पुलिस के अनुसार विवाद तब शुरू हुआ जब एक कार्यकर्ता का रिश्तेदार आगमन क्षेत्र में उनसे मिलने आगे बढ़ा और एक अधिकारी ने उसे रोकने की कोशिश की। इसके बाद समर्थकों और पुलिस के बीच हाथापाई शुरू हो गई।
घटना के वीडियो सामने आने के बाद स्पेन में खासकर बास्क क्षेत्र और फिलिस्तीन समर्थक समूहों के बीच तीखी आलोचना हुई।
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पुलिस के व्यवहार को “अत्यधिक बल प्रयोग” बताते हुए इसकी जवाबदेही तय करने की मांग की।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया जब स्पेन पहले ही फ्लोटिला मामले को लेकर इज़राइल की आलोचना कर चुका था। स्पेन के विदेश मंत्री होसे मैनुअल अल्बारेस ने फ्लोटिला कार्यकर्ताओं के साथ इज़राइल के व्यवहार को “भयानक”, “अमानवीय” और “शर्मनाक” कहा था।
स्पेन के एक अन्य मंत्री एर्नेस्ट उर्तासुन ने अभियोजकों से यह जांच करने की मांग भी की कि क्या हिरासत के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ था।
बिलबाओ एयरपोर्ट की झड़प के वीडियो सामने आने के बाद इज़राइल के विदेश मंत्रालय ने स्पेन से स्पष्टीकरण मांगा।
इज़राइली अधिकारियों ने कहा कि ये घटनाएँ दिखाती हैं कि फ्लोटिला से जुड़े कार्यकर्ता जहाँ भी जाते हैं, वहाँ विवाद पैदा होता है। उन्होंने यह भी कहा कि बिलबाओ की तस्वीरें स्पेन द्वारा पहले की गई इज़राइल‑विरोधी आलोचना को कमजोर करती हैं।
इस बयानबाज़ी ने पहले से तनावपूर्ण मैड्रिड और यरूशलेम के संबंधों में और कड़वाहट जोड़ दी।
बिलबाओ में शामिल कार्यकर्ता Global Sumud फ्लोटिला का हिस्सा थे—यह एक अंतरराष्ट्रीय नागरिक अभियान है जिसका उद्देश्य गाज़ा की समुद्री नाकाबंदी को चुनौती देना और मानवीय सहायता पहुँचाना था।
मई 2026 में इज़राइली नौसेना ने इस बेड़े को साइप्रस के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में रोक लिया जब यह गाज़ा की ओर बढ़ रहा था।
रिपोर्टों के अनुसार इस अभियान में दर्जनों नौकाएँ और 100 से अधिक कार्यकर्ता शामिल थे। इज़राइली बलों ने जहाजों पर चढ़कर मिशन को रोक दिया।
बाद में कई कार्यकर्ताओं को ग्रीस के क्रीट द्वीप ले जाया गया और फिर उन्हें उनके देशों में वापस भेज दिया गया।
जो अभियान भूमध्य सागर में शुरू हुआ था, उसका असर यूरोप के अंदर तक महसूस किया गया। बिलबाओ एयरपोर्ट पर हुआ टकराव इसी व्यापक विवाद का एक नया अध्याय बन गया।
जहाँ समर्थकों के लिए यह कार्यकर्ताओं की सुरक्षित वापसी का क्षण था, वहीं पुलिस के साथ झड़प ने इसे एक स्थानीय कानून‑व्यवस्था की घटना से बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बना दिया।
Comments
0 comments