लेकिन प्रस्ताव सामने आने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। पांच दिनों के भीतर UEFA ने बहिष्कार की धमकी दी, CONCACAF और AFC ने योजना खारिज कर दी, FIFA के एक वरिष्ठ सलाहकार ने इस्तीफा दे दिया और इंफैंटिनो को प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। इसके बाद UEFA ने उनके नेतृत्व से भरोसा उठने की बात कही।
28 जुलाई 2026 को लंदन के द टाइम्स ने सबसे पहले रिपोर्ट किया कि FIFA अपनी गैर-लाभकारी संरचना से अलग एक नई कमर्शियल इकाई बनाने पर विचार कर रहा है । FIFA ने बाद में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वह अपने कमर्शियल अधिकारों—जिनमें प्रसारण, प्रायोजन, टिकटिंग और लाइसेंसिंग शामिल हैं—को टूर्नामेंटों के संचालन के साथ एक नई इकाई, FIFA Forward Enterprise, में लाने की संभावना तलाश रहा है ।
प्रस्ताव के अनुसार:
इंफैंटिनो ने 211 सदस्य संघों के लिए इसे “एक singular और unique funding opportunity” बताया। प्रस्ताव के तहत प्रत्येक सदस्य संघ को एकमुश्त 2 करोड़ डॉलर मिलने थे । उन्होंने 19 सितंबर की समय-सीमा भी तय की और सदस्य संघों को बताया कि योजना मंजूर नहीं होने पर 10 अरब डॉलर के फंडिंग पैकेज से वे वंचित हो सकते हैं ।
FIFA का तर्क था कि गैर-लाभकारी दर्जा बरकरार रखते हुए कमर्शियल गतिविधियों में निजी पूंजी लाने से फुटबॉल विकास के लिए अधिक धन उपलब्ध होगा। आलोचकों को आशंका थी कि इससे वर्ल्ड कप जैसे वैश्विक खेल आयोजन को निवेश की संपत्ति में बदलने का रास्ता खुल जाएगा ।
प्रस्ताव के सार्वजनिक होते ही यूरोपीय फुटबॉल की शासी संस्था UEFA ने इसका विरोध किया। UEFA ने कहा: “यह बेचने के लिए FIFA का नहीं है। हममें से कोई भी फुटबॉल का मालिक नहीं है” ।
UEFA ने अपने 55 सदस्य संघों की आपात बैठक बुलाई। बैठक में सभी FIFA प्रतियोगिताओं, जिसमें वर्ल्ड कप भी शामिल है, के बहिष्कार का विकल्प रखा गया ।
30 जुलाई को हुई ऑनलाइन बैठक में UEFA के सभी 55 सदस्य संघों ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि इंफैंटिनो की निजीकरण योजना आगे बढ़ती है तो यूरोप के देश पुरुष और महिला वर्ल्ड कप, क्लब वर्ल्ड कप तथा अन्य FIFA प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लेंगे ।
UEFA ने बयान में कहा, “UEFA और उसके राष्ट्रीय संघ FIFA प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लेंगे।” उसका संदेश था कि जब तक यूरोप की आवाज है, वर्ल्ड कप बिक्री के लिए नहीं होगा ।
उसी दिन उत्तर और मध्य अमेरिका तथा कैरेबियाई क्षेत्र की फुटबॉल संस्था CONCACAF ने भी प्रस्ताव को औपचारिक रूप से खारिज कर दिया। CONCACAF में 41 सदस्य संघ शामिल हैं । उसके बयान में कहा गया कि सदस्य संघों का जियानी इंफैंटिनो पर भरोसा कम हो रहा है या कई मामलों में पूरी तरह खत्म हो चुका है ।
UEFA और CONCACAF के विरोध के बाद FIFA के 211 में से 96 सदस्य संघ सार्वजनिक रूप से योजना के खिलाफ आ चुके थे ।
31 जुलाई को एशियन फुटबॉल कॉन्फेडरेशन (AFC) ने भी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। AFC ने FIFA की सलाह-मशविरे की प्रक्रिया और निर्णय लेने के तरीके पर “गहरी चिंता” जताई और FIFA से अपनी प्रबंधन शैली की तत्काल समीक्षा करने को कहा । ESPN ने AFC के रुख को इंफैंटिनो की स्थिति के लिए “घातक झटका” बताया ।
विरोध अब FIFA के अंदरूनी घेरे तक पहुंच गया। इंफैंटिनो के वरिष्ठ सलाहकार कार्लोस कॉर्डेइरो ने 31 जुलाई को इस्तीफा दे दिया ।
