व केवल एक स्वर्ण और तीन रजत पदकों तक सीमित नहीं है। पदक परिणाम चीन की तत्काल प्रतिस्पर्धी क्षमता दिखाता है, जबकि उसकी शिक्षा संबंधी योजनाएं यह संकेत देती हैं कि देश अगली पीढ़ी के लिए परमाणु विज्ञान को अधिक परिचित और सुलभ बनाने पर दीर्घकालिक जोर दे रहा है।