दूसरी ओर, यूनाइटेड किंगडम केवल 1 अंक के साथ आखिरी स्थान पर रहा, जो हाल के वर्षों में उसके कमजोर प्रदर्शन की एक और कड़ी बन गया।
इस साल का Eurovision सिर्फ संगीत के लिए ही नहीं बल्कि राजनीतिक विवादों के कारण भी सुर्खियों में रहा। यूरोपियन ब्रॉडकास्टिंग यूनियन (EBU) ने इज़राइल को प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी, जिसके विरोध में कई देशों के सार्वजनिक प्रसारकों ने प्रतियोगिता से हटने का फैसला किया।
आख़िरकार पांच देशों ने प्रतियोगिता का बहिष्कार किया:
दिलचस्प बात यह रही कि विवादों के बावजूद इज़राइल दूसरे स्थान पर रहा, जिसे दर्शकों के टेलीवोट से काफी समर्थन मिला।
2026 प्रतियोगिता से पहले आयोजक संस्था EBU ने वोटिंग सिस्टम में कुछ बदलाव किए। इन बदलावों का उद्देश्य परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ाना और वोटिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना था।
यह कदम पिछले वर्ष की प्रतियोगिता के बाद उठाया गया, जब बाहरी हस्तक्षेप और संगठित प्रचार अभियानों के जरिए सार्वजनिक वोटिंग को प्रभावित करने के आरोप लगे थे।
EBU के अनुसार इन सुधारों का लक्ष्य था:
Eurovision में सफल होने वाले गानों में अक्सर कुछ समान तत्व होते हैं—और “Bangaranga” उनमें से कई पर खरा उतरा:
कुल मिलाकर Eurovision 2026 दो वजहों से याद रखा जाएगा—एक तरफ बुल्गारिया की ऐतिहासिक जीत और दूसरी तरफ प्रतियोगिता के आसपास बढ़ती राजनीतिक बहसें।
जहां दारा की जीत बुल्गारियाई पॉप संगीत के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई, वहीं बहिष्कार, विरोध और वोटिंग पर उठे सवाल इस बात की याद दिलाते हैं कि दुनिया के सबसे बड़े टीवी संगीत समारोह पर भी वैश्विक राजनीति का असर पड़ सकता है।
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