कॉर्डेइरो पूर्व Goldman Sachs बैंकर हैं और 2026 वर्ल्ड कप के लिए White House Task Force में FIFA के प्रतिनिधि भी थे। उन्होंने कुशनर-समर्थित 20 अरब डॉलर की योजना को “फुटबॉल के लिए खराब सौदा” कहा । उनके इस्तीफे ने यह संकेत दिया कि संकट केवल बाहरी विरोध तक सीमित नहीं था।
शुरुआत में FIFA ने पीछे हटने के संकेत नहीं दिए। 31 जुलाई को संगठन ने कहा कि वह सदस्य संघों से सलाह-मशविरा जारी रखेगा और “गलत मीडिया रिपोर्टों” ने स्थिति को प्रभावित किया है ।
लेकिन कुछ ही घंटों में रुख बदल गया। देर रात इंफैंटिनो ने घोषणा की कि प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ेगा । FIFA के बयान में कहा गया कि सभी पक्षों की बात सुनने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि परियोजना ने ऐसे मतभेद पैदा कर दिए हैं जो मूल उद्देश्य के हित में नहीं हैं ।
इस तरह FIFA Forward Enterprise का प्रस्ताव समाप्त हो गया—कम से कम मौजूदा रूप में।
योजना वापस लिए जाने के बाद UEFA ने अपना रुख और कठोर कर दिया। 1 अगस्त को UEFA ने प्रस्ताव को “घटिया, पर्दे के पीछे तैयार और अस्पष्ट” समझौता बताया और कहा कि उसका इंफैंटिनो के नेतृत्व से भरोसा उठ गया है ।
UEFA ने प्रस्ताव वापस लेने का स्वागत तो किया, लेकिन यह भी कहा कि इंफैंटिनो के कदमों से उन्होंने फुटबॉल जगत का विश्वास खो दिया है । यानी योजना का गिरना संकट का अंत नहीं, बल्कि इंफैंटिनो के नेतृत्व पर एक नए राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत बन गया।
अगस्त 2026 की शुरुआत तक इंफैंटिनो ने इस्तीफा नहीं दिया था और उन्हें औपचारिक रूप से हटाया भी नहीं गया था। फिर भी उनकी स्थिति पहले से कहीं अधिक कमजोर दिख रही थी:
UEFA के बहिष्कार की धमकी भी बनी हुई है। यदि इसी तरह की कोई निजीकरण योजना दोबारा सामने आती है, तो उसके 55 सदस्य संघ FIFA प्रतियोगिताओं से दूर रहने की बात कह चुके हैं । AFC ने भी FIFA की निर्णय प्रक्रिया में बुनियादी सुधारों की मांग की है ।
FIFA के लिए यह विवाद सिर्फ एक असफल कारोबारी सौदे का मामला नहीं है। संगठन को अब दो कठिन सवालों का सामना करना होगा। पहला, दुनिया भर में फुटबॉल विकास के लिए अतिरिक्त धन कैसे जुटाया जाए? दूसरा, वर्ल्ड कप और अन्य प्रतियोगिताओं के कमर्शियल अधिकारों पर नियंत्रण किसके पास रहे?
इंफैंटिनो ने निजी निवेश को विकास कार्यक्रमों के लिए फंडिंग का माध्यम बताया था। विरोध करने वाले संघों ने इसे पारदर्शिता, सलाह-मशविरे और फुटबॉल के सामूहिक स्वामित्व से जुड़ा सवाल माना। इसी टकराव ने एक प्रस्ताव को कुछ ही दिनों में वैश्विक फुटबॉल संकट में बदल दिया।
FIFA Forward Enterprise का 20 अरब डॉलर का प्रस्ताव अब आगे नहीं बढ़ रहा है। UEFA, CONCACAF और AFC के विरोध ने इंफैंटिनो की योजना को रोक दिया, जबकि 96 सदस्य संघों के खुलकर खिलाफ आने से FIFA के भीतर शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ा है।
प्रस्ताव भले ही वापस ले लिया गया हो, लेकिन इसके राजनीतिक परिणाम अभी बाकी हैं। UEFA का भरोसा खोना, वरिष्ठ सलाहकार का इस्तीफा और बहिष्कार की धमकी—ये सभी इंफैंटिनो के अध्यक्ष पद के लिए सबसे गंभीर चुनौती की ओर इशारा करते हैं। फिलहाल उनकी कुर्सी बरकरार है, लेकिन 2016 में पद संभालने के बाद पहली बार उनका नेतृत्व इतने व्यापक और संगठित विद्रोह के घेरे में है।