चीन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और कहा कि ताइवान संयुक्त राष्ट्र प्रणाली से जुड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अलग इकाई के रूप में भाग नहीं ले सकता।
बीजिंग का रुख मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर आधारित है:
चीनी अधिकारियों का कहना है कि WHA का प्रस्ताव 25.1 और WHO के नियम इसी निर्णय के अनुरूप हैं, इसलिए WHO प्रणाली में चीन के प्रतिनिधित्व का प्रश्न पहले ही तय हो चुका है।
चीनी सरकारी बयानों और राज्य‑समर्थित मीडिया ने इस नतीजे को इस बात का प्रमाण बताया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में “वन चाइना” सिद्धांत को व्यापक समर्थन प्राप्त है।
ताइवान के सहयोगी देशों ने इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद की बजाय वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य के नजरिये से देखने की अपील की।
कई सहयोगी देशों ने जिनेवा में कहा कि:
आधिकारिक निमंत्रण न मिलने के बावजूद, ताइवान के प्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों ने जिनेवा में कई साइड‑इवेंट और जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित कीं, जिनमें ताइवान की स्वास्थ्य उपलब्धियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रदर्शित किया गया।
ताज़ा फैसले का सीधा असर यह है कि ताइवान WHA से बाहर ही बना रहेगा, जैसा कि 2016 के बाद से लगातार हो रहा है।
2009 से 2016 के बीच ताइवान ने “Chinese Taipei” नाम से विश्व स्वास्थ्य सभा में पर्यवेक्षक के रूप में भाग लिया था। लेकिन बाद में ताइवान‑चीन संबंधों में राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद बीजिंग ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई और निमंत्रण बंद हो गए।
तब से हर साल ताइवान के सहयोगी देशों ने WHA के एजेंडा में इस मुद्दे को शामिल कराने की कोशिश की है, लेकिन अब तक हर बार प्रस्ताव असफल रहा है—जिसमें 2026 की 79वीं सभा भी शामिल है।
फिलहाल ताइवान वैश्विक स्वास्थ्य चर्चाओं में अनौपचारिक सहयोग, साझेदारी कार्यक्रमों और कूटनीतिक समर्थन के जरिए अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन WHO के मुख्य निर्णय‑निर्माण मंच से वह अभी भी बाहर है।
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